साटली, अज़रबैजान का पंचांग शनि 30 अक्टूबर 2027
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
त्योहार
गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा शनि 30 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे प्रातःकाल में प्रतिपदा है, और किसी सुबह नहीं। शनि 30 अक्टूबर क्यों?
गोवर्धन पूजा: साटली में हर तारीख़30 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 30 अक्टूबर
- 05:25–06:18ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:12 से
- 08:37–09:51शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:08–12:50अभिजीत मुहूर्त
- 13:49–15:08लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:08–16:27अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:47 के बाद
- 17:47–19:27लाभ चौघड़िया
- 21:08–22:49शुभ चौघड़िया
- 22:49–00:30 रविअमृत चौघड़िया
-
23:17–00:53 रविअमृत कालविशाखा में
- 05:32–07:13 रविलाभ चौघड़िया
- 05:26–06:19 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:12–08:31कालअशुभ
- 08:31–09:51शुभ
- 09:51–11:10रोगअशुभ
- 11:10–12:29उद्वेगअशुभ
- 12:29–13:49चरसामान्य
- 13:49–15:08लाभयमगण्ड में
- 15:08–16:27अमृतशुभ
- 16:27–17:47कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:47–19:27लाभशुभ
- 19:27–21:08उद्वेगअशुभ
- 21:08–22:49शुभ
- 22:49–00:30 रविअमृतशुभ
- 00:30–02:11 रविचरसामान्य
- 02:11–03:52 रविरोगअशुभ
- 03:52–05:32 रविकालअशुभ
- 05:32–07:13 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 30 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:25–06:18, शुभ
- काल, अशुभ, 07:12–08:31
- शुभ, 08:31–09:51
- रोग, अशुभ, 09:51–11:10
- उद्वेग, अशुभ, 11:10–12:29
- चर, सामान्य, 12:29–13:49
- लाभ, शुभ, 13:49–15:08
- अमृत, शुभ, 15:08–16:27
- काल, अशुभ, 16:27–17:47
- लाभ, शुभ, 17:47–19:27
- उद्वेग, अशुभ, 19:27–21:08
- शुभ, 21:08–22:49
- अमृत, शुभ, 22:49–00:30 रवि
- चर, सामान्य, 00:30–02:11 रवि
- रोग, अशुभ, 02:11–03:52 रवि
- काल, अशुभ, 03:52–05:32 रवि
- लाभ, शुभ, 05:32–07:13 रवि
- गुलिक काल, 07:12–08:31, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:12–07:54, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:54–08:37, अशुभ
- राहु काल, 09:51–11:10, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:08–12:50, शुभ
- यमगण्ड, 13:49–15:08, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:26–06:19 रवि
हर मान कैसे निकलता है
साटली में गोवर्धन पूजा शनि 30 अक्टूबर को क्यों है?
गोवर्धन पूजा शनि 30 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे प्रातःकाल में प्रतिपदा है, और किसी सुबह नहीं।
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल में होती है, दिन का पहला पाँचवाँ भाग। प्रतिपदा शुक्र 29 अक्टूबर को 17:36 से शनि 30 अक्टूबर को 16:22 तक है, इसलिए केवल शनिवार का प्रातःकाल (07:12–09:19) उसके भीतर है। गोवर्धन पूजा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रातःकाल Tithika की परिपाटी है।
शनि 30 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल प्रतिपदा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 7.2° आगे था: शुक्ल प्रतिपदा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 0°–12° पहली है, शुक्ल प्रतिपदा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:12। अमावस्या उससे पहले 17:36 शुक्र पर समाप्त हुई। प्रतिपदा 16:22 को समाप्त होगी, जब बढ़त 12° होगी। बढ़त 29 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
शनि 30 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:25–06:18
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:25–06:18।
शुक्र 29 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:48 शुक्र से सूर्योदय 07:12 तक थी, 13 घं 24 मि। इसे 53 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 30 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:08–12:50
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:08–12:50।
शनि 30 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:12–07:54
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 07:12–07:54 और 07:54–08:37।
शनि 30 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:54–08:37
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 07:12–07:54 और 07:54–08:37।
यहाँ दिन, 07:12 से 17:47, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 42 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 07:12–07:54 और 07:54–08:37।
शनि 30 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:12–08:31 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:12 से 17:47, 1 घं 19 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:47 से 07:13 रवि, 1 घं 40 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 30 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 09:51–11:10
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:51–11:10।
शनि 30 अक्टूबर को यमगंड कब है? 13:49–15:08
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:49–15:08।
शनि 30 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 07:12–08:31
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:12–08:31।
यहाँ दिन 07:12 से 17:47 तक है, 10 घं 35 मि। इसे 1 घं 19 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 30 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:12
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:12, सूर्यास्त 17:47, 10 घं 35 मि का दिन।
शनि 30 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:47
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:12, सूर्यास्त 17:47, 10 घं 35 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 35 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 26 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 35 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 26 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 30 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? स्वाती
सूर्योदय पर चंद्रमा 199.4° पर था: स्वाती, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। स्वाती 186°40′–200°00′ तक है; चंद्रमा 196°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 08:13 को निकलेगा, विशाखा में।
शनि 30 अक्टूबर को कौन सा योग है? आयुष्मान्
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 391.6° थे, एक चक्कर और 31.6°: आयुष्मान्।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 192.2° + 199.4° = 391.6°, एक पूरा चक्कर और 31.6°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 26°40′–40°00′ तीसरा है, आयुष्मान्। यह 21:00 को समाप्त होता है, फिर सौभाग्य।
शनि 30 अक्टूबर को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 7.2° थी: प्रतिपदा का दूसरा आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए प्रतिपदा का पहला आधा किंस्तुघ्न है और दूसरा बव। किंस्तुघ्न 04:55 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 6° हुई; बव 16:22 तक है।
शनि 30 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 07:12, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:12 से 07:13 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 30 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक
यह मास 29 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य तुला में था: कार्तिक।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: तुला से कार्तिक। सूर्य 17 नवंबर को, मास के भीतर, वृश्चिक में जाता है। अगली अमावस्या, 28 नवंबर, उसे वृश्चिक में पाती है और मार्गशीर्ष शुरू करती है।
शनि 30 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 29 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में कार्तिक है।
शनि 30 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2084 · शक 1949
विक्रम संवत 2084 7 अप्रैल 2027 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 7 अप्रैल 2027, 03:51 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 199.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2084 गिनता है; शक संवत 1949।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 30 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 08:09
चंद्रमा यहाँ 08:09 पर उदय होता है।
शनि 30 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:53
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:09 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 17:53 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:09 पर उदय हुआ; वह फिर 17:53 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।