Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग सोम 1 अप्रैल 1985
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में
व्रत
कामदा एकादशी
स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी सोम 1 अप्रैल को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 2 अप्रैल को व्रत रखते हैं। सोम 1 अप्रैल क्यों?
कामदा एकादशी: Sevan में हर तारीख़1 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 1 अप्रैल
- 06:13–06:58ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:44 से
- 07:44–09:19अमृत चौघड़िया
- 10:54–12:29शुभ चौघड़िया
- 14:04–14:29अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 17:52–18:49लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 18:49–20:24अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 20:24 के बाद
- 00:38–02:03 मंगललाभ चौघड़िया
-
03:17–04:48 मंगलअमृत कालअश्लेशा में
- 03:28–04:53 मंगलशुभ चौघड़िया
- 04:53–06:17 मंगलअमृत चौघड़िया
- 06:12–06:57 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:44–09:19अमृतशुभ
- 09:19–10:54कालअशुभ
- 10:54–12:29शुभ
- 12:29–14:04रोगअशुभ
- 14:04–15:39उद्वेगअशुभ
- 15:39–17:14चरसामान्य
- 17:14–18:49लाभशुभ
- 18:49–20:24अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 20:24–21:49चरसामान्य
- 21:49–23:13रोगअशुभ
- 23:13–00:38 मंगलकालअशुभ
- 00:38–02:03 मंगललाभशुभ
- 02:03–03:28 मंगलउद्वेगअशुभ
- 03:28–04:53 मंगलशुभ
- 04:53–06:17 मंगलअमृतशुभ
- 06:17–07:42 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 1 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 06:13–06:58, शुभ
- अमृत, शुभ, 07:44–09:19
- काल, अशुभ, 09:19–10:54
- शुभ, 10:54–12:29
- रोग, अशुभ, 12:29–14:04
- उद्वेग, अशुभ, 14:04–15:39
- चर, सामान्य, 15:39–17:14
- लाभ, शुभ, 17:14–18:49
- अमृत, शुभ, 18:49–20:24
- चर, सामान्य, 20:24–21:49
- रोग, अशुभ, 21:49–23:13
- काल, अशुभ, 23:13–00:38 मंगल
- लाभ, शुभ, 00:38–02:03 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 02:03–03:28 मंगल
- शुभ, 03:28–04:53 मंगल
- अमृत, शुभ, 04:53–06:17 मंगल
- चर, सामान्य, 06:17–07:42 मंगल
- राहु काल, 09:19–10:54, अशुभ
- यमगण्ड, 12:29–14:04, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 13:38–14:29, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:29–15:20, अशुभ
- गुलिक काल, 15:39–17:14, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:01–17:52, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 06:12–06:57 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में कामदा एकादशी सोम 1 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी सोम 1 अप्रैल को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 2 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 1 अप्रैल को 07:46 पर, उस सूर्योदय (07:44) के बाद, लगती है और मंगल 2 अप्रैल को 05:47 पर, अगले सूर्योदय (07:42 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 1 अप्रैल।
सोम 1 अप्रैल को कौन सी तिथि है? शुक्ल दशमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 119.9° आगे था: शुक्ल दशमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 108°–120° दसवीं है, शुक्ल दशमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:44। नवमी उससे पहले 08:58 रवि पर समाप्त हुई। दशमी 07:46 को समाप्त होगी, जब बढ़त 120° होगी। बढ़त 21 मार्च की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
एकादशी क्षय क्यों है?
एकादशी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन एकादशी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। एकादशी 07:46 को शुरू हुई और 05:47 मंगल को समाप्त, 07:44 और 07:42 मंगल के सूर्योदयों के बीच। सोमवार को दशमी है और मंगलवार को द्वादशी: एकादशी यहाँ क्षय तिथि है।
सोम 1 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 06:13–06:58
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 06:13–06:58।
रवि 31 मार्च की रात सूर्यास्त 20:23 रवि से सूर्योदय 07:44 तक थी, 11 घं 21 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 1 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:38–14:29
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:38–14:29।
सोम 1 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 14:29–15:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 14:29–15:20 और 17:01–17:52।
सोम 1 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 17:01–17:52
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 14:29–15:20 और 17:01–17:52।
यहाँ दिन, 07:44 से 20:24, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 14:29–15:20 और 17:01–17:52।
सोम 1 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:44–09:19 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:44 से 20:24, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:24 से 07:42 मंगल, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 1 अप्रैल को राहुकाल कब है? 09:19–10:54
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 09:19–10:54।
सोम 1 अप्रैल को यमगंड कब है? 12:29–14:04
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 12:29–14:04।
सोम 1 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 15:39–17:14
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 15:39–17:14।
यहाँ दिन 07:44 से 20:24 तक है, 12 घं 40 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 1 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 07:44
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:44, सूर्यास्त 20:24, 12 घं 40 मि का दिन।
सोम 1 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:24
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:44, सूर्यास्त 20:24, 12 घं 40 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 18 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 18 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 1 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? अश्लेशा
सूर्योदय पर चंद्रमा 107.7° पर था: अश्लेशा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अश्लेशा 106°40′–120°00′ तक है; चंद्रमा 106°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 04:48 मंगल को निकलेगा, मघा में।
सोम 1 अप्रैल को कौन सा योग है? धृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 455.4° थे, एक चक्कर और 95.4°: धृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 347.7° + 107.7° = 455.4°, एक पूरा चक्कर और 95.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 93°20′–106°40′ आठवाँ है, धृति। यह 01:50 मंगल को समाप्त होता है, फिर शूल।
सोम 1 अप्रैल को कौन सा करण है? गर
सूर्योदय पर बढ़त 119.9° थी: दशमी का दूसरा आधा, गर।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए दशमी का पहला आधा तैतिल है और दूसरा गर। तैतिल 20:28 रवि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 114° हुई; गर 07:46 तक है।
सोम 1 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 07:44, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:44 से 07:42 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 1 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र
यह मास 21 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 13 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 20 अप्रैल, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।
सोम 1 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 21 मार्च की अमावस्या ने, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में चैत्र है।
सोम 1 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2042 · शक 1907
विक्रम संवत 2042 21 मार्च 1985 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 21 मार्च 1985, 15:58 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 10.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2042 गिनता है; शक संवत 1907।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 1 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 15:24
चंद्रमा यहाँ 15:24 पर उदय होता है।
सोम 1 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 06:17 मंगल
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:24 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 06:17 मंगल पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:24 पर उदय हुआ; वह फिर 06:17 मंगल पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।