साटली, अज़रबैजान का पंचांग रवि 13 मार्च 2033
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत रवि 13 मार्च को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। रवि 13 मार्च क्यों?
प्रदोष व्रत: साटली में हर तारीख़13 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 13 मार्च
- 05:23–06:12ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:01 से
- 09:58–11:27लाभ चौघड़िया
- 11:27–12:56अमृत चौघड़िया
-
12:11–12:56अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · अश्लेशा में
- 12:32–12:56अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 14:24–15:53शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:51 के बाद
- 18:51–20:22शुभ चौघड़िया
- 20:22–21:53अमृत चौघड़िया
- 02:26–03:57 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:28–06:59 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:22–06:10 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:01–08:29उद्वेगअशुभ
- 08:29–09:58चरसामान्य
- 09:58–11:27लाभशुभ
- 11:27–12:56अमृतशुभ
- 12:56–14:24कालअशुभ
- 14:24–15:53शुभ
- 15:53–17:22रोगअशुभ
- 17:22–18:51उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:51–20:22शुभ
- 20:22–21:53अमृतशुभ
- 21:53–23:24चरसामान्य
- 23:24–00:55 सोमरोगअशुभ
- 00:55–02:26 सोमकालअशुभ
- 02:26–03:57 सोमलाभशुभ
- 03:57–05:28 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:28–06:59 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 13 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:23–06:12, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 07:01–08:29
- चर, सामान्य, 08:29–09:58
- लाभ, शुभ, 09:58–11:27
- अमृत, शुभ, 11:27–12:56
- काल, अशुभ, 12:56–14:24
- शुभ, 14:24–15:53
- रोग, अशुभ, 15:53–17:22
- उद्वेग, अशुभ, 17:22–18:51
- शुभ, 18:51–20:22
- अमृत, शुभ, 20:22–21:53
- चर, सामान्य, 21:53–23:24
- रोग, अशुभ, 23:24–00:55 सोम
- काल, अशुभ, 00:55–02:26 सोम
- लाभ, शुभ, 02:26–03:57 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:57–05:28 सोम
- शुभ, 05:28–06:59 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 12:32–13:19, शुभ
- यमगण्ड, 12:56–14:24, अशुभ
- गुलिक काल, 15:53–17:22, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:16–18:03, अशुभ
- राहु काल, 17:22–18:51, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:22–06:10 सोम
हर मान कैसे निकलता है
साटली में प्रदोष व्रत रवि 13 मार्च को क्यों है?
प्रदोष व्रत रवि 13 मार्च को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 12 मार्च को 22:16 से सोम 14 मार्च को 00:32 तक है, इसलिए केवल रविवार का प्रदोष काल (18:51–21:16) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
रवि 13 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल त्रयोदशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 148° आगे था: शुक्ल त्रयोदशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 144°–156° तेरहवीं है, शुक्ल त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:01। द्वादशी उससे पहले 22:16 शनि पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 00:32 सोम को समाप्त होगी, जब बढ़त 156° होगी। बढ़त 1 मार्च की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
रवि 13 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:23–06:12
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:23–06:12।
शनि 12 मार्च की रात सूर्यास्त 18:50 शनि से सूर्योदय 07:01 तक थी, 12 घं 11 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 13 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:32–13:19
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:32–13:19।
रवि 13 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 17:16–18:03
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 17:16–18:03।
यहाँ दिन, 07:01 से 18:51, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 17:16–18:03।
रवि 13 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:01–08:29 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:01 से 18:51, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:51 से 06:59 सोम, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 13 मार्च को राहुकाल कब है? 17:22–18:51
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:22–18:51।
रवि 13 मार्च को यमगंड कब है? 12:56–14:24
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:56–14:24।
रवि 13 मार्च को गुलिक काल कब है? 15:53–17:22
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:53–17:22।
यहाँ दिन 07:01 से 18:51 तक है, 11 घं 50 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 13 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 07:01
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:01, सूर्यास्त 18:51, 11 घं 50 मि का दिन।
रवि 13 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:51
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:01, सूर्यास्त 18:51, 11 घं 50 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 50 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 8 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 50 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 8 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 13 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? अश्लेशा
सूर्योदय पर चंद्रमा 116.5° पर था: अश्लेशा, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अश्लेशा 106°40′–120°00′ तक है; चंद्रमा 113°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 13:58 को निकलेगा, मघा में।
रवि 13 मार्च को कौन सा योग है? सुकर्मा
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 445° थे, एक चक्कर और 85°: सुकर्मा।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 328.5° + 116.5° = 445°, एक पूरा चक्कर और 85°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 80°00′–93°20′ सातवाँ है, सुकर्मा। यह 22:20 को समाप्त होता है, फिर धृति।
रवि 13 मार्च को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 148° थी: त्रयोदशी का पहला आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 11:22 तक है, जब बढ़त 150° होगी; तैतिल 00:32 सोम तक।
रवि 13 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 07:01, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:01 से 06:59 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 13 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 1 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 30 मार्च, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
रवि 13 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 1 मार्च की अमावस्या ने, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में फाल्गुन है।
रवि 13 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2089 · शक 1954
विक्रम संवत 2089 10 अप्रैल 2032 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 10 अप्रैल 2032, 06:39 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 332° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2089 गिनता है; शक संवत 1954।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 13 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 16:36
चंद्रमा यहाँ 16:36 पर उदय होता है।
रवि 13 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 05:52 सोम
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 16:36 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 05:52 सोम पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 16:36 पर उदय हुआ; वह फिर 05:52 सोम पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।