tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग सोम 4 नवंबर 1963

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में

1970 से पहले के समय UTC+4:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।

चतुर्थी

कृष्ण पक्ष · 03:52 मंगल तक

फिर पञ्चमी · 01:28 बुध तक

नई दिल्ली से अलग तिथि कारण जानें

व्रत

संकष्टी चतुर्थी

चंद्रोदय
20:28

संकष्टी चतुर्थी सोम 4 नवंबर को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है। सोम 4 नवंबर क्यों?

संकष्टी चतुर्थी: Sevan में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

05:43 07:32 17:54अगला सूर्योदय 07:33 मंगल

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 07:32–08:50अमृतशुभ
  • 08:50–10:07कालअशुभ
  • 10:07–11:25शुभ
  • 11:25–12:43रोगअशुभ
  • 12:43–14:01उद्वेगअशुभ
  • 14:01–15:18चरसामान्य
  • 15:18–16:36लाभशुभ
  • 16:36–17:54अमृतशुभ

रात का चौघड़िया

  • 17:54–19:36चरसामान्य
  • 19:36–21:19रोगअशुभ
  • 21:19–23:01कालअशुभ
  • 23:01–00:43 मंगललाभशुभ
  • 00:43–02:26 मंगलउद्वेगअशुभ
  • 02:26–04:08 मंगलशुभ
  • 04:08–05:51 मंगलअमृतशुभ
  • 05:51–07:33 मंगलचरसामान्य

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, सोम 4 नवंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:43–06:37, शुभ
  • अमृत, शुभ, 07:32–08:50
  • काल, अशुभ, 08:50–10:07
  • शुभ, 10:07–11:25
  • रोग, अशुभ, 11:25–12:43
  • उद्वेग, अशुभ, 12:43–14:01
  • चर, सामान्य, 14:01–15:18
  • लाभ, शुभ, 15:18–16:36
  • अमृत, शुभ, 16:36–17:54
  • चर, सामान्य, 17:54–19:36
  • रोग, अशुभ, 19:36–21:19
  • काल, अशुभ, 21:19–23:01
  • लाभ, शुभ, 23:01–00:43 मंगल
  • उद्वेग, अशुभ, 00:43–02:26 मंगल
  • शुभ, 02:26–04:08 मंगल
  • अमृत, शुभ, 04:08–05:51 मंगल
  • चर, सामान्य, 05:51–07:33 मंगल
  • राहु काल, 08:50–10:07, अशुभ
  • यमगण्ड, 11:25–12:43, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:22–13:04, शुभ
  • दुर्मुहूर्त, 13:04–13:45, अशुभ
  • गुलिक काल, 14:01–15:18, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 15:08–15:49, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:44–06:38 मंगल

हर मान कैसे निकलता है

Sevan में संकष्टी चतुर्थी सोम 4 नवंबर को क्यों है?

संकष्टी चतुर्थी सोम 4 नवंबर को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है।

तृतीया 18:00 19:00 20:00 21:00 22:00 रवि 3 नवंबर चंद्रोदय 19:38
तृतीया 18:00 19:00 20:00 21:00 22:00 रवि 3 नवंबर चंद्रोदय 19:38
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। रेखा: चंद्रोदय। गहरी पट्टी: रात।

संकष्टी का व्रत चंद्रोदय पर खोला जाता है। चतुर्थी सोम 4 नवंबर को 06:50 से मंगल 5 नवंबर को 03:52 तक है, इसलिए चंद्रोदय पर वह केवल सोम 4 नवंबर को है, 20:28 पर। संकष्टी चतुर्थी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; चंद्रोदय Tithika की परिपाटी है।

संकष्टी चतुर्थी: Sevan में हर तारीख़

सोम 4 नवंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्थी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 216.4° आगे था: कृष्ण चतुर्थी।

सूर्य अमावस्या 0° 216.4° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्थी 216°–228° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 216.4° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्थी 216°–228° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 216°–228° उन्नीसवीं है, कृष्ण चतुर्थी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:32। तृतीया उससे पहले 06:50 पर समाप्त हुई। चतुर्थी 03:52 मंगल को समाप्त होगी, जब बढ़त 228° होगी। बढ़त 1 नवंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

नई दिल्ली में तृतीया क्यों है?

नई दिल्ली में तृतीया है, Sevan में चतुर्थी।

तृतीया चतुर्थी चतुर्थी पञ्चमी सोम 4 नवंबर सुबह मंगल 5 नवंबर सुबह नई दिल्ली IST Sevan UTC+4 08:20 06:50 05:22 03:52 06:34 तृतीया 06:35 पञ्चमी 07:32 चतुर्थी 07:33 पञ्चमी
तृतीया चतुर्थी चतुर्थी पञ्चमी सोम 4 नवंबर सुबह मंगल 5 नवंबर सुबह नई दिल्ली IST Sevan UTC+4 08:20 06:50 05:22 03:52 06:34 तृतीया 06:35 पञ्चमी 07:32 चतुर्थी 07:33 पञ्चमी
समय नीचे की ओर, दोनों स्तंभों में एक ही क्षण · हर स्थान अपनी घड़ी में · धारीदार रेखा: तिथि बदली

दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।

नई दिल्ली · IST

यहाँ सूर्योदय, 06:34, तृतीया की समाप्ति 08:20 से पहले हुआ: यह दिन तृतीया है। चतुर्थी अगले सूर्योदय से पहले, 05:22 मंगल को, समाप्त होती है, इसलिए यहाँ कोई दिन चतुर्थी नहीं होता: वह क्षय है।

Sevan · UTC+4

यहाँ सूर्योदय, 07:32, तृतीया की समाप्ति 06:50 के बाद हुआ: यह दिन चतुर्थी है।

सोम 4 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:43–06:37

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:43–06:37।

सूर्यास्त 17:55 रवि सूर्योदय 07:32 सोम समय, ऊँचाई नहीं रवि 3 नवंबर का दिन 14 1
सूर्यास्त 17:55 रवि सूर्योदय 07:32 सोम समय, ऊँचाई नहीं रवि 3 नवंबर का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · रविवार का दिन धुँधला

रवि 3 नवंबर की रात सूर्यास्त 17:55 रवि से सूर्योदय 07:32 तक थी, 13 घं 37 मि। इसे 54 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

सोम 4 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:22–13:04

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:22–13:04।

सोम 4 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 13:04–13:45

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 13:04–13:45 और 15:08–15:49।

सोम 4 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:08–15:49

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 13:04–13:45 और 15:08–15:49।

सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं 8 9 12 1
सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं 8 9 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 9, 12

यहाँ दिन, 07:32 से 17:54, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 41 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 13:04–13:45 और 15:08–15:49।

सोम 4 नवंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

07:32–08:50 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।

सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं अमृत
सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं अमृत
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 07:32 से 17:54, 1 घं 17 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 17:54 से 07:33 मंगल, 1 घं 42 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

सोम 4 नवंबर को राहुकाल कब है? 08:50–10:07

राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:50–10:07।

सोम 4 नवंबर को यमगंड कब है? 11:25–12:43

यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:25–12:43।

सोम 4 नवंबर को गुलिक काल कब है? 14:01–15:18

गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:01–15:18।

सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 4, गुलिक काल 6

यहाँ दिन 07:32 से 17:54 तक है, 10 घं 22 मि। इसे 1 घं 17 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

सोम 4 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:32

यहाँ दिन: सूर्योदय 07:32, सूर्यास्त 17:54, 10 घं 22 मि का दिन।

सोम 4 नवंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:54

यहाँ दिन: सूर्योदय 07:32, सूर्यास्त 17:54, 10 घं 22 मि का दिन।

सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 10:38 चंद्रोदय 20:28
सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 10:38 चंद्रोदय 20:28
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 22 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 22 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सोम 4 नवंबर को कौन सा नक्षत्र है? मृगशिरा

सूर्योदय पर चंद्रमा 54° पर था: मृगशिरा, पद 1।

चंद्रमा सूर्य 0° मृगशिरा चंद्रमा 54.0° अगला: आर्द्रा पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° मृगशिरा चंद्रमा 54.0° अगला: आर्द्रा पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मृगशिरा 53°20′–66°40′ तक है; चंद्रमा 53°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 04:09 मंगल को निकलेगा, आर्द्रा में।

सोम 4 नवंबर को कौन सा योग है? परिघ

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 251.6° थे: परिघ।

सूर्य 197.6° + चंद्रमा 54.0° = 251.6° परिघ 240°00′–253°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 197.6° + चंद्रमा 54.0° = 251.6° परिघ 240°00′–253°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 197.6° + 54° = 251.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 240°00′–253°20′ उन्नीसवाँ है, परिघ। यह 10:02 को समाप्त होता है, फिर शिव।

सोम 4 नवंबर को कौन सा करण है? बव

सूर्योदय पर बढ़त 216.4° थी: चतुर्थी का पहला आधा, बव।

सूर्य अमावस्या 0° 216.4° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्थी 216°–228° बव 216°–222° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 216.4° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्थी 216°–228° बव 216°–222° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्थी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 17:17 तक है, जब बढ़त 222° होगी; बालव 03:52 मंगल तक।

सोम 4 नवंबर को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार

यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 07:32, पर शुरू हुआ: सोमवार।

सोमवार सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं 00:00 मंगल अब भी सोमवार
सोमवार सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं 00:00 मंगल अब भी सोमवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:32 से 07:33 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।

सोम 4 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक (अधिक)

17 अक्टूबर और 16 नवंबर की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक कार्तिक।

1 2 3 4 5 6 तुला वृश्चिक 9 10 11 12 0° पृथ्वी
1 2 3 4 5 6 तुला वृश्चिक 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ · धारीदार: अगली संक्रांति, मास के बाद

सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 17 अक्टूबर 16:42 गुरु से 16 नवंबर 10:50 शनि तक सूर्य तुला में रहा; वृश्चिक में वह अमावस्या के बाद 16 नवंबर 14:39 शनि को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक कार्तिक है, जो कार्तिक से पहले आता है।

सोम 4 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक (अधिक)

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक (अधिक) का है।

अमान्त कार्तिक (अधिक) पूर्णिमान्त कार्तिक (अधिक) कृष्ण शुक्ल सोम 4 नवंबर अमावस्या 17 अक्टू॰ पूर्णिमा 1 नव॰ अमावस्या 16 नव॰ पूर्णिमा 1 दिस॰
अमान्त कार्तिक (अधिक) पूर्णिमान्त कार्तिक (अधिक) कृष्ण शुक्ल सोम 4 नवंबर अमावस्या 17 अक्टू॰ पूर्णिमा 1 नव॰ अमावस्या 16 नव॰ पूर्णिमा 1 दिस॰
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 16 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक (अधिक) है, और अमान्त गणना में कार्तिक (अधिक)।

सोम 4 नवंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2020 · शक 1885

विक्रम संवत 2020 25 मार्च 1963 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 25 मार्च 1963 16:09 · सूर्य मीन में सूर्योदय, सोम 4 नवंबर सूर्य 197.6° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 25 मार्च 1963 16:09 · सूर्य मीन में सूर्योदय, सोम 4 नवंबर सूर्य 197.6° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 25 मार्च 1963, 16:09 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 216.8° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2020 गिनता है; शक संवत 1885।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

सोम 4 नवंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 20:28

चंद्रमा यहाँ 20:28 पर उदय होता है।

सोम 4 नवंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 10:38

सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 10:38 चंद्रोदय 20:28
सूर्योदय 07:32 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 07:33 मंगल समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 10:38 चंद्रोदय 20:28
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 10:38 पर अस्त हुआ; वह फिर 20:28 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 10:38 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 20:28 पर उदय होगा।