Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 23 जनवरी 1992
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
23 जनवरी का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 जनवरी
- 05:23–06:20ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:17 से
- 07:17–08:31शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:52–12:31अभिजीत मुहूर्त
- 12:11–13:25लाभ चौघड़िया
- 13:25–14:38अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 15:52–17:06शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:06 के बाद
- 17:06–18:52अमृत चौघड़िया
- 00:11–01:57 शुक्रलाभ चौघड़िया
-
02:21–03:51 शुक्रअमृत कालउत्तराफाल्गुनी में
- 03:44–05:30 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:30–07:17 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 05:23–06:20 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:17–08:31शुभयमगण्ड में
- 08:31–09:44रोगअशुभ
- 09:44–10:58उद्वेगअशुभ
- 10:58–12:11चरसामान्य
- 12:11–13:25लाभशुभ
- 13:25–14:38अमृतराहु काल में
- 14:38–15:52कालअशुभ
- 15:52–17:06शुभ
रात का चौघड़िया
- 17:06–18:52अमृतशुभ
- 18:52–20:38चरसामान्य
- 20:38–22:25रोगअशुभ
- 22:25–00:11 शुक्रकालअशुभ
- 00:11–01:57 शुक्रलाभशुभ
- 01:57–03:44 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:44–05:30 शुक्रशुभ
- 05:30–07:17 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 जनवरी: ब्रह्म मुहूर्त, 05:23–06:20, शुभ
- शुभ, 07:17–08:31
- रोग, अशुभ, 08:31–09:44
- उद्वेग, अशुभ, 09:44–10:58
- चर, सामान्य, 10:58–12:11
- लाभ, शुभ, 12:11–13:25
- अमृत, शुभ, 13:25–14:38
- काल, अशुभ, 14:38–15:52
- शुभ, 15:52–17:06
- अमृत, शुभ, 17:06–18:52
- चर, सामान्य, 18:52–20:38
- रोग, अशुभ, 20:38–22:25
- काल, अशुभ, 22:25–00:11 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:11–01:57 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:57–03:44 शुक्र
- शुभ, 03:44–05:30 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:30–07:17 शुक्र
- यमगण्ड, 07:17–08:31, अशुभ
- गुलिक काल, 09:44–10:58, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:33–11:13, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:52–12:31, शुभ
- राहु काल, 13:25–14:38, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:29–15:08, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:23–06:20 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 23 जनवरी को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्थी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 226° आगे था: कृष्ण चतुर्थी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 216°–228° उन्नीसवीं है, कृष्ण चतुर्थी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:17। तृतीया उससे पहले 13:42 बुध पर समाप्त हुई। चतुर्थी 10:51 को समाप्त होगी, जब बढ़त 228° होगी। बढ़त 20 जनवरी की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 23 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:23–06:20
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:23–06:20।
बुध 22 जनवरी की रात सूर्यास्त 17:04 बुध से सूर्योदय 07:17 तक थी, 14 घं 13 मि। इसे 56 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 23 जनवरी को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:52–12:31
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:52–12:31।
गुरु 23 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 10:33–11:13
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:33–11:13 और 14:29–15:08।
गुरु 23 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 14:29–15:08
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:33–11:13 और 14:29–15:08।
यहाँ दिन, 07:17 से 17:06, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 39 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:33–11:13 और 14:29–15:08।
गुरु 23 जनवरी का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:17–08:31 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:17 से 17:06, 1 घं 13 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:06 से 07:17 शुक्र, 1 घं 46 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 23 जनवरी को राहुकाल कब है? 13:25–14:38
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:25–14:38।
गुरु 23 जनवरी को यमगंड कब है? 07:17–08:31
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:17–08:31।
गुरु 23 जनवरी को गुलिक काल कब है? 09:44–10:58
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:44–10:58।
यहाँ दिन 07:17 से 17:06 तक है, 9 घं 49 मि। इसे 1 घं 13 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 23 जनवरी को सूर्योदय कितने बजे है? 07:17
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:17, सूर्यास्त 17:06, 9 घं 49 मि का दिन।
गुरु 23 जनवरी को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:06
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:17, सूर्यास्त 17:06, 9 घं 49 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 49 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 11 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 49 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 11 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 144.7° पर था: पूर्वाफाल्गुनी, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाफाल्गुनी 133°20′–146°40′ तक है; चंद्रमा 143°20′ पर उसके पद 4 में आया। वह 10:37 को निकलेगा, उत्तराफाल्गुनी में।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा योग है? शोभन
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 423.4° थे, एक चक्कर और 63.4°: शोभन।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 278.7° + 144.7° = 423.4°, एक पूरा चक्कर और 63.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 53°20′–66°40′ पाँचवाँ है, शोभन। यह 12:29 को समाप्त होता है, फिर अतिगण्ड।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 226° थी: चतुर्थी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्थी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 00:12 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 222° हुई; बालव 10:51 तक है।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 07:17, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:17 से 07:17 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? पौष
यह मास 5 जनवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य धनु में था: पौष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: धनु से पौष। सूर्य 14 जनवरी को, मास के भीतर, मकर में जाता है। अगली अमावस्या, 3 फ़रवरी, उसे मकर में पाती है और माघ शुरू करती है।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? माघ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष माघ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 3 फ़रवरी की अमावस्या, सूर्य मकर में, माघ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ माघ है, और अमान्त गणना में पौष।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा संवत है? विक्रम 2048 · शक 1913
विक्रम संवत 2048 16 मार्च 1991 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 16 मार्च 1991, 12:10 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 307.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2048 गिनता है; शक संवत 1913।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 23 जनवरी को चंद्रोदय कितने बजे है? 21:44
चंद्रमा यहाँ 21:44 पर उदय होता है।
गुरु 23 जनवरी को चंद्रास्त कितने बजे है? 09:04
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:04 पर अस्त हुआ; वह फिर 21:44 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:04 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 21:44 पर उदय होगा।