Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग सोम 1 अक्टूबर 1934
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
1970 से पहले के समय UTC+3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
कृष्ण पक्ष · 07:09 मंगल तक
नई दिल्ली से अलग तिथि कारण जानें नवमी यहाँ दो सूर्योदयों तक है कारण जानें1 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 1 अक्टूबर
- 04:18–05:06ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:55 से
- 05:55–07:23अमृत चौघड़िया
- 08:52–10:21शुभ चौघड़िया
- 11:49–12:13अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 15:22–16:15लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 16:15–17:43अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:43 के बाद
- 22:18–23:50लाभ चौघड़िया
- 01:21–02:53 मंगलशुभ चौघड़िया
- 02:53–04:24 मंगलअमृत चौघड़िया
-
04:28–06:16 मंगलअमृत कालपुनर्वसु में
- 04:18–05:07 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:55–07:23अमृतशुभ
- 07:23–08:52कालअशुभ
- 08:52–10:21शुभ
- 10:21–11:49रोगअशुभ
- 11:49–13:18उद्वेगअशुभ
- 13:18–14:46चरसामान्य
- 14:46–16:15लाभशुभ
- 16:15–17:43अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:43–19:15चरसामान्य
- 19:15–20:46रोगअशुभ
- 20:46–22:18कालअशुभ
- 22:18–23:50लाभशुभ
- 23:50–01:21 मंगलउद्वेगअशुभ
- 01:21–02:53 मंगलशुभ
- 02:53–04:24 मंगलअमृतशुभ
- 04:24–05:56 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 1 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:18–05:06, शुभ
- अमृत, शुभ, 05:55–07:23
- काल, अशुभ, 07:23–08:52
- शुभ, 08:52–10:21
- रोग, अशुभ, 10:21–11:49
- उद्वेग, अशुभ, 11:49–13:18
- चर, सामान्य, 13:18–14:46
- लाभ, शुभ, 14:46–16:15
- अमृत, शुभ, 16:15–17:43
- चर, सामान्य, 17:43–19:15
- रोग, अशुभ, 19:15–20:46
- काल, अशुभ, 20:46–22:18
- लाभ, शुभ, 22:18–23:50
- उद्वेग, अशुभ, 23:50–01:21 मंगल
- शुभ, 01:21–02:53 मंगल
- अमृत, शुभ, 02:53–04:24 मंगल
- चर, सामान्य, 04:24–05:56 मंगल
- राहु काल, 07:23–08:52, अशुभ
- यमगण्ड, 10:21–11:49, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:25–12:13, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:13–13:00, अशुभ
- गुलिक काल, 13:18–14:46, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:34–15:22, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:18–05:07 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
सोम 1 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण नवमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 276.6° आगे था: कृष्ण नवमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 276°–288° चौबीसवीं है, कृष्ण नवमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:55। अष्टमी उससे पहले 04:37 पर समाप्त हुई। नवमी 07:09 मंगल को समाप्त होगी, जब बढ़त 288° होगी। बढ़त 23 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
नवमी दो सूर्योदयों पर क्यों है?
नवमी यहाँ सोम 1 और मंगल 2 अक्टूबर दोनों के सूर्योदय पर है।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। नवमी 04:37 को, सूर्योदय 05:55 से पहले, शुरू हुई और 07:09 मंगल को, अगले सूर्योदय 05:56 मंगल के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन नवमी है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।
नई दिल्ली में अष्टमी क्यों है?
नई दिल्ली में अष्टमी है, Sevan में नवमी।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:13, अष्टमी की समाप्ति 07:07 से पहले हुआ: यह दिन अष्टमी है।
Sevan · UTC+3
यहाँ सूर्योदय, 05:55, अष्टमी की समाप्ति 04:37 के बाद हुआ: यह दिन नवमी है।
सोम 1 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:18–05:06
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:18–05:06।
रवि 30 सितंबर की रात सूर्यास्त 17:45 रवि से सूर्योदय 05:55 तक थी, 12 घं 10 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 1 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:25–12:13
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:25–12:13।
सोम 1 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 12:13–13:00
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 12:13–13:00 और 14:34–15:22।
सोम 1 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:34–15:22
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 12:13–13:00 और 14:34–15:22।
यहाँ दिन, 05:55 से 17:43, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 12:13–13:00 और 14:34–15:22।
सोम 1 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:55–07:23 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:55 से 17:43, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:43 से 05:56 मंगल, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 1 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 07:23–08:52
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:23–08:52।
सोम 1 अक्टूबर को यमगंड कब है? 10:21–11:49
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:21–11:49।
सोम 1 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 13:18–14:46
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:18–14:46।
यहाँ दिन 05:55 से 17:43 तक है, 11 घं 48 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 1 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:55
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:55, सूर्यास्त 17:43, 11 घं 48 मि का दिन।
सोम 1 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:43
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:55, सूर्यास्त 17:43, 11 घं 48 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 48 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 13 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 48 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 13 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 1 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पुनर्वसु
सूर्योदय पर चंद्रमा 80.9° पर था: पुनर्वसु, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पुनर्वसु 80°00′–93°20′ तक है; चंद्रमा 80° पर उसके पद 1 में आया। वह 07:10 मंगल को निकलेगा, पुष्य में।
सोम 1 अक्टूबर को कौन सा योग है? परिघ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 245.2° थे: परिघ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 164.3° + 80.9° = 245.2°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 240°00′–253°20′ उन्नीसवाँ है, परिघ। यह 21:10 को समाप्त होता है, फिर शिव।
सोम 1 अक्टूबर को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 276.6° थी: नवमी का पहला आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए नवमी का पहला आधा तैतिल है और दूसरा गर। तैतिल 17:51 तक है, जब बढ़त 282° होगी; गर 07:09 मंगल तक।
सोम 1 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 05:55, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:55 से 05:56 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 1 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 9 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 16 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 8 अक्टूबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
सोम 1 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 8 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
सोम 1 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 1991 · शक 1856
विक्रम संवत 1991 15 मार्च 1934 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 1934, 15:08 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 193° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1991 गिनता है; शक संवत 1856।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 1 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 23:34
चंद्रमा यहाँ 23:34 पर उदय होता है।
सोम 1 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 14:09
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:09 पर अस्त हुआ; वह फिर 23:34 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:09 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 23:34 पर उदय होगा।