Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग रवि 21 मई 2000
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में
व्रत
संकष्टी चतुर्थी
संकष्टी चतुर्थी रवि 21 मई को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है। रवि 21 मई क्यों?
संकष्टी चतुर्थी: Sevan में हर तारीख़21 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 21 मई
- 05:23–06:00ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:38 से
- 10:17–12:07लाभ चौघड़िया
- 12:07–13:56अमृत चौघड़िया
-
12:24–13:56अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · मूल में
- 13:27–13:56अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 15:46–17:36शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 21:15 के बाद
- 21:15–22:25शुभ चौघड़िया
- 22:25–23:35अमृत चौघड़िया
- 03:06–04:16 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:27–06:37 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:22–06:00 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:38–08:27उद्वेगअशुभ
- 08:27–10:17चरसामान्य
- 10:17–12:07लाभशुभ
- 12:07–13:56अमृतशुभ
- 13:56–15:46कालअशुभ
- 15:46–17:36शुभ
- 17:36–19:25रोगअशुभ
- 19:25–21:15उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 21:15–22:25शुभ
- 22:25–23:35अमृतशुभ
- 23:35–00:46 सोमचरसामान्य
- 00:46–01:56 सोमरोगअशुभ
- 01:56–03:06 सोमकालअशुभ
- 03:06–04:16 सोमलाभशुभ
- 04:16–05:27 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:27–06:37 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 21 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 05:23–06:00, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:38–08:27
- चर, सामान्य, 08:27–10:17
- लाभ, शुभ, 10:17–12:07
- अमृत, शुभ, 12:07–13:56
- काल, अशुभ, 13:56–15:46
- शुभ, 15:46–17:36
- रोग, अशुभ, 17:36–19:25
- उद्वेग, अशुभ, 19:25–21:15
- शुभ, 21:15–22:25
- अमृत, शुभ, 22:25–23:35
- चर, सामान्य, 23:35–00:46 सोम
- रोग, अशुभ, 00:46–01:56 सोम
- काल, अशुभ, 01:56–03:06 सोम
- लाभ, शुभ, 03:06–04:16 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 04:16–05:27 सोम
- शुभ, 05:27–06:37 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 13:27–14:26, शुभ
- यमगण्ड, 13:56–15:46, अशुभ
- गुलिक काल, 17:36–19:25, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 19:18–20:16, अशुभ
- राहु काल, 19:25–21:15, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:22–06:00 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में संकष्टी चतुर्थी रवि 21 मई को क्यों है?
संकष्टी चतुर्थी रवि 21 मई को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है।
संकष्टी का व्रत चंद्रोदय पर खोला जाता है। चतुर्थी रवि 21 मई को 18:47 से सोम 22 मई को 21:22 तक है, इसलिए चंद्रोदय पर वह केवल रवि 21 मई को है, 00:01 सोम पर। संकष्टी चतुर्थी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; चंद्रोदय Tithika की परिपाटी है।
रवि 21 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण तृतीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 210.5° आगे था: कृष्ण तृतीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 204°–216° अठारहवीं है, कृष्ण तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:38। द्वितीया उससे पहले 16:23 शनि पर समाप्त हुई। तृतीया 18:47 को समाप्त होगी, जब बढ़त 216° होगी। बढ़त 18 मई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
रवि 21 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:23–06:00
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:23–06:00।
शनि 20 मई की रात सूर्यास्त 21:14 शनि से सूर्योदय 06:38 तक थी, 9 घं 24 मि। इसे 37 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 21 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:27–14:26
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:27–14:26।
रवि 21 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 19:18–20:16
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 19:18–20:16।
यहाँ दिन, 06:38 से 21:15, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 58 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 19:18–20:16।
रवि 21 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:38–08:27 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:38 से 21:15, 1 घं 49 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 21:15 से 06:37 सोम, 1 घं 10 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 21 मई को राहुकाल कब है? 19:25–21:15
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 19:25–21:15।
रवि 21 मई को यमगंड कब है? 13:56–15:46
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:56–15:46।
रवि 21 मई को गुलिक काल कब है? 17:36–19:25
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 17:36–19:25।
यहाँ दिन 06:38 से 21:15 तक है, 14 घं 37 मि। इसे 1 घं 49 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 21 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 06:38
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:38, सूर्यास्त 21:15, 14 घं 37 मि का दिन।
रवि 21 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 21:15
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:38, सूर्यास्त 21:15, 14 घं 37 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 37 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 22 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 37 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 22 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 21 मई को कौन सा नक्षत्र है? मूल
सूर्योदय पर चंद्रमा 246.9° पर था: मूल, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मूल 240°00′–253°20′ तक है; चंद्रमा 246°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 19:35 को निकलेगा, पूर्वाषाढा में।
रवि 21 मई को कौन सा योग है? साध्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 283.4° थे: साध्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 36.5° + 246.9° = 283.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 280°00′–293°20′ बाईसवाँ है, साध्य। यह 01:16 सोम को समाप्त होता है, फिर शुभ।
रवि 21 मई को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 210.5° थी: तृतीया का दूसरा आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 05:33 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 210° हुई; विष्टि 18:47 तक है।
रवि 21 मई को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:38, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:38 से 06:37 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 21 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 4 मई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 14 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 2 जून, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
रवि 21 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 2 जून की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ है, और अमान्त गणना में वैशाख।
रवि 21 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2057 · शक 1922
विक्रम संवत 2057 4 अप्रैल 2000 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 4 अप्रैल 2000, 23:12 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 45.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2057 गिनता है; शक संवत 1922।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 21 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 00:01 सोम
चंद्रमा यहाँ 00:01 सोम पर उदय होता है।
रवि 21 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 08:53
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 08:53 पर अस्त हुआ; वह फिर 00:01 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 08:53 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 00:01 सोम पर उदय होगा।