Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 18 मार्च 1915
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
1970 से पहले के समय UTC+3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
18 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 18 मार्च
- 04:32–05:20ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:09 से
- 06:09–07:38शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:44–12:32अभिजीत मुहूर्त
- 12:08–13:38लाभ चौघड़िया
- 13:38–15:08अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:38–18:08शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:08 के बाद
- 18:08–19:38अमृत चौघड़िया
- 00:08–01:37 शुक्रलाभ चौघड़िया
-
00:40–02:26 शुक्रअमृत कालअश्विनी में
- 03:07–04:37 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:37–06:07 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:31–05:19 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:09–07:38शुभयमगण्ड में
- 07:38–09:08रोगअशुभ
- 09:08–10:38उद्वेगअशुभ
- 10:38–12:08चरसामान्य
- 12:08–13:38लाभशुभ
- 13:38–15:08अमृतराहु काल में
- 15:08–16:38कालअशुभ
- 16:38–18:08शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:08–19:38अमृतशुभ
- 19:38–21:08चरसामान्य
- 21:08–22:38रोगअशुभ
- 22:38–00:08 शुक्रकालअशुभ
- 00:08–01:37 शुक्रलाभशुभ
- 01:37–03:07 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:07–04:37 शुक्रशुभ
- 04:37–06:07 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 18 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 04:32–05:20, शुभ
- शुभ, 06:09–07:38
- रोग, अशुभ, 07:38–09:08
- उद्वेग, अशुभ, 09:08–10:38
- चर, सामान्य, 10:38–12:08
- लाभ, शुभ, 12:08–13:38
- अमृत, शुभ, 13:38–15:08
- काल, अशुभ, 15:08–16:38
- शुभ, 16:38–18:08
- अमृत, शुभ, 18:08–19:38
- चर, सामान्य, 19:38–21:08
- रोग, अशुभ, 21:08–22:38
- काल, अशुभ, 22:38–00:08 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:08–01:37 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:37–03:07 शुक्र
- शुभ, 03:07–04:37 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:37–06:07 शुक्र
- यमगण्ड, 06:09–07:38, अशुभ
- गुलिक काल, 09:08–10:38, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:08–10:56, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:44–12:32, शुभ
- राहु काल, 13:38–15:08, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:56–15:44, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:31–05:19 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 18 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल तृतीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 26.2° आगे था: शुक्ल तृतीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 24°–36° तीसरी है, शुक्ल तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:09। द्वितीया उससे पहले 01:19 पर समाप्त हुई। तृतीया 03:15 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 36° होगी। बढ़त 15 मार्च की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
गुरु 18 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:32–05:20
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:32–05:20।
बुध 17 मार्च की रात सूर्यास्त 18:07 बुध से सूर्योदय 06:09 तक थी, 12 घं 2 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 18 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:44–12:32
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:44–12:32।
गुरु 18 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 10:08–10:56
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:08–10:56 और 14:56–15:44।
गुरु 18 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 14:56–15:44
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:08–10:56 और 14:56–15:44।
यहाँ दिन, 06:09 से 18:08, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:08–10:56 और 14:56–15:44।
गुरु 18 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:09–07:38 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:09 से 18:08, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:08 से 06:07 शुक्र, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 18 मार्च को राहुकाल कब है? 13:38–15:08
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:38–15:08।
गुरु 18 मार्च को यमगंड कब है? 06:09–07:38
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:09–07:38।
गुरु 18 मार्च को गुलिक काल कब है? 09:08–10:38
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:08–10:38।
यहाँ दिन 06:09 से 18:08 तक है, 11 घं 59 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 18 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:09
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:09, सूर्यास्त 18:08, 11 घं 59 मि का दिन।
गुरु 18 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:08
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:09, सूर्यास्त 18:08, 11 घं 59 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 59 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 59 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 59 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 59 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 18 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? अश्विनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 0° पर था: अश्विनी, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अश्विनी 0°00′–13°20′ तक है; चंद्रमा 0° पर उसके पद 1 में आया। वह 08:37 शुक्र को निकलेगा, भरणी में।
गुरु 18 मार्च को कौन सा योग है? इन्द्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 333.8° थे: इन्द्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 333.8° + 0° = 333.8°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 333°20′–346°40′ छब्बीसवाँ है, इन्द्र। यह 05:46 शुक्र को समाप्त होता है, फिर वैधृति।
गुरु 18 मार्च को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 26.2° थी: तृतीया का पहला आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा तैतिल है और दूसरा गर। तैतिल 14:14 तक है, जब बढ़त 30° होगी; गर 03:15 शुक्र तक।
गुरु 18 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:09, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:09 से 06:07 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 18 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र
यह मास 15 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 13 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 14 अप्रैल, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।
गुरु 18 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 15 मार्च की अमावस्या ने, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में चैत्र है।
गुरु 18 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 1972 · शक 1837
विक्रम संवत 1972 15 मार्च 1915 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 1915, 22:41 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 2.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1972 गिनता है; शक संवत 1837।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 18 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:55
चंद्रमा यहाँ 06:55 पर उदय होता है।
गुरु 18 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 21:00
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 06:55 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 21:00 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 06:55 पर उदय हुआ; वह फिर 21:00 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।