Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग सोम 18 अगस्त 1997
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में
त्योहार
रक्षा बंधन
रक्षा बंधन सोम 18 अगस्त को है: उस दिन पूर्णिमा अपराह्न को छूती है, और किसी दिन नहीं। सोम 18 अगस्त क्यों?
रक्षा बंधन: Sevan में हर तारीख़व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा सोम 18 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। सोम 18 अगस्त क्यों?
पूर्णिमा: Sevan में हर तारीख़18 अगस्त का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 18 अगस्त
- 05:50–06:32ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:13 से
- 07:13–08:55अमृत चौघड़िया
- 10:38–12:20शुभ चौघड़िया
- 14:03–14:30अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
-
15:25–15:46अमृत कालगुलिक काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · धनिष्ठा में
- 18:09–19:11लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 19:11–20:53अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 20:53 के बाद
- 00:46–02:03 मंगललाभ चौघड़िया
- 03:21–04:39 मंगलशुभ चौघड़िया
- 04:39–05:56 मंगलअमृत चौघड़िया
- 05:51–06:32 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:13–08:55अमृतशुभ
- 08:55–10:38कालअशुभ
- 10:38–12:20शुभ
- 12:20–14:03रोगअशुभ
- 14:03–15:46उद्वेगअशुभ
- 15:46–17:28चरसामान्य
- 17:28–19:11लाभशुभ
- 19:11–20:53अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 20:53–22:11चरसामान्य
- 22:11–23:28रोगअशुभ
- 23:28–00:46 मंगलकालअशुभ
- 00:46–02:03 मंगललाभशुभ
- 02:03–03:21 मंगलउद्वेगअशुभ
- 03:21–04:39 मंगलशुभ
- 04:39–05:56 मंगलअमृतशुभ
- 05:56–07:14 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 18 अगस्त: ब्रह्म मुहूर्त, 05:50–06:32, शुभ
- अमृत, शुभ, 07:13–08:55
- काल, अशुभ, 08:55–10:38
- शुभ, 10:38–12:20
- रोग, अशुभ, 12:20–14:03
- उद्वेग, अशुभ, 14:03–15:46
- चर, सामान्य, 15:46–17:28
- लाभ, शुभ, 17:28–19:11
- अमृत, शुभ, 19:11–20:53
- चर, सामान्य, 20:53–22:11
- रोग, अशुभ, 22:11–23:28
- काल, अशुभ, 23:28–00:46 मंगल
- लाभ, शुभ, 00:46–02:03 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 02:03–03:21 मंगल
- शुभ, 03:21–04:39 मंगल
- अमृत, शुभ, 04:39–05:56 मंगल
- चर, सामान्य, 05:56–07:14 मंगल
- राहु काल, 08:55–10:38, अशुभ
- यमगण्ड, 12:20–14:03, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 13:36–14:30, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:30–15:25, अशुभ
- गुलिक काल, 15:46–17:28, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:14–18:09, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:51–06:32 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में रक्षा बंधन सोम 18 अगस्त को क्यों है?
रक्षा बंधन सोम 18 अगस्त को है: उस दिन पूर्णिमा अपराह्न को छूती है, और किसी दिन नहीं।
राखी अपराह्न में, भद्रा के बाहर, बाँधी जाती है: दिन का चौथा पाँचवाँ भाग। पूर्णिमा रवि 17 अगस्त को 19:29 से सोम 18 अगस्त को 15:55 तक है, इसलिए वह केवल सोमवार के अपराह्न (15:25–18:09) को छूती है। हर मत यही दिन लेता है।
Sevan में पूर्णिमा सोम 18 अगस्त को क्यों है?
पूर्णिमा सोम 18 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा रवि 17 अगस्त को 19:29 से सोम 18 अगस्त को 15:55 तक है, इसलिए वह केवल सोम 18 अगस्त के सूर्योदय (07:13) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
सोम 18 अगस्त को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 174.9° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:13। चतुर्दशी उससे पहले 19:29 रवि पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 15:55 को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 3 अगस्त की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
सोम 18 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:50–06:32
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:50–06:32।
रवि 17 अगस्त की रात सूर्यास्त 20:55 रवि से सूर्योदय 07:13 तक थी, 10 घं 18 मि। इसे 41 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 18 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:36–14:30
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:36–14:30।
सोम 18 अगस्त को दुर्मुहूर्त कब है? 14:30–15:25
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 14:30–15:25 और 17:14–18:09।
सोम 18 अगस्त को दुर्मुहूर्त कब है? 17:14–18:09
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 14:30–15:25 और 17:14–18:09।
यहाँ दिन, 07:13 से 20:53, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 54 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 14:30–15:25 और 17:14–18:09।
सोम 18 अगस्त का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:13–08:55 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:13 से 20:53, 1 घं 42 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:53 से 07:14 मंगल, 1 घं 17 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 18 अगस्त को राहुकाल कब है? 08:55–10:38
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:55–10:38।
सोम 18 अगस्त को यमगंड कब है? 12:20–14:03
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 12:20–14:03।
सोम 18 अगस्त को गुलिक काल कब है? 15:46–17:28
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 15:46–17:28।
यहाँ दिन 07:13 से 20:53 तक है, 13 घं 40 मि। इसे 1 घं 42 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 18 अगस्त को सूर्योदय कितने बजे है? 07:13
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:13, सूर्यास्त 20:53, 13 घं 40 मि का दिन।
सोम 18 अगस्त को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:53
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:13, सूर्यास्त 20:53, 13 घं 40 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 21 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 21 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 18 अगस्त को कौन सा नक्षत्र है? धनिष्ठा
सूर्योदय पर चंद्रमा 296.2° पर था: धनिष्ठा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। धनिष्ठा 293°20′–306°40′ तक है; चंद्रमा 293°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 23:47 को निकलेगा, शतभिषा में।
सोम 18 अगस्त को कौन सा योग है? शोभन
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 417.6° थे, एक चक्कर और 57.6°: शोभन।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 121.4° + 296.2° = 417.6°, एक पूरा चक्कर और 57.6°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 53°20′–66°40′ पाँचवाँ है, शोभन। यह 20:46 को समाप्त होता है, फिर अतिगण्ड।
सोम 18 अगस्त को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 174.9° थी: पूर्णिमा का दूसरा आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 05:43 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 174° हुई; बव 15:55 तक है।
सोम 18 अगस्त को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 07:13, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:13 से 07:14 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 18 अगस्त को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? श्रावण
यह मास 3 अगस्त की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कर्क में था: श्रावण।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कर्क से श्रावण। सूर्य 16 अगस्त को, मास के भीतर, सिंह में जाता है। अगली अमावस्या, 2 सितंबर, उसे सिंह में पाती है और भाद्रपद शुरू करती है।
सोम 18 अगस्त को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? श्रावण
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष श्रावण का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 3 अगस्त की अमावस्या ने, सूर्य कर्क में, श्रावण शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में श्रावण है।
सोम 18 अगस्त को कौन सा संवत है? विक्रम 2054 · शक 1919
विक्रम संवत 2054 7 अप्रैल 1997 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 7 अप्रैल 1997, 16:01 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 127.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2054 गिनता है; शक संवत 1919।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 18 अगस्त को चंद्रोदय कितने बजे है? 20:48
चंद्रमा यहाँ 20:48 पर उदय होता है।
चंद्रमा 20:48 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।