Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 23 मई 1963
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
1970 से पहले के समय UTC+4:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
त्योहार
वट सावित्री व्रत
वट सावित्री व्रत गुरु 23 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। गुरु 23 मई क्यों?
वट सावित्री व्रत: Sevan में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या गुरु 23 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। गुरु 23 मई क्यों?
अमावस्या: Sevan में हर तारीख़23 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 मई
- 04:22–05:00ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:37 से
- 05:37–07:27शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:27–13:26अभिजीत मुहूर्त
- 12:56–14:46लाभ चौघड़िया
- 14:46–16:36अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 18:26–20:16शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 20:16 के बाद
- 20:16–21:26अमृत चौघड़िया
- 00:56–02:06 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:16–04:26 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:26–05:36 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:22–04:59 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:37–07:27शुभयमगण्ड में
- 07:27–09:17रोगअशुभ
- 09:17–11:07उद्वेगअशुभ
- 11:07–12:56चरसामान्य
- 12:56–14:46लाभशुभ
- 14:46–16:36अमृतराहु काल में
- 16:36–18:26कालअशुभ
- 18:26–20:16शुभ
रात का चौघड़िया
- 20:16–21:26अमृतशुभ
- 21:26–22:36चरसामान्य
- 22:36–23:46रोगअशुभ
- 23:46–00:56 शुक्रकालअशुभ
- 00:56–02:06 शुक्रलाभशुभ
- 02:06–03:16 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:16–04:26 शुक्रशुभ
- 04:26–05:36 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:22–05:00, शुभ
- शुभ, 05:37–07:27
- रोग, अशुभ, 07:27–09:17
- उद्वेग, अशुभ, 09:17–11:07
- चर, सामान्य, 11:07–12:56
- लाभ, शुभ, 12:56–14:46
- अमृत, शुभ, 14:46–16:36
- काल, अशुभ, 16:36–18:26
- शुभ, 18:26–20:16
- अमृत, शुभ, 20:16–21:26
- चर, सामान्य, 21:26–22:36
- रोग, अशुभ, 22:36–23:46
- काल, अशुभ, 23:46–00:56 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:56–02:06 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:06–03:16 शुक्र
- शुभ, 03:16–04:26 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:26–05:36 शुक्र
- यमगण्ड, 05:37–07:27, अशुभ
- गुलिक काल, 09:17–11:07, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:30–11:28, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:27–13:26, शुभ
- राहु काल, 14:46–16:36, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:21–17:20, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:22–04:59 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में वट सावित्री व्रत गुरु 23 मई को क्यों है?
वट सावित्री व्रत गुरु 23 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
वट सावित्री व्रत सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या बुध 22 मई को 11:40 से गुरु 23 मई को 07:59 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 23 मई के सूर्योदय (05:37) पर है। वट सावित्री व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
Sevan में अमावस्या गुरु 23 मई को क्यों है?
अमावस्या गुरु 23 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या बुध 22 मई को 11:40 से गुरु 23 मई को 07:59 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 23 मई के सूर्योदय (05:37) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 23 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 358.6° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:37। चतुर्दशी उससे पहले 11:40 बुध पर समाप्त हुई। अमावस्या 07:59 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 8 मई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
प्रतिपदा क्षय क्यों है?
प्रतिपदा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन प्रतिपदा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 07:59 को शुरू हुई और 04:32 शुक्र को समाप्त, 05:37 और 05:36 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को अमावस्या है और शुक्रवार को द्वितीया: प्रतिपदा यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 23 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:22–05:00
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:22–05:00।
बुध 22 मई की रात सूर्यास्त 20:15 बुध से सूर्योदय 05:37 तक थी, 9 घं 22 मि। इसे 37 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 23 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:27–13:26
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:27–13:26।
गुरु 23 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 10:30–11:28
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:30–11:28 और 16:21–17:20।
गुरु 23 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 16:21–17:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:30–11:28 और 16:21–17:20।
यहाँ दिन, 05:37 से 20:16, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 58 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:30–11:28 और 16:21–17:20।
गुरु 23 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:37–07:27 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:37 से 20:16, 1 घं 49 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:16 से 05:36 शुक्र, 1 घं 10 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 23 मई को राहुकाल कब है? 14:46–16:36
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:46–16:36।
गुरु 23 मई को यमगंड कब है? 05:37–07:27
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:37–07:27।
गुरु 23 मई को गुलिक काल कब है? 09:17–11:07
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:17–11:07।
यहाँ दिन 05:37 से 20:16 तक है, 14 घं 39 मि। इसे 1 घं 49 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 23 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:37
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:37, सूर्यास्त 20:16, 14 घं 39 मि का दिन।
गुरु 23 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:16
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:37, सूर्यास्त 20:16, 14 घं 39 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 39 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 20 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 39 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 20 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 23 मई को कौन सा नक्षत्र है? कृत्तिका
सूर्योदय पर चंद्रमा 36.5° पर था: कृत्तिका, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। कृत्तिका 26°40′–40°00′ तक है; चंद्रमा 33°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 11:12 को निकलेगा, रोहिणी में।
गुरु 23 मई को कौन सा योग है? अतिगण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 74.4° थे: अतिगण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 37.9° + 36.5° = 74.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 66°40′–80°00′ छठा है, अतिगण्ड। यह 14:02 को समाप्त होता है, फिर सुकर्मा।
गुरु 23 मई को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 358.6° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 21:49 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 07:59 तक है।
गुरु 23 मई को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:37, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:37 से 05:36 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 23 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 24 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 15 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 23 मई, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
गुरु 23 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 23 मई की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ है, और अमान्त गणना में वैशाख।
गुरु 23 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2020 · शक 1885
विक्रम संवत 2020 25 मार्च 1963 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 25 मार्च 1963, 16:09 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 57.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2020 गिनता है; शक संवत 1885।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 23 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:58
चंद्रमा यहाँ 05:58 पर उदय होता है।
गुरु 23 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 20:35
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 05:58 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 20:35 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 05:58 पर उदय हुआ; वह फिर 20:35 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।