tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 1 नवंबर 1979

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में

द्वादशी

शुक्ल पक्ष · 18:20 तक

फिर त्रयोदशी · 15:24 शुक्र तक

व्रत

प्रदोष व्रत

प्रदोष पूजा मुहूर्त
17:57⁠–⁠20:40
प्रदोष काल 17:57⁠–⁠20:40

प्रदोष व्रत गुरु 1 नवंबर को है: उस शाम त्रयोदशी प्रदोष काल को छूती है, और किसी शाम नहीं। गुरु 1 नवंबर क्यों?

प्रदोष व्रत: Sevan में हर तारीख़

व्रत का पारण

देवउठनी एकादशी

पारण गुरु 1 नवंबर, 07:29 से सूर्यास्त 17:57 तक
देवउठनी एकादशी: Sevan में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

05:41 07:29 17:57अगला सूर्योदय 07:30 शुक्र

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 07:29–08:47शुभयमगण्ड में
  • 08:47–10:06रोगअशुभ
  • 10:06–11:24उद्वेगअशुभ
  • 11:24–12:43चरसामान्य
  • 12:43–14:01लाभशुभ
  • 14:01–15:20अमृतराहु काल में
  • 15:20–16:39कालअशुभ
  • 16:39–17:57शुभ

रात का चौघड़िया

  • 17:57–19:39अमृतशुभ
  • 19:39–21:20चरसामान्य
  • 21:20–23:02रोगअशुभ
  • 23:02–00:43 शुक्रकालअशुभ
  • 00:43–02:25 शुक्रलाभशुभ
  • 02:25–04:07 शुक्रउद्वेगअशुभ
  • 04:07–05:48 शुक्रशुभ
  • 05:48–07:30 शुक्रअमृतशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, गुरु 1 नवंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:41–06:35, शुभ
  • शुभ, 07:29–08:47
  • रोग, अशुभ, 08:47–10:06
  • उद्वेग, अशुभ, 10:06–11:24
  • चर, सामान्य, 11:24–12:43
  • लाभ, शुभ, 12:43–14:01
  • अमृत, शुभ, 14:01–15:20
  • काल, अशुभ, 15:20–16:39
  • शुभ, 16:39–17:57
  • अमृत, शुभ, 17:57–19:39
  • चर, सामान्य, 19:39–21:20
  • रोग, अशुभ, 21:20–23:02
  • काल, अशुभ, 23:02–00:43 शुक्र
  • लाभ, शुभ, 00:43–02:25 शुक्र
  • उद्वेग, अशुभ, 02:25–04:07 शुक्र
  • शुभ, 04:07–05:48 शुक्र
  • अमृत, शुभ, 05:48–07:30 शुक्र
  • यमगण्ड, 07:29–08:47, अशुभ
  • गुलिक काल, 10:06–11:24, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 10:58–11:40, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:22–13:04, शुभ
  • राहु काल, 14:01–15:20, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 15:10–15:52, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:41–06:36 शुक्र

हर मान कैसे निकलता है

Sevan में प्रदोष व्रत गुरु 1 नवंबर को क्यों है?

प्रदोष व्रत गुरु 1 नवंबर को है: उस शाम त्रयोदशी प्रदोष काल को छूती है, और किसी शाम नहीं।

द्वादशी त्रयोदशी 18:20 15:00 17:00 21:00 गुरु 1 नवंबर स्मार्त · वैष्णव प्रदोष काल 17:57–20:40
द्वादशी त्रयोदशी 18:20 15:00 17:00 21:00 गुरु 1 नवंबर स्मार्त · वैष्णव प्रदोष काल 17:57–20:40
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी गुरु 1 नवंबर को 18:20 से शुक्र 2 नवंबर को 15:24 तक है, इसलिए वह केवल गुरुवार के प्रदोष काल (17:57–20:40) को छूती है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।

प्रदोष व्रत: Sevan में हर तारीख़

गुरु 1 नवंबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वादशी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 137.8° आगे था: शुक्ल द्वादशी।

सूर्य अमावस्या 0° 137.8° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 137.8° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 132°–144° बारहवीं है, शुक्ल द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:29। एकादशी उससे पहले 21:11 बुध पर समाप्त हुई। द्वादशी 18:20 को समाप्त होगी, जब बढ़त 144° होगी। बढ़त 21 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।

गुरु 1 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:41–06:35

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:41–06:35।

सूर्यास्त 17:59 बुध सूर्योदय 07:29 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 31 अक्टूबर का दिन 14 1
सूर्यास्त 17:59 बुध सूर्योदय 07:29 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 31 अक्टूबर का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · बुधवार का दिन धुँधला

बुध 31 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:59 बुध से सूर्योदय 07:29 तक थी, 13 घं 30 मि। इसे 54 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

गुरु 1 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:22–13:04

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:22–13:04।

गुरु 1 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:58–11:40

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:58–11:40 और 15:10–15:52।

गुरु 1 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:10–15:52

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:58–11:40 और 15:10–15:52।

सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 12 1
सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 6, 12

यहाँ दिन, 07:29 से 17:57, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 41 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:58–11:40 और 15:10–15:52।

गुरु 1 नवंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

07:29–08:47 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।

सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 07:29 से 17:57, 1 घं 18 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 17:57 से 07:30 शुक्र, 1 घं 41 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

गुरु 1 नवंबर को राहुकाल कब है? 14:01–15:20

राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:01–15:20।

गुरु 1 नवंबर को यमगंड कब है? 07:29–08:47

यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:29–08:47।

गुरु 1 नवंबर को गुलिक काल कब है? 10:06–11:24

गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:06–11:24।

सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 1, गुलिक काल 3

यहाँ दिन 07:29 से 17:57 तक है, 10 घं 28 मि। इसे 1 घं 18 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

गुरु 1 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:29

यहाँ दिन: सूर्योदय 07:29, सूर्यास्त 17:57, 10 घं 28 मि का दिन।

गुरु 1 नवंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:57

यहाँ दिन: सूर्योदय 07:29, सूर्यास्त 17:57, 10 घं 28 मि का दिन।

सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 04:57 शुक्र चंद्रोदय 16:33
सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 04:57 शुक्र चंद्रोदय 16:33
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 28 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 33 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 28 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 33 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

गुरु 1 नवंबर को कौन सा नक्षत्र है? पूर्व भाद्रपद

सूर्योदय पर चंद्रमा 332.4° पर था: पूर्व भाद्रपद, पद 4।

चंद्रमा सूर्य 0° पूर्व भाद्रपद चंद्रमा 332.4° अगला: उत्तर भाद्रपद पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° पूर्व भाद्रपद चंद्रमा 332.4° अगला: उत्तर भाद्रपद पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्व भाद्रपद 320°00′–333°20′ तक है; चंद्रमा 330° पर उसके पद 4 में आया। वह 09:04 को निकलेगा, उत्तर भाद्रपद में।

गुरु 1 नवंबर को कौन सा योग है? व्याघात

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 526.9° थे, एक चक्कर और 166.9°: व्याघात।

सूर्य 194.5° + चंद्रमा 332.4° = 526.9° एक चक्कर + 166.9° व्याघात 160°00′–173°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 194.5° + चंद्रमा 332.4° = 526.9° एक चक्कर + 166.9° व्याघात 160°00′–173°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 194.5° + 332.4° = 526.9°, एक पूरा चक्कर और 166.9°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 160°00′–173°20′ तेरहवाँ है, व्याघात। यह 17:21 को समाप्त होता है, फिर हर्षण।

गुरु 1 नवंबर को कौन सा करण है? बव

सूर्योदय पर बढ़त 137.8° थी: द्वादशी का पहला आधा, बव।

सूर्य अमावस्या 0° 137.8° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° बव 132°–138° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 137.8° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° बव 132°–138° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 07:47 तक है, जब बढ़त 138° होगी; बालव 18:20 तक।

गुरु 1 नवंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार

यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 07:29, पर शुरू हुआ: गुरुवार।

गुरुवार सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
गुरुवार सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:29 से 07:30 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।

गुरु 1 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक

यह मास 21 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य तुला में था: कार्तिक।

1 2 3 4 5 6 तुला वृश्चिक 9 10 11 12 0° पृथ्वी
1 2 3 4 5 6 तुला वृश्चिक 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: तुला से कार्तिक। सूर्य 16 नवंबर को, मास के भीतर, वृश्चिक में जाता है। अगली अमावस्या, 19 नवंबर, उसे वृश्चिक में पाती है और मार्गशीर्ष शुरू करती है।

गुरु 1 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष कार्तिक का है।

अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त कार्तिक कृष्ण शुक्ल गुरु 1 नवंबर पूर्णिमा 5 अक्टू॰ अमावस्या 21 अक्टू॰ पूर्णिमा 4 नव॰ अमावस्या 19 नव॰
अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त कार्तिक कृष्ण शुक्ल गुरु 1 नवंबर पूर्णिमा 5 अक्टू॰ अमावस्या 21 अक्टू॰ पूर्णिमा 4 नव॰ अमावस्या 19 नव॰
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 21 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में कार्तिक है।

गुरु 1 नवंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2036 · शक 1901

विक्रम संवत 2036 28 मार्च 1979 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 28 मार्च 1979 06:59 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 1 नवंबर सूर्य 194.5° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 28 मार्च 1979 06:59 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 1 नवंबर सूर्य 194.5° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 28 मार्च 1979, 06:59 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 211.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2036 गिनता है; शक संवत 1901।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

गुरु 1 नवंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 16:33

चंद्रमा यहाँ 16:33 पर उदय होता है।

गुरु 1 नवंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 04:57 शुक्र

सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 04:57 शुक्र चंद्रोदय 16:33
सूर्योदय 07:29 सूर्यास्त 17:57 सूर्योदय 07:30 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 04:57 शुक्र चंद्रोदय 16:33
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 16:33 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 04:57 शुक्र पर अस्त होगा।

चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 16:33 पर उदय हुआ; वह फिर 04:57 शुक्र पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।