Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शुक्र 15 मई 1925
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
1970 से पहले के समय UTC+3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
15 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 15 मई
- 03:27–04:05ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 04:44 से
- 06:32–08:20लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 08:34–10:08अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
08:34–10:02अमृत कालदुर्मुहूर्त छोड़कर · धनिष्ठा में
- 11:56–12:25अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 11:56–12:25शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:22–13:44शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 19:08 के बाद
- 21:32–22:44लाभ चौघड़िया
- 23:56–01:07 शनिशुभ चौघड़िया
- 01:07–02:19 शनिअमृत चौघड़िया
- 03:26–04:04 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 04:44–06:32चरसामान्य
- 06:32–08:20लाभगुलिक काल में
- 08:20–10:08अमृतशुभ
- 10:08–11:56कालअशुभ
- 11:56–13:44शुभ
- 13:44–15:32रोगअशुभ
- 15:32–17:20उद्वेगअशुभ
- 17:20–19:08चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 19:08–20:20रोगअशुभ
- 20:20–21:32कालअशुभ
- 21:32–22:44लाभशुभ
- 22:44–23:56उद्वेगअशुभ
- 23:56–01:07 शनिशुभ
- 01:07–02:19 शनिअमृतशुभ
- 02:19–03:31 शनिचरसामान्य
- 03:31–04:43 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 15 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 03:27–04:05, शुभ
- चर, सामान्य, 04:44–06:32
- लाभ, शुभ, 06:32–08:20
- अमृत, शुभ, 08:20–10:08
- काल, अशुभ, 10:08–11:56
- शुभ, 11:56–13:44
- रोग, अशुभ, 13:44–15:32
- उद्वेग, अशुभ, 15:32–17:20
- चर, सामान्य, 17:20–19:08
- रोग, अशुभ, 19:08–20:20
- काल, अशुभ, 20:20–21:32
- लाभ, शुभ, 21:32–22:44
- उद्वेग, अशुभ, 22:44–23:56
- शुभ, 23:56–01:07 शनि
- अमृत, शुभ, 01:07–02:19 शनि
- चर, सामान्य, 02:19–03:31 शनि
- रोग, अशुभ, 03:31–04:43 शनि
- गुलिक काल, 06:32–08:20, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:37–08:34, अशुभ
- राहु काल, 10:08–11:56, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:27–12:25, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:25–13:22, अशुभ
- यमगण्ड, 15:32–17:20, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 03:26–04:04 शनि
हर मान कैसे निकलता है
शुक्र 15 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण अष्टमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 267.8° आगे था: कृष्ण अष्टमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 264°–276° तेईसवीं है, कृष्ण अष्टमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 04:44। सप्तमी उससे पहले 21:40 गुरु पर समाप्त हुई। अष्टमी 19:56 को समाप्त होगी, जब बढ़त 276° होगी। बढ़त 8 मई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शुक्र 15 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 03:27–04:05
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 03:27–04:05।
गुरु 14 मई की रात सूर्यास्त 19:07 गुरु से सूर्योदय 04:44 तक थी, 9 घं 37 मि। इसे 38 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 15 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:27–12:25
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:27–12:25।
शुक्र 15 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 07:37–08:34
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 07:37–08:34 और 12:25–13:22।
शुक्र 15 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 12:25–13:22
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 07:37–08:34 और 12:25–13:22।
यहाँ दिन, 04:44 से 19:08, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 57 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 07:37–08:34 और 12:25–13:22।
शुक्र 15 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
04:44–06:32 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 04:44 से 19:08, 1 घं 48 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:08 से 04:43 शनि, 1 घं 11 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 15 मई को राहुकाल कब है? 10:08–11:56
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:08–11:56।
शुक्र 15 मई को यमगंड कब है? 15:32–17:20
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:32–17:20।
शुक्र 15 मई को गुलिक काल कब है? 06:32–08:20
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 06:32–08:20।
यहाँ दिन 04:44 से 19:08 तक है, 14 घं 24 मि। इसे 1 घं 48 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 15 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 04:44
यहाँ दिन: सूर्योदय 04:44, सूर्यास्त 19:08, 14 घं 24 मि का दिन।
शुक्र 15 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:08
यहाँ दिन: सूर्योदय 04:44, सूर्यास्त 19:08, 14 घं 24 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 24 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 35 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 24 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 35 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 15 मई को कौन सा नक्षत्र है? धनिष्ठा
सूर्योदय पर चंद्रमा 298.7° पर था: धनिष्ठा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। धनिष्ठा 293°20′–306°40′ तक है; चंद्रमा 296°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 18:28 को निकलेगा, शतभिषा में।
शुक्र 15 मई को कौन सा योग है? ब्रह्म
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 329.6° थे: ब्रह्म।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 30.9° + 298.7° = 329.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 320°00′–333°20′ पच्चीसवाँ है, ब्रह्म। यह 10:43 को समाप्त होता है, फिर इन्द्र।
शुक्र 15 मई को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 267.8° थी: अष्टमी का पहला आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अष्टमी का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 08:45 तक है, जब बढ़त 270° होगी; कौलव 19:56 तक।
शुक्र 15 मई को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 04:44, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 04:44 से 04:43 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 15 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 23 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 14 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 22 मई, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
शुक्र 15 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 22 मई की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ है, और अमान्त गणना में वैशाख।
शुक्र 15 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 1982 · शक 1847
विक्रम संवत 1982 24 मार्च 1925 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 1925, 17:02 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 50.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1982 गिनता है; शक संवत 1847।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 15 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 01:36 शनि
चंद्रमा यहाँ 01:36 शनि पर उदय होता है।
शुक्र 15 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 11:31
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 11:31 पर अस्त हुआ; वह फिर 01:36 शनि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 11:31 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 01:36 शनि पर उदय होगा।