Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शुक्र 20 मई 1977
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
20 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 20 मई
- 04:23–05:01ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:39 से
- 07:28–09:18लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:32–11:07अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:56–13:25अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:56–13:25शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 14:24–14:46शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
16:08–16:35अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · मृगशिरा में
- सूर्यास्त 20:14 के बाद
- 22:35–23:45लाभ चौघड़िया
- 00:56–02:06 शनिशुभ चौघड़िया
- 02:06–03:17 शनिअमृत चौघड़िया
- 04:23–05:00 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:39–07:28चरसामान्य
- 07:28–09:18लाभगुलिक काल में
- 09:18–11:07अमृतशुभ
- 11:07–12:56कालअशुभ
- 12:56–14:46शुभ
- 14:46–16:35रोगअशुभ
- 16:35–18:24उद्वेगअशुभ
- 18:24–20:14चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 20:14–21:24रोगअशुभ
- 21:24–22:35कालअशुभ
- 22:35–23:45लाभशुभ
- 23:45–00:56 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:56–02:06 शनिशुभ
- 02:06–03:17 शनिअमृतशुभ
- 03:17–04:28 शनिचरसामान्य
- 04:28–05:38 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 20 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:23–05:01, शुभ
- चर, सामान्य, 05:39–07:28
- लाभ, शुभ, 07:28–09:18
- अमृत, शुभ, 09:18–11:07
- काल, अशुभ, 11:07–12:56
- शुभ, 12:56–14:46
- रोग, अशुभ, 14:46–16:35
- उद्वेग, अशुभ, 16:35–18:24
- चर, सामान्य, 18:24–20:14
- रोग, अशुभ, 20:14–21:24
- काल, अशुभ, 21:24–22:35
- लाभ, शुभ, 22:35–23:45
- उद्वेग, अशुभ, 23:45–00:56 शनि
- शुभ, 00:56–02:06 शनि
- अमृत, शुभ, 02:06–03:17 शनि
- चर, सामान्य, 03:17–04:28 शनि
- रोग, अशुभ, 04:28–05:38 शनि
- गुलिक काल, 07:28–09:18, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 08:34–09:32, अशुभ
- राहु काल, 11:07–12:56, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:27–13:25, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:25–14:24, अशुभ
- यमगण्ड, 16:35–18:24, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:23–05:00 शनि
हर मान कैसे निकलता है
शुक्र 20 मई को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वितीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 21.2° आगे था: शुक्ल द्वितीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 12°–24° दूसरी है, शुक्ल द्वितीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:39। प्रतिपदा उससे पहले 09:23 गुरु पर समाप्त हुई। द्वितीया 11:50 को समाप्त होगी, जब बढ़त 24° होगी। बढ़त 18 मई की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
शुक्र 20 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:23–05:01
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:23–05:01।
गुरु 19 मई की रात सूर्यास्त 20:13 गुरु से सूर्योदय 05:39 तक थी, 9 घं 26 मि। इसे 37 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 20 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:27–13:25
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:27–13:25।
शुक्र 20 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 08:34–09:32
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:34–09:32 और 13:25–14:24।
शुक्र 20 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 13:25–14:24
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:34–09:32 और 13:25–14:24।
यहाँ दिन, 05:39 से 20:14, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 58 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 08:34–09:32 और 13:25–14:24।
शुक्र 20 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:39–07:28 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:39 से 20:14, 1 घं 49 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:14 से 05:38 शनि, 1 घं 10 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 20 मई को राहुकाल कब है? 11:07–12:56
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:07–12:56।
शुक्र 20 मई को यमगंड कब है? 16:35–18:24
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:35–18:24।
शुक्र 20 मई को गुलिक काल कब है? 07:28–09:18
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:28–09:18।
यहाँ दिन 05:39 से 20:14 तक है, 14 घं 35 मि। इसे 1 घं 49 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 20 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:39
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:39, सूर्यास्त 20:14, 14 घं 35 मि का दिन।
शुक्र 20 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:14
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:39, सूर्यास्त 20:14, 14 घं 35 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 35 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 24 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 35 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 24 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 20 मई को कौन सा नक्षत्र है? मृगशिरा
सूर्योदय पर चंद्रमा 56.6° पर था: मृगशिरा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मृगशिरा 53°20′–66°40′ तक है; चंद्रमा 53°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 02:00 शनि को निकलेगा, आर्द्रा में।
शुक्र 20 मई को कौन सा योग है? सुकर्मा
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 92° थे: सुकर्मा।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 35.4° + 56.6° = 92°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 80°00′–93°20′ सातवाँ है, सुकर्मा। यह 08:12 को समाप्त होता है, फिर धृति।
शुक्र 20 मई को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 21.2° थी: द्वितीया का दूसरा आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वितीया का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 22:37 गुरु पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 18° हुई; कौलव 11:50 तक है।
शुक्र 20 मई को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 05:39, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:39 से 05:38 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 20 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? ज्येष्ठ
यह मास 18 मई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य वृषभ में था: ज्येष्ठ।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: वृषभ से ज्येष्ठ। सूर्य 14 जून को, मास के भीतर, मिथुन में जाता है। अगली अमावस्या, 16 जून, उसे मिथुन में पाती है और आषाढ़ शुरू करती है।
शुक्र 20 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष ज्येष्ठ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 18 मई की अमावस्या ने, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में ज्येष्ठ है।
शुक्र 20 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2034 · शक 1899
विक्रम संवत 2034 19 मार्च 1977 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 1977, 22:32 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 59.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2034 गिनता है; शक संवत 1899।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 20 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 07:24
चंद्रमा यहाँ 07:24 पर उदय होता है।
शुक्र 20 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 22:06
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 07:24 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 22:06 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 07:24 पर उदय हुआ; वह फिर 22:06 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।