Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शुक्र 23 अक्टूबर 1992
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
त्योहार
धनतेरस
धनतेरस शुक्र 23 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शुक्र 23 अक्टूबर क्यों?
धनतेरस: Sevan में हर तारीख़व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत शुक्र 23 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शुक्र 23 अक्टूबर क्यों?
प्रदोष व्रत: Sevan में हर तारीख़व्रत का पारण
रमा एकादशी
23 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 23 अक्टूबर
- 04:34–05:27ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:19 से
- 07:40–09:01लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:12–10:22अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:44–12:05अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 11:44–12:05शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:48–13:05शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 17:08 के बाद
-
17:16–18:43अमृत कालउत्तराफाल्गुनी में
- 20:26–22:05लाभ चौघड़िया
- 23:44–01:23 शनिशुभ चौघड़िया
- 01:23–03:02 शनिअमृत चौघड़िया
- 04:35–05:28 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:19–07:40चरसामान्य
- 07:40–09:01लाभगुलिक काल में
- 09:01–10:22अमृतशुभ
- 10:22–11:44कालअशुभ
- 11:44–13:05शुभ
- 13:05–14:26रोगअशुभ
- 14:26–15:47उद्वेगअशुभ
- 15:47–17:08चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 17:08–18:47रोगअशुभ
- 18:47–20:26कालअशुभ
- 20:26–22:05लाभशुभ
- 22:05–23:44उद्वेगअशुभ
- 23:44–01:23 शनिशुभ
- 01:23–03:02 शनिअमृतशुभ
- 03:02–04:41 शनिचरसामान्य
- 04:41–06:20 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 23 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:34–05:27, शुभ
- चर, सामान्य, 06:19–07:40
- लाभ, शुभ, 07:40–09:01
- अमृत, शुभ, 09:01–10:22
- काल, अशुभ, 10:22–11:44
- शुभ, 11:44–13:05
- रोग, अशुभ, 13:05–14:26
- उद्वेग, अशुभ, 14:26–15:47
- चर, सामान्य, 15:47–17:08
- रोग, अशुभ, 17:08–18:47
- काल, अशुभ, 18:47–20:26
- लाभ, शुभ, 20:26–22:05
- उद्वेग, अशुभ, 22:05–23:44
- शुभ, 23:44–01:23 शनि
- अमृत, शुभ, 01:23–03:02 शनि
- चर, सामान्य, 03:02–04:41 शनि
- रोग, अशुभ, 04:41–06:20 शनि
- गुलिक काल, 07:40–09:01, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 08:29–09:12, अशुभ
- राहु काल, 10:22–11:44, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:22–12:05, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:05–12:48, अशुभ
- यमगण्ड, 14:26–15:47, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:35–05:28 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में धनतेरस शुक्र 23 अक्टूबर को क्यों है?
धनतेरस शुक्र 23 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शुक्र 23 अक्टूबर को 07:55 से शनि 24 अक्टूबर को 04:57 तक है, इसलिए केवल शुक्रवार का प्रदोष काल (17:08–19:46) उसके भीतर है। धनतेरस का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
धनतेरस पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:08–19:46। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 18:09 से 19:46 तक उदित रहता है।
Sevan में प्रदोष व्रत शुक्र 23 अक्टूबर को क्यों है?
प्रदोष व्रत शुक्र 23 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शुक्र 23 अक्टूबर को 07:55 से शनि 24 अक्टूबर को 04:57 तक है, इसलिए केवल शुक्रवार का प्रदोष काल (17:08–19:46) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 23 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 323.1° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:19। एकादशी उससे पहले 10:50 गुरु पर समाप्त हुई। द्वादशी 07:55 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 11 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
त्रयोदशी क्षय क्यों है?
त्रयोदशी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन त्रयोदशी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। त्रयोदशी 07:55 को शुरू हुई और 04:57 शनि को समाप्त, 06:19 और 06:20 शनि के सूर्योदयों के बीच। शुक्रवार को द्वादशी है और शनिवार को चतुर्दशी: त्रयोदशी यहाँ क्षय तिथि है।
शुक्र 23 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:34–05:27
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:34–05:27।
गुरु 22 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:09 गुरु से सूर्योदय 06:19 तक थी, 13 घं 10 मि। इसे 52 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 23 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:22–12:05
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:22–12:05।
शुक्र 23 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:29–09:12
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:29–09:12 और 12:05–12:48।
शुक्र 23 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 12:05–12:48
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:29–09:12 और 12:05–12:48।
यहाँ दिन, 06:19 से 17:08, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 43 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 08:29–09:12 और 12:05–12:48।
शुक्र 23 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:19–07:40 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:19 से 17:08, 1 घं 21 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:08 से 06:20 शनि, 1 घं 39 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 23 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 10:22–11:44
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:22–11:44।
शुक्र 23 अक्टूबर को यमगंड कब है? 14:26–15:47
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:26–15:47।
शुक्र 23 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 07:40–09:01
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:40–09:01।
यहाँ दिन 06:19 से 17:08 तक है, 10 घं 49 मि। इसे 1 घं 21 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 23 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:19
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:19, सूर्यास्त 17:08, 10 घं 49 मि का दिन।
शुक्र 23 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:08
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:19, सूर्यास्त 17:08, 10 घं 49 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 49 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 12 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 49 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 12 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 23 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 149.3° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 146°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 23:48 को निकलेगा, हस्त में।
शुक्र 23 अक्टूबर को कौन सा योग है? इन्द्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 335.5° थे: इन्द्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 186.2° + 149.3° = 335.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 333°20′–346°40′ छब्बीसवाँ है, इन्द्र। यह 23:23 को समाप्त होता है, फिर वैधृति।
शुक्र 23 अक्टूबर को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 323.1° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 21:23 गुरु पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 07:55 तक है।
शुक्र 23 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:19, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:19 से 06:20 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 23 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 26 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 25 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
शुक्र 23 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 25 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
शुक्र 23 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2049 · शक 1914
विक्रम संवत 2049 3 अप्रैल 1992 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 1992, 09:01 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 196.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2049 गिनता है; शक संवत 1914।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 23 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:31 शनि
चंद्रमा यहाँ 04:31 शनि पर उदय होता है।
शुक्र 23 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 15:23
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:23 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:31 शनि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:23 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:31 शनि पर उदय होगा।