Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शुक्र 25 अप्रैल 1997
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में
25 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 25 अप्रैल
- 05:44–06:26ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:07 से
- 08:50–10:32लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 10:46–12:15अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:58–14:25अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 13:58–14:25शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
13:58–14:25अमृत कालराहु काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · अनुराधा में
- 15:20–15:41शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 20:49 के बाद
- 23:23–00:40 शनिलाभ चौघड़िया
- 01:57–03:14 शनिशुभ चौघड़िया
- 03:14–04:31 शनिअमृत चौघड़िया
- 05:43–06:24 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:07–08:50चरसामान्य
- 08:50–10:32लाभगुलिक काल में
- 10:32–12:15अमृतशुभ
- 12:15–13:58कालअशुभ
- 13:58–15:41शुभ
- 15:41–17:23रोगअशुभ
- 17:23–19:06उद्वेगअशुभ
- 19:06–20:49चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 20:49–22:06रोगअशुभ
- 22:06–23:23कालअशुभ
- 23:23–00:40 शनिलाभशुभ
- 00:40–01:57 शनिउद्वेगअशुभ
- 01:57–03:14 शनिशुभ
- 03:14–04:31 शनिअमृतशुभ
- 04:31–05:48 शनिचरसामान्य
- 05:48–07:05 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 25 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 05:44–06:26, शुभ
- चर, सामान्य, 07:07–08:50
- लाभ, शुभ, 08:50–10:32
- अमृत, शुभ, 10:32–12:15
- काल, अशुभ, 12:15–13:58
- शुभ, 13:58–15:41
- रोग, अशुभ, 15:41–17:23
- उद्वेग, अशुभ, 17:23–19:06
- चर, सामान्य, 19:06–20:49
- रोग, अशुभ, 20:49–22:06
- काल, अशुभ, 22:06–23:23
- लाभ, शुभ, 23:23–00:40 शनि
- उद्वेग, अशुभ, 00:40–01:57 शनि
- शुभ, 01:57–03:14 शनि
- अमृत, शुभ, 03:14–04:31 शनि
- चर, सामान्य, 04:31–05:48 शनि
- रोग, अशुभ, 05:48–07:05 शनि
- गुलिक काल, 08:50–10:32, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:51–10:46, अशुभ
- राहु काल, 12:15–13:58, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 13:30–14:25, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:25–15:20, अशुभ
- यमगण्ड, 17:23–19:06, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:43–06:24 शनि
हर मान कैसे निकलता है
शुक्र 25 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण तृतीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 206.5° आगे था: कृष्ण तृतीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 204°–216° अठारहवीं है, कृष्ण तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:07। द्वितीया उससे पहले 02:10 पर समाप्त हुई। तृतीया 01:46 शनि को समाप्त होगी, जब बढ़त 216° होगी। बढ़त 23 अप्रैल की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शुक्र 25 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:44–06:26
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:44–06:26।
गुरु 24 अप्रैल की रात सूर्यास्त 20:48 गुरु से सूर्योदय 07:07 तक थी, 10 घं 19 मि। इसे 41 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 25 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:30–14:25
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:30–14:25।
शुक्र 25 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 09:51–10:46
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:51–10:46 और 14:25–15:20।
शुक्र 25 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 14:25–15:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:51–10:46 और 14:25–15:20।
यहाँ दिन, 07:07 से 20:49, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 54 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 09:51–10:46 और 14:25–15:20।
शुक्र 25 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:07–08:50 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:07 से 20:49, 1 घं 42 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:49 से 07:05 शनि, 1 घं 17 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 25 अप्रैल को राहुकाल कब है? 12:15–13:58
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 12:15–13:58।
शुक्र 25 अप्रैल को यमगंड कब है? 17:23–19:06
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 17:23–19:06।
शुक्र 25 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 08:50–10:32
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:50–10:32।
यहाँ दिन 07:07 से 20:49 तक है, 13 घं 42 मि। इसे 1 घं 42 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 25 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 07:07
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:07, सूर्यास्त 20:49, 13 घं 42 मि का दिन।
शुक्र 25 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:49
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:07, सूर्यास्त 20:49, 13 घं 42 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 42 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 42 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 25 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? अनुराधा
सूर्योदय पर चंद्रमा 217.6° पर था: अनुराधा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अनुराधा 213°20′–226°40′ तक है; चंद्रमा 216°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 23:38 को निकलेगा, ज्येष्ठा में।
शुक्र 25 अप्रैल को कौन सा योग है? वरीयान्
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 228.7° थे: वरीयान्।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 11.1° + 217.6° = 228.7°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 226°40′–240°00′ अठारहवाँ है, वरीयान्। यह 02:16 शनि को समाप्त होता है, फिर परिघ।
शुक्र 25 अप्रैल को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 206.5° थी: तृतीया का पहला आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 14:01 तक है, जब बढ़त 210° होगी; विष्टि 01:46 शनि तक।
शुक्र 25 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 07:07, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:07 से 07:05 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 25 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र
यह मास 7 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 13 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 7 मई, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।
शुक्र 25 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष वैशाख का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 7 मई की अमावस्या, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ वैशाख है, और अमान्त गणना में चैत्र।
शुक्र 25 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2054 · शक 1919
विक्रम संवत 2054 7 अप्रैल 1997 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 7 अप्रैल 1997, 16:01 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 17.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2054 गिनता है; शक संवत 1919।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 25 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 23:24
चंद्रमा यहाँ 23:24 पर उदय होता है।
शुक्र 25 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 08:54
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 08:54 पर अस्त हुआ; वह फिर 23:24 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 08:54 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 23:24 पर उदय होगा।