Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 19 अप्रैल 1934
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
1970 से पहले के समय UTC+3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
19 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 19 अप्रैल
- 03:52–04:34ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:16 से
- 05:16–06:57शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:32–12:26अभिजीत मुहूर्त
- 11:59–13:40लाभ चौघड़िया
- 13:40–15:20अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 17:01–18:42शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:42 के बाद
- 18:42–20:01अमृत चौघड़िया
- 23:58–01:18 शुक्रलाभ चौघड़िया
-
00:19–02:07 शुक्रअमृत कालआर्द्रा में
- 02:37–03:56 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 03:56–05:15 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 03:51–04:33 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:16–06:57शुभयमगण्ड में
- 06:57–08:38रोगअशुभ
- 08:38–10:18उद्वेगअशुभ
- 10:18–11:59चरसामान्य
- 11:59–13:40लाभशुभ
- 13:40–15:20अमृतराहु काल में
- 15:20–17:01कालअशुभ
- 17:01–18:42शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:42–20:01अमृतशुभ
- 20:01–21:20चरसामान्य
- 21:20–22:39रोगअशुभ
- 22:39–23:58कालअशुभ
- 23:58–01:18 शुक्रलाभशुभ
- 01:18–02:37 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:37–03:56 शुक्रशुभ
- 03:56–05:15 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 19 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 03:52–04:34, शुभ
- शुभ, 05:16–06:57
- रोग, अशुभ, 06:57–08:38
- उद्वेग, अशुभ, 08:38–10:18
- चर, सामान्य, 10:18–11:59
- लाभ, शुभ, 11:59–13:40
- अमृत, शुभ, 13:40–15:20
- काल, अशुभ, 15:20–17:01
- शुभ, 17:01–18:42
- अमृत, शुभ, 18:42–20:01
- चर, सामान्य, 20:01–21:20
- रोग, अशुभ, 21:20–22:39
- काल, अशुभ, 22:39–23:58
- लाभ, शुभ, 23:58–01:18 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:18–02:37 शुक्र
- शुभ, 02:37–03:56 शुक्र
- अमृत, शुभ, 03:56–05:15 शुक्र
- यमगण्ड, 05:16–06:57, अशुभ
- गुलिक काल, 08:38–10:18, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:45–10:39, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:32–12:26, शुभ
- राहु काल, 13:40–15:20, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:07–16:01, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 03:51–04:33 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 19 अप्रैल को कौन सी तिथि है? शुक्ल पञ्चमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 59.6° आगे था: शुक्ल पञ्चमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 48°–60° पाँचवीं है, शुक्ल पञ्चमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:16। चतुर्थी उससे पहले 04:21 बुध पर समाप्त हुई। पञ्चमी 06:12 को समाप्त होगी, जब बढ़त 60° होगी। बढ़त 14 अप्रैल की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
पञ्चमी दो सूर्योदयों पर क्यों है?
पञ्चमी यहाँ बुध 18 और गुरु 19 अप्रैल दोनों के सूर्योदय पर है।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। पञ्चमी 04:21 बुध को, सूर्योदय 05:18 बुध से पहले, शुरू हुई और 06:12 को, अगले सूर्योदय 05:16 के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन पञ्चमी है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।
गुरु 19 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 03:52–04:34
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 03:52–04:34।
बुध 18 अप्रैल की रात सूर्यास्त 18:41 बुध से सूर्योदय 05:16 तक थी, 10 घं 35 मि। इसे 42 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 19 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:32–12:26
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:32–12:26।
गुरु 19 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 09:45–10:39
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:45–10:39 और 15:07–16:01।
गुरु 19 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 15:07–16:01
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:45–10:39 और 15:07–16:01।
यहाँ दिन, 05:16 से 18:42, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 53 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 09:45–10:39 और 15:07–16:01।
गुरु 19 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:16–06:57 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:16 से 18:42, 1 घं 40 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:42 से 05:15 शुक्र, 1 घं 19 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 19 अप्रैल को राहुकाल कब है? 13:40–15:20
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:40–15:20।
गुरु 19 अप्रैल को यमगंड कब है? 05:16–06:57
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:16–06:57।
गुरु 19 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 08:38–10:18
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:38–10:18।
यहाँ दिन 05:16 से 18:42 तक है, 13 घं 26 मि। इसे 1 घं 40 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 19 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 05:16
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:16, सूर्यास्त 18:42, 13 घं 26 मि का दिन।
गुरु 19 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:42
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:16, सूर्यास्त 18:42, 13 घं 26 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 26 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 33 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 26 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 33 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 19 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? मृगशिरा
सूर्योदय पर चंद्रमा 65° पर था: मृगशिरा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मृगशिरा 53°20′–66°40′ तक है; चंद्रमा 63°20′ पर उसके पद 4 में आया। वह 08:39 को निकलेगा, आर्द्रा में।
गुरु 19 अप्रैल को कौन सा योग है? अतिगण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 70.4° थे: अतिगण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 5.4° + 65° = 70.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 66°40′–80°00′ छठा है, अतिगण्ड। यह 23:08 को समाप्त होता है, फिर सुकर्मा।
गुरु 19 अप्रैल को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 59.6° थी: पञ्चमी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पञ्चमी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 17:12 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 54° हुई; बालव 06:12 तक है।
गुरु 19 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:16, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:16 से 05:15 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 19 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख (अधिक)
14 अप्रैल और 13 मई की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक वैशाख।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 14 अप्रैल 02:56 शनि से 13 मई 15:30 रवि तक सूर्य मेष में रहा; वृषभ में वह अमावस्या के बाद 14 मई 13:45 सोम को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक वैशाख है, जो वैशाख से पहले आता है।
गुरु 19 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 अप्रैल की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख (अधिक) शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख (अधिक) है।
गुरु 19 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 1991 · शक 1856
विक्रम संवत 1991 15 मार्च 1934 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 1934, 15:08 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 34.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1991 गिनता है; शक संवत 1856।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 19 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 08:28
चंद्रमा यहाँ 08:28 पर उदय होता है।
गुरु 19 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 00:23 शुक्र
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:28 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 00:23 शुक्र पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:28 पर उदय हुआ; वह फिर 00:23 शुक्र पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।