Schleusingen, जर्मनी का पंचांग रवि 1 नवंबर 2026
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CET में
त्योहार
अहोई अष्टमी
अहोई अष्टमी रवि 1 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अष्टमी है, और किसी शाम नहीं। रवि 1 नवंबर क्यों?
अहोई अष्टमी: Schleusingen में हर तारीख़1 नवंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 1 नवंबर
- 05:13–06:10ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:07 से
- 09:33–10:46लाभ चौघड़िया
- 10:46–12:00अमृत चौघड़िया
- 11:40–12:00अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:13–14:26शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 16:52 के बाद
- 16:52–18:39शुभ चौघड़िया
-
17:55–19:26अमृत कालपुष्य में
- 18:39–20:26अमृत चौघड़िया
- 01:47–03:35 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:22–07:09 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:15–06:12 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:07–08:20उद्वेगअशुभ
- 08:20–09:33चरसामान्य
- 09:33–10:46लाभशुभ
- 10:46–12:00अमृतशुभ
- 12:00–13:13कालअशुभ
- 13:13–14:26शुभ
- 14:26–15:39रोगअशुभ
- 15:39–16:52उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 16:52–18:39शुभ
- 18:39–20:26अमृतशुभ
- 20:26–22:13चरसामान्य
- 22:13–00:00 सोमरोगअशुभ
- 00:00–01:47 सोमकालअशुभ
- 01:47–03:35 सोमलाभशुभ
- 03:35–05:22 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:22–07:09 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 1 नवंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:13–06:10, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 07:07–08:20
- चर, सामान्य, 08:20–09:33
- लाभ, शुभ, 09:33–10:46
- अमृत, शुभ, 10:46–12:00
- काल, अशुभ, 12:00–13:13
- शुभ, 13:13–14:26
- रोग, अशुभ, 14:26–15:39
- उद्वेग, अशुभ, 15:39–16:52
- शुभ, 16:52–18:39
- अमृत, शुभ, 18:39–20:26
- चर, सामान्य, 20:26–22:13
- रोग, अशुभ, 22:13–00:00 सोम
- काल, अशुभ, 00:00–01:47 सोम
- लाभ, शुभ, 01:47–03:35 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:35–05:22 सोम
- शुभ, 05:22–07:09 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:40–12:19, शुभ
- यमगण्ड, 12:00–13:13, अशुभ
- गुलिक काल, 14:26–15:39, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:34–16:13, अशुभ
- राहु काल, 15:39–16:52, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:15–06:12 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Schleusingen में अहोई अष्टमी रवि 1 नवंबर को क्यों है?
अहोई अष्टमी रवि 1 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अष्टमी है, और किसी शाम नहीं।
अहोई अष्टमी की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अष्टमी रवि 1 नवंबर को 10:22 से सोम 2 नवंबर को 08:41 तक है, इसलिए केवल रविवार का प्रदोष काल (16:52–19:43) उसके भीतर है। अहोई अष्टमी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
रवि 1 नवंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण सप्तमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 262.2° आगे था: कृष्ण सप्तमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 252°–264° बाईसवीं है, कृष्ण सप्तमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:07। षष्ठी उससे पहले 12:27 शनि पर समाप्त हुई। सप्तमी 10:22 को समाप्त होगी, जब बढ़त 264° होगी। बढ़त 26 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
रवि 1 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:13–06:10
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:13–06:10।
शनि 31 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 16:54 शनि से सूर्योदय 07:07 तक थी, 14 घं 13 मि। इसे 56 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 1 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:40–12:19
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:40–12:19।
रवि 1 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:34–16:13
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 15:34–16:13।
यहाँ दिन, 07:07 से 16:52, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 39 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 15:34–16:13।
रवि 1 नवंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:07–08:20 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:07 से 16:52, 1 घं 13 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 16:52 से 07:09 सोम, 1 घं 47 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 1 नवंबर को राहुकाल कब है? 15:39–16:52
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 15:39–16:52।
रवि 1 नवंबर को यमगंड कब है? 12:00–13:13
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:00–13:13।
रवि 1 नवंबर को गुलिक काल कब है? 14:26–15:39
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:26–15:39।
यहाँ दिन 07:07 से 16:52 तक है, 9 घं 45 मि। इसे 1 घं 13 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 1 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:07
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:07, सूर्यास्त 16:52, 9 घं 45 मि का दिन।
रवि 1 नवंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 16:52
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:07, सूर्यास्त 16:52, 9 घं 45 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 17 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 17 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 1 नवंबर को कौन सा नक्षत्र है? पुष्य
सूर्योदय पर चंद्रमा 96.8° पर था: पुष्य, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पुष्य 93°20′–106°40′ तक है; चंद्रमा 96°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 00:00 सोम को निकलेगा, अश्लेशा में।
रवि 1 नवंबर को कौन सा योग है? साध्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 291.4° थे: साध्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 194.6° + 96.8° = 291.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 280°00′–293°20′ बाईसवाँ है, साध्य। यह 10:09 को समाप्त होता है, फिर शुभ।
रवि 1 नवंबर को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 262.2° थी: सप्तमी का दूसरा आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए सप्तमी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 23:22 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 258° हुई; बव 10:22 तक है।
रवि 1 नवंबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 07:07, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:07 से 07:09 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 1 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 10 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 9 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
रवि 1 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 9 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
रवि 1 नवंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 02:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 220.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 1 नवंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 22:45
चंद्रमा यहाँ 22:45 पर उदय होता है।
रवि 1 नवंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 13:53
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 13:53 पर अस्त हुआ; वह फिर 22:45 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 13:53 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 22:45 पर उदय होगा।