Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शनि 10 मार्च 1900
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3 में
1970 से पहले के समय UTC+3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
10 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 10 मार्च
- 04:42–05:31ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:20 से
- 07:54–09:15शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:47–12:34अभिजीत मुहूर्त
- 13:38–15:05लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:05–16:33अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:00 के बाद
- 18:00–19:33लाभ चौघड़िया
- 21:05–22:37शुभ चौघड़िया
- 22:37–00:10 रविअमृत चौघड़िया
- 04:47–06:19 रविलाभ चौघड़िया
- 04:40–05:30 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:20–07:48कालअशुभ
- 07:48–09:15शुभ
- 09:15–10:43रोगअशुभ
- 10:43–12:10उद्वेगअशुभ
- 12:10–13:38चरसामान्य
- 13:38–15:05लाभयमगण्ड में
- 15:05–16:33अमृतशुभ
- 16:33–18:00कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:00–19:33लाभशुभ
- 19:33–21:05उद्वेगअशुभ
- 21:05–22:37शुभ
- 22:37–00:10 रविअमृतशुभ
- 00:10–01:42 रविचरसामान्य
- 01:42–03:14 रविरोगअशुभ
- 03:14–04:47 रविकालअशुभ
- 04:47–06:19 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 10 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 04:42–05:31, शुभ
- काल, अशुभ, 06:20–07:48
- शुभ, 07:48–09:15
- रोग, अशुभ, 09:15–10:43
- उद्वेग, अशुभ, 10:43–12:10
- चर, सामान्य, 12:10–13:38
- लाभ, शुभ, 13:38–15:05
- अमृत, शुभ, 15:05–16:33
- काल, अशुभ, 16:33–18:00
- लाभ, शुभ, 18:00–19:33
- उद्वेग, अशुभ, 19:33–21:05
- शुभ, 21:05–22:37
- अमृत, शुभ, 22:37–00:10 रवि
- चर, सामान्य, 00:10–01:42 रवि
- रोग, अशुभ, 01:42–03:14 रवि
- काल, अशुभ, 03:14–04:47 रवि
- लाभ, शुभ, 04:47–06:19 रवि
- गुलिक काल, 06:20–07:48, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:20–07:07, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:07–07:54, अशुभ
- राहु काल, 09:15–10:43, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:47–12:34, शुभ
- यमगण्ड, 13:38–15:05, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:40–05:30 रवि
हर मान कैसे निकलता है
शनि 10 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल दशमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 112° आगे था: शुक्ल दशमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 108°–120° दसवीं है, शुक्ल दशमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:20। नवमी उससे पहले 21:49 शुक्र पर समाप्त हुई। दशमी 23:26 को समाप्त होगी, जब बढ़त 120° होगी। बढ़त 1 मार्च की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
शनि 10 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:42–05:31
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:42–05:31।
शुक्र 9 मार्च की रात सूर्यास्त 17:59 शुक्र से सूर्योदय 06:20 तक थी, 12 घं 21 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 10 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:47–12:34
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:47–12:34।
शनि 10 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 06:20–07:07
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:20–07:07 और 07:07–07:54।
शनि 10 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 07:07–07:54
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:20–07:07 और 07:07–07:54।
यहाँ दिन, 06:20 से 18:00, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 46 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:20–07:07 और 07:07–07:54।
शनि 10 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:20–07:48 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:20 से 18:00, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:00 से 06:19 रवि, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 10 मार्च को राहुकाल कब है? 09:15–10:43
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:15–10:43।
शनि 10 मार्च को यमगंड कब है? 13:38–15:05
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:38–15:05।
शनि 10 मार्च को गुलिक काल कब है? 06:20–07:48
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:20–07:48।
यहाँ दिन 06:20 से 18:00 तक है, 11 घं 40 मि। इसे 1 घं 27 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 10 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:20
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:20, सूर्यास्त 18:00, 11 घं 40 मि का दिन।
शनि 10 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:00
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:20, सूर्यास्त 18:00, 11 घं 40 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 19 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 19 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 10 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? आर्द्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 78.7° पर था: आर्द्रा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। आर्द्रा 66°40′–80°00′ तक है; चंद्रमा 76°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 08:56 को निकलेगा, पुनर्वसु में।
शनि 10 मार्च को कौन सा योग है? सौभाग्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 405.4° थे, एक चक्कर और 45.4°: सौभाग्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 326.7° + 78.7° = 405.4°, एक पूरा चक्कर और 45.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 40°00′–53°20′ चौथा है, सौभाग्य। यह 20:53 को समाप्त होता है, फिर शोभन।
शनि 10 मार्च को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 112° थी: दशमी का पहला आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए दशमी का पहला आधा तैतिल है और दूसरा गर। तैतिल 10:34 तक है, जब बढ़त 114° होगी; गर 23:26 तक।
शनि 10 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:20, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:20 से 06:19 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 10 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 1 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 13 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 30 मार्च, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
शनि 10 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 1 मार्च की अमावस्या ने, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में फाल्गुन है।
शनि 10 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 1956 · शक 1821
विक्रम संवत 1956 10 अप्रैल 1899 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 10 अप्रैल 1899, 09:20 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 329° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1956 गिनता है; शक संवत 1821।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 10 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 12:37
चंद्रमा यहाँ 12:37 पर उदय होता है।
शनि 10 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 03:26 रवि
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 12:37 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 03:26 रवि पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 12:37 पर उदय हुआ; वह फिर 03:26 रवि पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।