Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग रवि 18 मई 1902
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
1970 से पहले के समय UTC+3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
व्रत
मोहिनी एकादशी
मोहिनी एकादशी रवि 18 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है। रवि 18 मई क्यों?
मोहिनी एकादशी: Sevan में हर तारीख़18 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 18 मई
- 03:25–04:03ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 04:41 से
- 08:19–10:07लाभ चौघड़िया
- 10:07–11:56अमृत चौघड़िया
- 11:27–11:56अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:45–15:33शुभ चौघड़िया
-
13:58–15:33अमृत कालगुलिक काल छोड़कर · हस्त में
- सूर्यास्त 19:11 के बाद
- 19:11–20:22शुभ चौघड़िया
- 20:22–21:33अमृत चौघड़िया
- 01:07–02:18 सोमलाभ चौघड़िया
- 03:29–04:40 सोमशुभ चौघड़िया
- 03:24–04:02 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 04:41–06:30उद्वेगअशुभ
- 06:30–08:19चरसामान्य
- 08:19–10:07लाभशुभ
- 10:07–11:56अमृतशुभ
- 11:56–13:45कालअशुभ
- 13:45–15:33शुभ
- 15:33–17:22रोगअशुभ
- 17:22–19:11उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:11–20:22शुभ
- 20:22–21:33अमृतशुभ
- 21:33–22:44चरसामान्य
- 22:44–23:56रोगअशुभ
- 23:56–01:07 सोमकालअशुभ
- 01:07–02:18 सोमलाभशुभ
- 02:18–03:29 सोमउद्वेगअशुभ
- 03:29–04:40 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 18 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 03:25–04:03, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 04:41–06:30
- चर, सामान्य, 06:30–08:19
- लाभ, शुभ, 08:19–10:07
- अमृत, शुभ, 10:07–11:56
- काल, अशुभ, 11:56–13:45
- शुभ, 13:45–15:33
- रोग, अशुभ, 15:33–17:22
- उद्वेग, अशुभ, 17:22–19:11
- शुभ, 19:11–20:22
- अमृत, शुभ, 20:22–21:33
- चर, सामान्य, 21:33–22:44
- रोग, अशुभ, 22:44–23:56
- काल, अशुभ, 23:56–01:07 सोम
- लाभ, शुभ, 01:07–02:18 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 02:18–03:29 सोम
- शुभ, 03:29–04:40 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:27–12:25, शुभ
- यमगण्ड, 11:56–13:45, अशुभ
- गुलिक काल, 15:33–17:22, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:15–18:13, अशुभ
- राहु काल, 17:22–19:11, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 03:24–04:02 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में मोहिनी एकादशी रवि 18 मई को क्यों है?
मोहिनी एकादशी रवि 18 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शनि 17 मई को 04:40 और रवि 18 मई को 04:39। एकादशी (शनि 17 मई 04:30 से रवि 18 मई 05:33 तक) और द्वादशी (रवि 18 मई 05:33 से सोम 19 मई 07:07 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: रवि 18 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शनि 17 मई को दशमी 04:30 तक है, उसके भीतर (03:04–04:40); रवि 18 मई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
रवि 18 मई को कौन सी तिथि है? शुक्ल एकादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 131.6° आगे था: शुक्ल एकादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 120°–132° ग्यारहवीं है, शुक्ल एकादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 04:41। दशमी उससे पहले 04:32 शनि पर समाप्त हुई। एकादशी 05:35 को समाप्त होगी, जब बढ़त 132° होगी। बढ़त 8 मई की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
एकादशी दो सूर्योदयों पर क्यों है?
एकादशी यहाँ शनि 17 और रवि 18 मई दोनों के सूर्योदय पर है।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। एकादशी 04:32 शनि को, सूर्योदय 04:42 शनि से पहले, शुरू हुई और 05:35 को, अगले सूर्योदय 04:41 के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन एकादशी है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।
रवि 18 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 03:25–04:03
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 03:25–04:03।
शनि 17 मई की रात सूर्यास्त 19:10 शनि से सूर्योदय 04:41 तक थी, 9 घं 31 मि। इसे 38 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 18 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:27–12:25
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:27–12:25।
रवि 18 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 17:15–18:13
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 17:15–18:13।
यहाँ दिन, 04:41 से 19:11, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 58 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 17:15–18:13।
रवि 18 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
04:41–06:30 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 04:41 से 19:11, 1 घं 48 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:11 से 04:40 सोम, 1 घं 11 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 18 मई को राहुकाल कब है? 17:22–19:11
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:22–19:11।
रवि 18 मई को यमगंड कब है? 11:56–13:45
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 11:56–13:45।
रवि 18 मई को गुलिक काल कब है? 15:33–17:22
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:33–17:22।
यहाँ दिन 04:41 से 19:11 तक है, 14 घं 30 मि। इसे 1 घं 48 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 18 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 04:41
यहाँ दिन: सूर्योदय 04:41, सूर्यास्त 19:11, 14 घं 30 मि का दिन।
रवि 18 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:11
यहाँ दिन: सूर्योदय 04:41, सूर्यास्त 19:11, 14 घं 30 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 30 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 29 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 30 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 29 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 18 मई को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 165.3° पर था: हस्त, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 163°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 20:28 को निकलेगा, चित्रा में।
रवि 18 मई को कौन सा योग है? वज्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 199° थे: वज्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 33.7° + 165.3° = 199°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 186°40′–200°00′ पंद्रहवाँ है, वज्र। यह 06:35 को समाप्त होता है, फिर सिद्धि।
रवि 18 मई को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 131.6° थी: एकादशी का दूसरा आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए एकादशी का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 16:59 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 126° हुई; विष्टि 05:35 तक है।
रवि 18 मई को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 04:41, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 04:41 से 04:40 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 18 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 8 मई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 14 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 6 जून, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
रवि 18 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 8 मई की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख है।
रवि 18 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 1959 · शक 1824
विक्रम संवत 1959 8 अप्रैल 1902 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 8 अप्रैल 1902, 16:49 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 38.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1959 गिनता है; शक संवत 1824।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 18 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 15:29
चंद्रमा यहाँ 15:29 पर उदय होता है।
रवि 18 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 02:54 सोम
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:29 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 02:54 सोम पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:29 पर उदय हुआ; वह फिर 02:54 सोम पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।