Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शनि 18 सितंबर 1982
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में
18 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 18 सितंबर
- 06:10–06:56ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:42 से
- 09:21–10:48शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:29–14:18अभिजीत मुहूर्त
- 15:26–16:59लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 16:59–18:32अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 20:04 के बाद
- 20:04–21:32लाभ चौघड़िया
- 22:59–00:27 रविशुभ चौघड़िया
- 00:27–01:54 रविअमृत चौघड़िया
-
02:59–04:33 रविअमृत कालहस्त में
- 06:16–07:43 रविलाभ चौघड़िया
- 06:10–06:57 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:42–09:15कालअशुभ
- 09:15–10:48शुभ
- 10:48–12:21रोगअशुभ
- 12:21–13:53उद्वेगअशुभ
- 13:53–15:26चरसामान्य
- 15:26–16:59लाभयमगण्ड में
- 16:59–18:32अमृतशुभ
- 18:32–20:04कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 20:04–21:32लाभशुभ
- 21:32–22:59उद्वेगअशुभ
- 22:59–00:27 रविशुभ
- 00:27–01:54 रविअमृतशुभ
- 01:54–03:21 रविचरसामान्य
- 03:21–04:49 रविरोगअशुभ
- 04:49–06:16 रविकालअशुभ
- 06:16–07:43 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 18 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 06:10–06:56, शुभ
- काल, अशुभ, 07:42–09:15
- शुभ, 09:15–10:48
- रोग, अशुभ, 10:48–12:21
- उद्वेग, अशुभ, 12:21–13:53
- चर, सामान्य, 13:53–15:26
- लाभ, शुभ, 15:26–16:59
- अमृत, शुभ, 16:59–18:32
- काल, अशुभ, 18:32–20:04
- लाभ, शुभ, 20:04–21:32
- उद्वेग, अशुभ, 21:32–22:59
- शुभ, 22:59–00:27 रवि
- अमृत, शुभ, 00:27–01:54 रवि
- चर, सामान्य, 01:54–03:21 रवि
- रोग, अशुभ, 03:21–04:49 रवि
- काल, अशुभ, 04:49–06:16 रवि
- लाभ, शुभ, 06:16–07:43 रवि
- गुलिक काल, 07:42–09:15, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:42–08:32, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 08:32–09:21, अशुभ
- राहु काल, 10:48–12:21, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 13:29–14:18, शुभ
- यमगण्ड, 15:26–16:59, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 06:10–06:57 रवि
हर मान कैसे निकलता है
शनि 18 सितंबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल प्रतिपदा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 7.8° आगे था: शुक्ल प्रतिपदा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 0°–12° पहली है, शुक्ल प्रतिपदा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:42। अमावस्या उससे पहले 17:09 शुक्र पर समाप्त हुई। प्रतिपदा 15:35 को समाप्त होगी, जब बढ़त 12° होगी। बढ़त 17 सितंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
शनि 18 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 06:10–06:56
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 06:10–06:56।
शुक्र 17 सितंबर की रात सूर्यास्त 20:06 शुक्र से सूर्योदय 07:42 तक थी, 11 घं 36 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 18 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:29–14:18
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:29–14:18।
शनि 18 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:42–08:32
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 07:42–08:32 और 08:32–09:21।
शनि 18 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:32–09:21
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 07:42–08:32 और 08:32–09:21।
यहाँ दिन, 07:42 से 20:04, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 07:42–08:32 और 08:32–09:21।
शनि 18 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:42–09:15 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:42 से 20:04, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:04 से 07:43 रवि, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 18 सितंबर को राहुकाल कब है? 10:48–12:21
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:48–12:21।
शनि 18 सितंबर को यमगंड कब है? 15:26–16:59
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 15:26–16:59।
शनि 18 सितंबर को गुलिक काल कब है? 07:42–09:15
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:42–09:15।
यहाँ दिन 07:42 से 20:04 तक है, 12 घं 22 मि। इसे 1 घं 32 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 18 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:42
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:42, सूर्यास्त 20:04, 12 घं 22 मि का दिन।
शनि 18 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:04
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:42, सूर्यास्त 20:04, 12 घं 22 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 22 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 22 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 18 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 159.1° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 156°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 09:19 को निकलेगा, हस्त में।
शनि 18 सितंबर को कौन सा योग है? शुक्ल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 310.4° थे: शुक्ल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 151.3° + 159.1° = 310.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 306°40′–320°00′ चौबीसवाँ है, शुक्ल। यह 23:33 को समाप्त होता है, फिर ब्रह्म।
शनि 18 सितंबर को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 7.8° थी: प्रतिपदा का दूसरा आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए प्रतिपदा का पहला आधा किंस्तुघ्न है और दूसरा बव। किंस्तुघ्न 04:18 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 6° हुई; बव 15:35 तक है।
शनि 18 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 07:42, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:42 से 07:43 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 18 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन (अधिक)
17 सितंबर और 17 अक्टूबर की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक आश्विन।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 17 सितंबर 17:09 शुक्र से 17 अक्टूबर 04:04 रवि तक सूर्य कन्या में रहा; तुला में वह अमावस्या के बाद 17 अक्टूबर 11:46 रवि को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक आश्विन है, जो आश्विन से पहले आता है।
शनि 18 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष आश्विन (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 सितंबर की अमावस्या ने, सूर्य कन्या में, आश्विन (अधिक) शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में आश्विन (अधिक) है।
शनि 18 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2039 · शक 1904
विक्रम संवत 2039 25 मार्च 1982 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 25 मार्च 1982, 14:17 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 170.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2039 गिनता है; शक संवत 1904।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 18 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 08:21
चंद्रमा यहाँ 08:21 पर उदय होता है।
शनि 18 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 20:57
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:21 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 20:57 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:21 पर उदय हुआ; वह फिर 20:57 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।