Same, किलीमंजारो प्रदेश, तंजा़निया का पंचांग गुरु 1 मार्च 2018
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय EAT में
त्योहार
होलिका दहन
होलिका दहन गुरु 1 मार्च को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में पूर्णिमा है, और किसी शाम नहीं। गुरु 1 मार्च क्यों?
होलिका दहन: Same में हर तारीख़व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। गुरु 1 मार्च क्यों?
पूर्णिमा: Same में हर तारीख़1 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 1 मार्च
- 05:01–05:48ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:36 से
- 06:36–08:07शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:17–13:05अभिजीत मुहूर्त
- 12:41–14:12लाभ चौघड़िया
- 14:12–15:44अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 17:15–18:47शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:47 के बाद
- 18:47–20:15अमृत चौघड़िया
-
19:04–20:33अमृत कालमघा में
- 00:41–02:10 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:38–05:07 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:07–06:35 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 05:01–05:48 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:36–08:07शुभयमगण्ड में
- 08:07–09:38रोगअशुभ
- 09:38–11:10उद्वेगअशुभ
- 11:10–12:41चरसामान्य
- 12:41–14:12लाभशुभ
- 14:12–15:44अमृतराहु काल में
- 15:44–17:15कालअशुभ
- 17:15–18:47शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:47–20:15अमृतशुभ
- 20:15–21:44चरसामान्य
- 21:44–23:12रोगअशुभ
- 23:12–00:41 शुक्रकालअशुभ
- 00:41–02:10 शुक्रलाभशुभ
- 02:10–03:38 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:38–05:07 शुक्रशुभ
- 05:07–06:35 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 1 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:01–05:48, शुभ
- शुभ, 06:36–08:07
- रोग, अशुभ, 08:07–09:38
- उद्वेग, अशुभ, 09:38–11:10
- चर, सामान्य, 11:10–12:41
- लाभ, शुभ, 12:41–14:12
- अमृत, शुभ, 14:12–15:44
- काल, अशुभ, 15:44–17:15
- शुभ, 17:15–18:47
- अमृत, शुभ, 18:47–20:15
- चर, सामान्य, 20:15–21:44
- रोग, अशुभ, 21:44–23:12
- काल, अशुभ, 23:12–00:41 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:41–02:10 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:10–03:38 शुक्र
- शुभ, 03:38–05:07 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:07–06:35 शुक्र
- यमगण्ड, 06:36–08:07, अशुभ
- गुलिक काल, 09:38–11:10, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:39–11:28, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:17–13:05, शुभ
- राहु काल, 14:12–15:44, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:32–16:20, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:01–05:48 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Same में होलिका दहन गुरु 1 मार्च को क्यों है?
होलिका दहन गुरु 1 मार्च को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में पूर्णिमा है, और किसी शाम नहीं।
होलिका दहन प्रदोष काल में, भद्रा के बाहर, होता है: सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को 06:27 से शुक्र 2 मार्च को 03:51 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (18:47–21:08) उसके भीतर है।
Same में पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को क्यों है?
पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को 06:27 से शुक्र 2 मार्च को 03:51 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 1 मार्च के सूर्योदय (06:36) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 1 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 168.1° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:36। चतुर्दशी उससे पहले 06:27 पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 03:51 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 16 फ़रवरी की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
नई दिल्ली में चतुर्दशी क्यों है?
नई दिल्ली में चतुर्दशी है, Same में पूर्णिमा।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:46, चतुर्दशी की समाप्ति 08:57 से पहले हुआ: यह दिन चतुर्दशी है। पूर्णिमा अगले सूर्योदय से पहले, 06:21 शुक्र को, समाप्त होती है, इसलिए यहाँ कोई दिन पूर्णिमा नहीं होता: वह क्षय है।
Same · UTC+3
यहाँ सूर्योदय, 06:36, चतुर्दशी की समाप्ति 06:27 के बाद हुआ: यह दिन पूर्णिमा है।
गुरु 1 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:01–05:48
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:01–05:48।
बुध 28 फ़रवरी की रात सूर्यास्त 18:47 बुध से सूर्योदय 06:36 तक थी, 11 घं 49 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 1 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:17–13:05
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:17–13:05।
गुरु 1 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 10:39–11:28
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:39–11:28 और 15:32–16:20।
गुरु 1 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 15:32–16:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:39–11:28 और 15:32–16:20।
यहाँ दिन, 06:36 से 18:47, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:39–11:28 और 15:32–16:20।
गुरु 1 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:36–08:07 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:36 से 18:47, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:47 से 06:35 शुक्र, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 1 मार्च को राहुकाल कब है? 14:12–15:44
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:12–15:44।
गुरु 1 मार्च को यमगंड कब है? 06:36–08:07
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:36–08:07।
गुरु 1 मार्च को गुलिक काल कब है? 09:38–11:10
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:38–11:10।
यहाँ दिन 06:36 से 18:47 तक है, 12 घं 11 मि। इसे 1 घं 31 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 1 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:36
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:36, सूर्यास्त 18:47, 12 घं 11 मि का दिन।
गुरु 1 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:47
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:36, सूर्यास्त 18:47, 12 घं 11 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 11 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 48 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 11 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 48 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 1 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? मघा
सूर्योदय पर चंद्रमा 124.5° पर था: मघा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मघा 120°00′–133°20′ तक है; चंद्रमा 123°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 21:17 को निकलेगा, पूर्वाफाल्गुनी में।
गुरु 1 मार्च को कौन सा योग है? सुकर्मा
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 440.9° थे, एक चक्कर और 80.9°: सुकर्मा।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 316.4° + 124.5° = 440.9°, एक पूरा चक्कर और 80.9°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 80°00′–93°20′ सातवाँ है, सुकर्मा। यह 01:57 शुक्र को समाप्त होता है, फिर धृति।
गुरु 1 मार्च को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 168.1° थी: पूर्णिमा का पहला आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 17:07 तक है, जब बढ़त 174° होगी; बव 03:51 शुक्र तक।
गुरु 1 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:36, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:36 से 06:35 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 1 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 16 फ़रवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 17 मार्च, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
गुरु 1 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 16 फ़रवरी की अमावस्या ने, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में फाल्गुन है।
गुरु 1 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2074 · शक 1939
विक्रम संवत 2074 28 मार्च 2017 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 28 मार्च 2017, 05:57 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 332.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2074 गिनता है; शक संवत 1939।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 1 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:28
चंद्रमा यहाँ 18:28 पर उदय होता है।
चंद्रमा 18:28 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।