Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शनि 14 फ़रवरी 1925
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
1970 से पहले के समय UTC+3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
14 फ़रवरी का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 14 फ़रवरी
- 05:08–06:02ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:56 से
- 08:20–09:35शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:53–12:35अभिजीत मुहूर्त
- 13:34–14:53लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 14:53–16:13अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:33 के बाद
- 17:33–19:13लाभ चौघड़िया
- 20:53–22:33शुभ चौघड़िया
- 22:33–00:14 रविअमृत चौघड़िया
-
02:56–04:31 रविअमृत कालस्वाती में
- 05:14–06:54 रविलाभ चौघड़िया
- 05:07–06:01 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:56–08:15कालअशुभ
- 08:15–09:35शुभ
- 09:35–10:54रोगअशुभ
- 10:54–12:14उद्वेगअशुभ
- 12:14–13:34चरसामान्य
- 13:34–14:53लाभयमगण्ड में
- 14:53–16:13अमृतशुभ
- 16:13–17:33कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:33–19:13लाभशुभ
- 19:13–20:53उद्वेगअशुभ
- 20:53–22:33शुभ
- 22:33–00:14 रविअमृतशुभ
- 00:14–01:54 रविचरसामान्य
- 01:54–03:34 रविरोगअशुभ
- 03:34–05:14 रविकालअशुभ
- 05:14–06:54 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 14 फ़रवरी: ब्रह्म मुहूर्त, 05:08–06:02, शुभ
- काल, अशुभ, 06:56–08:15
- शुभ, 08:15–09:35
- रोग, अशुभ, 09:35–10:54
- उद्वेग, अशुभ, 10:54–12:14
- चर, सामान्य, 12:14–13:34
- लाभ, शुभ, 13:34–14:53
- अमृत, शुभ, 14:53–16:13
- काल, अशुभ, 16:13–17:33
- लाभ, शुभ, 17:33–19:13
- उद्वेग, अशुभ, 19:13–20:53
- शुभ, 20:53–22:33
- अमृत, शुभ, 22:33–00:14 रवि
- चर, सामान्य, 00:14–01:54 रवि
- रोग, अशुभ, 01:54–03:34 रवि
- काल, अशुभ, 03:34–05:14 रवि
- लाभ, शुभ, 05:14–06:54 रवि
- गुलिक काल, 06:56–08:15, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:56–07:38, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:38–08:20, अशुभ
- राहु काल, 09:35–10:54, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:53–12:35, शुभ
- यमगण्ड, 13:34–14:53, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:07–06:01 रवि
हर मान कैसे निकलता है
शनि 14 फ़रवरी को कौन सी तिथि है? कृष्ण षष्ठी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 241.7° आगे था: कृष्ण षष्ठी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 240°–252° इक्कीसवीं है, कृष्ण षष्ठी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:56। पञ्चमी उससे पहले 03:36 पर समाप्त हुई। षष्ठी 02:46 रवि को समाप्त होगी, जब बढ़त 252° होगी। बढ़त 9 फ़रवरी की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शनि 14 फ़रवरी को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:08–06:02
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:08–06:02।
शुक्र 13 फ़रवरी की रात सूर्यास्त 17:32 शुक्र से सूर्योदय 06:56 तक थी, 13 घं 24 मि। इसे 53 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 14 फ़रवरी को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:53–12:35
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:53–12:35।
शनि 14 फ़रवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 06:56–07:38
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:56–07:38 और 07:38–08:20।
शनि 14 फ़रवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 07:38–08:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:56–07:38 और 07:38–08:20।
यहाँ दिन, 06:56 से 17:33, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 42 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:56–07:38 और 07:38–08:20।
शनि 14 फ़रवरी का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:56–08:15 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:56 से 17:33, 1 घं 19 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:33 से 06:54 रवि, 1 घं 40 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 14 फ़रवरी को राहुकाल कब है? 09:35–10:54
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:35–10:54।
शनि 14 फ़रवरी को यमगंड कब है? 13:34–14:53
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:34–14:53।
शनि 14 फ़रवरी को गुलिक काल कब है? 06:56–08:15
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:56–08:15।
यहाँ दिन 06:56 से 17:33 तक है, 10 घं 37 मि। इसे 1 घं 19 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 14 फ़रवरी को सूर्योदय कितने बजे है? 06:56
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:56, सूर्यास्त 17:33, 10 घं 37 मि का दिन।
शनि 14 फ़रवरी को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:33
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:56, सूर्यास्त 17:33, 10 घं 37 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 37 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 21 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 37 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 21 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 14 फ़रवरी को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 183.9° पर था: चित्रा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 183°20′ पर उसके पद 4 में आया। वह 11:58 को निकलेगा, स्वाती में।
शनि 14 फ़रवरी को कौन सा योग है? गण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 486.1° थे, एक चक्कर और 126.1°: गण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 302.2° + 183.9° = 486.1°, एक पूरा चक्कर और 126.1°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 120°00′–133°20′ दसवाँ है, गण्ड। यह 19:06 को समाप्त होता है, फिर वृद्धि।
शनि 14 फ़रवरी को कौन सा करण है? गर
सूर्योदय पर बढ़त 241.7° थी: षष्ठी का पहला आधा, गर।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए षष्ठी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 15:15 तक है, जब बढ़त 246° होगी; वणिज 02:46 रवि तक।
शनि 14 फ़रवरी को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:56, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:56 से 06:54 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 14 फ़रवरी को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? माघ
यह मास 24 जनवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मकर में था: माघ।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मकर से माघ। सूर्य 12 फ़रवरी को, मास के भीतर, कुंभ में जाता है। अगली अमावस्या, 23 फ़रवरी, उसे कुंभ में पाती है और फाल्गुन शुरू करती है।
शनि 14 फ़रवरी को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 23 फ़रवरी की अमावस्या, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ फाल्गुन है, और अमान्त गणना में माघ।
शनि 14 फ़रवरी को कौन सा संवत है? विक्रम 1981 · शक 1846
विक्रम संवत 1981 4 अप्रैल 1924 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 4 अप्रैल 1924, 10:17 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 310.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1981 गिनता है; शक संवत 1846।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 14 फ़रवरी को चंद्रोदय कितने बजे है? 23:13
चंद्रमा यहाँ 23:13 पर उदय होता है।
शनि 14 फ़रवरी को चंद्रास्त कितने बजे है? 09:55
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:55 पर अस्त हुआ; वह फिर 23:13 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:55 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 23:13 पर उदय होगा।