Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग रवि 1 मार्च 1908
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
1970 से पहले के समय UTC+3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
त्योहार
महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि रवि 1 मार्च को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं। रवि 1 मार्च क्यों?
महाशिवरात्रि: Sevan में हर तारीख़व्रत
मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि रवि 1 मार्च को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं। रवि 1 मार्च क्यों?
मासिक शिवरात्रि: Sevan में हर तारीख़1 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 1 मार्च
- 04:52–05:43ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:34 से
- 09:23–10:48लाभ चौघड़िया
- 10:48–12:12अमृत चौघड़िया
- 11:50–12:12अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:37–15:01शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:50 के बाद
- 17:50–19:26शुभ चौघड़िया
-
17:50–18:04अमृत कालराहु काल छोड़कर · धनिष्ठा में
- 19:26–21:01अमृत चौघड़िया
- 01:47–03:22 सोमलाभ चौघड़िया
- 04:58–06:33 सोमशुभ चौघड़िया
- 04:51–05:42 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:34–07:59उद्वेगअशुभ
- 07:59–09:23चरसामान्य
- 09:23–10:48लाभशुभ
- 10:48–12:12अमृतशुभ
- 12:12–13:37कालअशुभ
- 13:37–15:01शुभ
- 15:01–16:26रोगअशुभ
- 16:26–17:50उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:50–19:26शुभ
- 19:26–21:01अमृतशुभ
- 21:01–22:36चरसामान्य
- 22:36–00:12 सोमरोगअशुभ
- 00:12–01:47 सोमकालअशुभ
- 01:47–03:22 सोमलाभशुभ
- 03:22–04:58 सोमउद्वेगअशुभ
- 04:58–06:33 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 1 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 04:52–05:43, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:34–07:59
- चर, सामान्य, 07:59–09:23
- लाभ, शुभ, 09:23–10:48
- अमृत, शुभ, 10:48–12:12
- काल, अशुभ, 12:12–13:37
- शुभ, 13:37–15:01
- रोग, अशुभ, 15:01–16:26
- उद्वेग, अशुभ, 16:26–17:50
- शुभ, 17:50–19:26
- अमृत, शुभ, 19:26–21:01
- चर, सामान्य, 21:01–22:36
- रोग, अशुभ, 22:36–00:12 सोम
- काल, अशुभ, 00:12–01:47 सोम
- लाभ, शुभ, 01:47–03:22 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:22–04:58 सोम
- शुभ, 04:58–06:33 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:50–12:35, शुभ
- यमगण्ड, 12:12–13:37, अशुभ
- गुलिक काल, 15:01–16:26, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:20–17:05, अशुभ
- राहु काल, 16:26–17:50, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:51–05:42 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में महाशिवरात्रि रवि 1 मार्च को क्यों है?
महाशिवरात्रि रवि 1 मार्च को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं।
शिव पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। चतुर्दशी रवि 1 मार्च को 04:53 से सोम 2 मार्च को 01:23 तक है, इसलिए केवल रविवार की रात का निशीथ काल (23:44–00:35 सोम) उसके भीतर है।
Sevan में मासिक शिवरात्रि रवि 1 मार्च को क्यों है?
मासिक शिवरात्रि रवि 1 मार्च को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं।
शिव पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। चतुर्दशी रवि 1 मार्च को 04:53 से सोम 2 मार्च को 01:23 तक है, इसलिए केवल रविवार की रात का निशीथ काल (23:44–00:35 सोम) उसके भीतर है। मासिक शिवरात्रि का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; निशीथ काल Tithika की परिपाटी है।
रवि 1 मार्च को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 337° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:34। त्रयोदशी उससे पहले 04:55 पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 01:25 सोम को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 17 फ़रवरी की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
नई दिल्ली में त्रयोदशी क्यों है?
नई दिल्ली में त्रयोदशी है, Sevan में चतुर्दशी।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:47, त्रयोदशी की समाप्ति 07:25 से पहले हुआ: यह दिन त्रयोदशी है। चतुर्दशी अगले सूर्योदय से पहले, 03:55 सोम को, समाप्त होती है, इसलिए यहाँ कोई दिन चतुर्दशी नहीं होता: वह क्षय है।
Sevan · UTC+3
यहाँ सूर्योदय, 06:34, त्रयोदशी की समाप्ति 04:55 के बाद हुआ: यह दिन चतुर्दशी है।
रवि 1 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:52–05:43
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:52–05:43।
शनि 29 फ़रवरी की रात सूर्यास्त 17:49 शनि से सूर्योदय 06:34 तक थी, 12 घं 45 मि। इसे 51 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 1 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:50–12:35
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:50–12:35।
रवि 1 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 16:20–17:05
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 16:20–17:05।
यहाँ दिन, 06:34 से 17:50, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 16:20–17:05।
रवि 1 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:34–07:59 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:34 से 17:50, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:50 से 06:33 सोम, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 1 मार्च को राहुकाल कब है? 16:26–17:50
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 16:26–17:50।
रवि 1 मार्च को यमगंड कब है? 12:12–13:37
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:12–13:37।
रवि 1 मार्च को गुलिक काल कब है? 15:01–16:26
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:01–16:26।
यहाँ दिन 06:34 से 17:50 तक है, 11 घं 16 मि। इसे 1 घं 24 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 1 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:34
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:34, सूर्यास्त 17:50, 11 घं 16 मि का दिन।
रवि 1 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:50
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:34, सूर्यास्त 17:50, 11 घं 16 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 16 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 43 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 16 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 43 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 1 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? धनिष्ठा
सूर्योदय पर चंद्रमा 294.6° पर था: धनिष्ठा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। धनिष्ठा 293°20′–306°40′ तक है; चंद्रमा 293°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 01:52 सोम को निकलेगा, शतभिषा में।
रवि 1 मार्च को कौन सा योग है? परिघ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 612.2° थे, एक चक्कर और 252.2°: परिघ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 317.6° + 294.6° = 612.2°, एक पूरा चक्कर और 252.2°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 240°00′–253°20′ उन्नीसवाँ है, परिघ। यह 08:19 को समाप्त होता है, फिर शिव।
रवि 1 मार्च को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 337° थी: चतुर्दशी का पहला आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 15:11 तक है, जब बढ़त 342° होगी; शकुनि 01:25 सोम तक।
रवि 1 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:34, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:34 से 06:33 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 1 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? माघ
यह मास 2 फ़रवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मकर में था: माघ।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मकर से माघ। सूर्य 12 फ़रवरी को, मास के भीतर, कुंभ में जाता है। अगली अमावस्या, 2 मार्च, उसे कुंभ में पाती है और फाल्गुन शुरू करती है।
रवि 1 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 2 मार्च की अमावस्या, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ फाल्गुन है, और अमान्त गणना में माघ।
रवि 1 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 1964 · शक 1829
विक्रम संवत 1964 12 अप्रैल 1907 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 12 अप्रैल 1907, 22:05 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 318.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1964 गिनता है; शक संवत 1829।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 1 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 16:09
चंद्रमा यहाँ 16:09 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 16:09 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।