साटली, अज़रबैजान का पंचांग सोम 4 जनवरी 2027
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत सोम 4 जनवरी को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है। सोम 4 जनवरी क्यों?
प्रदोष व्रत: साटली में हर तारीख़व्रत का पारण
सफला एकादशी
4 जनवरी का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 4 जनवरी
- 06:11–07:09ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 08:08 से
- 08:08–09:18अमृत चौघड़िया
- 10:29–11:40शुभ चौघड़िया
-
11:12–11:40अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · अनुराधा में
- 12:51–13:10अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 15:41–16:23लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 16:23–17:34अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:34 के बाद
- 23:02–00:51 मंगललाभ चौघड़िया
- 02:40–04:29 मंगलशुभ चौघड़िया
- 04:29–06:18 मंगलअमृत चौघड़िया
- 06:11–07:09 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 08:08–09:18अमृतशुभ
- 09:18–10:29कालअशुभ
- 10:29–11:40शुभ
- 11:40–12:51रोगअशुभ
- 12:51–14:02उद्वेगअशुभ
- 14:02–15:12चरसामान्य
- 15:12–16:23लाभशुभ
- 16:23–17:34अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:34–19:23चरसामान्य
- 19:23–21:12रोगअशुभ
- 21:12–23:02कालअशुभ
- 23:02–00:51 मंगललाभशुभ
- 00:51–02:40 मंगलउद्वेगअशुभ
- 02:40–04:29 मंगलशुभ
- 04:29–06:18 मंगलअमृतशुभ
- 06:18–08:08 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 4 जनवरी: ब्रह्म मुहूर्त, 06:11–07:09, शुभ
- अमृत, शुभ, 08:08–09:18
- काल, अशुभ, 09:18–10:29
- शुभ, 10:29–11:40
- रोग, अशुभ, 11:40–12:51
- उद्वेग, अशुभ, 12:51–14:02
- चर, सामान्य, 14:02–15:12
- लाभ, शुभ, 15:12–16:23
- अमृत, शुभ, 16:23–17:34
- चर, सामान्य, 17:34–19:23
- रोग, अशुभ, 19:23–21:12
- काल, अशुभ, 21:12–23:02
- लाभ, शुभ, 23:02–00:51 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 00:51–02:40 मंगल
- शुभ, 02:40–04:29 मंगल
- अमृत, शुभ, 04:29–06:18 मंगल
- चर, सामान्य, 06:18–08:08 मंगल
- राहु काल, 09:18–10:29, अशुभ
- यमगण्ड, 11:40–12:51, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:32–13:10, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:10–13:47, अशुभ
- गुलिक काल, 14:02–15:12, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:03–15:41, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 06:11–07:09 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
साटली में प्रदोष व्रत सोम 4 जनवरी को क्यों है?
प्रदोष व्रत सोम 4 जनवरी को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी सोम 4 जनवरी को 16:46 पर लगी, उस शाम के प्रदोष काल से पहले, और मंगल 5 जनवरी को 19:10 पर उतरी, अगले प्रदोष काल के बीच में। निर्णयसिंधु वह शाम लेता है जिसे त्रयोदशी पूरा भरती है: सोम 4 जनवरी। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
सोम 4 जनवरी को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 320.1° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 08:08। एकादशी उससे पहले 14:38 रवि पर समाप्त हुई। द्वादशी 16:46 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 24 दिसंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
सोम 4 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 06:11–07:09
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 06:11–07:09।
रवि 3 जनवरी की रात सूर्यास्त 17:33 रवि से सूर्योदय 08:08 तक थी, 14 घं 35 मि। इसे 58 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 4 जनवरी को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:32–13:10
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:32–13:10।
सोम 4 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 13:10–13:47
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 13:10–13:47 और 15:03–15:41।
सोम 4 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 15:03–15:41
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 13:10–13:47 और 15:03–15:41।
यहाँ दिन, 08:08 से 17:34, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 37 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 13:10–13:47 और 15:03–15:41।
सोम 4 जनवरी का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
08:08–09:18 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 08:08 से 17:34, 1 घं 10 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:34 से 08:08 मंगल, 1 घं 49 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 4 जनवरी को राहुकाल कब है? 09:18–10:29
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 09:18–10:29।
सोम 4 जनवरी को यमगंड कब है? 11:40–12:51
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:40–12:51।
सोम 4 जनवरी को गुलिक काल कब है? 14:02–15:12
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:02–15:12।
यहाँ दिन 08:08 से 17:34 तक है, 9 घं 26 मि। इसे 1 घं 10 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 4 जनवरी को सूर्योदय कितने बजे है? 08:08
यहाँ दिन: सूर्योदय 08:08, सूर्यास्त 17:34, 9 घं 26 मि का दिन।
सोम 4 जनवरी को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:34
यहाँ दिन: सूर्योदय 08:08, सूर्यास्त 17:34, 9 घं 26 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 26 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 34 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 26 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 34 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 4 जनवरी को कौन सा नक्षत्र है? अनुराधा
सूर्योदय पर चंद्रमा 219.4° पर था: अनुराधा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अनुराधा 213°20′–226°40′ तक है; चंद्रमा 216°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 22:45 को निकलेगा, ज्येष्ठा में।
सोम 4 जनवरी को कौन सा योग है? शूल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 478.7° थे, एक चक्कर और 118.7°: शूल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 259.3° + 219.4° = 478.7°, एक पूरा चक्कर और 118.7°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 106°40′–120°00′ नौवाँ है, शूल। यह 10:33 को समाप्त होता है, फिर गण्ड।
सोम 4 जनवरी को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 320.1° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 03:40 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 16:46 तक है।
सोम 4 जनवरी को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 08:08, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 08:08 से 08:08 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 4 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? मार्गशीर्ष
यह मास 9 दिसंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य वृश्चिक में था: मार्गशीर्ष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: वृश्चिक से मार्गशीर्ष। सूर्य 16 दिसंबर को, मास के भीतर, धनु में जाता है। अगली अमावस्या, 8 जनवरी, उसे धनु में पाती है और पौष शुरू करती है।
सोम 4 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? पौष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष पौष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 8 जनवरी की अमावस्या, सूर्य धनु में, पौष शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ पौष है, और अमान्त गणना में मार्गशीर्ष।
सोम 4 जनवरी को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 05:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 285.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 4 जनवरी को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:22 मंगल
चंद्रमा यहाँ 06:22 मंगल पर उदय होता है।
सोम 4 जनवरी को चंद्रास्त कितने बजे है? 14:28
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:28 पर अस्त हुआ; वह फिर 06:22 मंगल पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:28 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 06:22 मंगल पर उदय होगा।