साटली, अज़रबैजान का पंचांग शनि 31 अक्टूबर 2026
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
31 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 31 अक्टूबर
- 05:26–06:20ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:13 से
- 08:38–09:51शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:08–12:50अभिजीत मुहूर्त
- 13:48–15:07लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:07–16:26अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:45 के बाद
- 17:45–19:26लाभ चौघड़िया
- 21:07–22:49शुभ चौघड़िया
- 22:49–00:30 रविअमृत चौघड़िया
-
01:55–03:24 रविअमृत कालपुनर्वसु में
- 05:33–07:15 रविलाभ चौघड़िया
- 05:27–06:21 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:13–08:32कालअशुभ
- 08:32–09:51शुभ
- 09:51–11:10रोगअशुभ
- 11:10–12:29उद्वेगअशुभ
- 12:29–13:48चरसामान्य
- 13:48–15:07लाभयमगण्ड में
- 15:07–16:26अमृतशुभ
- 16:26–17:45कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:45–19:26लाभशुभ
- 19:26–21:07उद्वेगअशुभ
- 21:07–22:49शुभ
- 22:49–00:30 रविअमृतशुभ
- 00:30–02:11 रविचरसामान्य
- 02:11–03:52 रविरोगअशुभ
- 03:52–05:33 रविकालअशुभ
- 05:33–07:15 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 31 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:26–06:20, शुभ
- काल, अशुभ, 07:13–08:32
- शुभ, 08:32–09:51
- रोग, अशुभ, 09:51–11:10
- उद्वेग, अशुभ, 11:10–12:29
- चर, सामान्य, 12:29–13:48
- लाभ, शुभ, 13:48–15:07
- अमृत, शुभ, 15:07–16:26
- काल, अशुभ, 16:26–17:45
- लाभ, शुभ, 17:45–19:26
- उद्वेग, अशुभ, 19:26–21:07
- शुभ, 21:07–22:49
- अमृत, शुभ, 22:49–00:30 रवि
- चर, सामान्य, 00:30–02:11 रवि
- रोग, अशुभ, 02:11–03:52 रवि
- काल, अशुभ, 03:52–05:33 रवि
- लाभ, शुभ, 05:33–07:15 रवि
- गुलिक काल, 07:13–08:32, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:13–07:56, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:56–08:38, अशुभ
- राहु काल, 09:51–11:10, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:08–12:50, शुभ
- यमगण्ड, 13:48–15:07, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:27–06:21 रवि
हर मान कैसे निकलता है
शनि 31 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण षष्ठी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 247.4° आगे था: कृष्ण षष्ठी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 240°–252° इक्कीसवीं है, कृष्ण षष्ठी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:13। पञ्चमी उससे पहले 17:55 शुक्र पर समाप्त हुई। षष्ठी 15:27 को समाप्त होगी, जब बढ़त 252° होगी। बढ़त 26 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शनि 31 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:26–06:20
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:26–06:20।
शुक्र 30 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:46 शुक्र से सूर्योदय 07:13 तक थी, 13 घं 27 मि। इसे 53 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 31 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:08–12:50
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:08–12:50।
शनि 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:13–07:56
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 07:13–07:56 और 07:56–08:38।
शनि 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:56–08:38
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 07:13–07:56 और 07:56–08:38।
यहाँ दिन, 07:13 से 17:45, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 42 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 07:13–07:56 और 07:56–08:38।
शनि 31 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:13–08:32 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:13 से 17:45, 1 घं 19 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:45 से 07:15 रवि, 1 घं 41 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 31 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 09:51–11:10
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:51–11:10।
शनि 31 अक्टूबर को यमगंड कब है? 13:48–15:07
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:48–15:07।
शनि 31 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 07:13–08:32
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:13–08:32।
यहाँ दिन 07:13 से 17:45 तक है, 10 घं 32 मि। इसे 1 घं 19 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 31 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:13
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:13, सूर्यास्त 17:45, 10 घं 32 मि का दिन।
शनि 31 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:45
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:13, सूर्यास्त 17:45, 10 घं 32 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 32 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 30 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 32 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 30 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 31 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पुनर्वसु
सूर्योदय पर चंद्रमा 80.9° पर था: पुनर्वसु, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पुनर्वसु 80°00′–93°20′ तक है; चंद्रमा 80° पर उसके पद 1 में आया। वह 04:09 रवि को निकलेगा, पुष्य में।
शनि 31 अक्टूबर को कौन सा योग है? सिद्ध
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 274.4° थे: सिद्ध।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 193.5° + 80.9° = 274.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 266°40′–280°00′ इक्कीसवाँ है, सिद्ध। यह 16:01 को समाप्त होता है, फिर साध्य।
शनि 31 अक्टूबर को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 247.4° थी: षष्ठी का दूसरा आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए षष्ठी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 04:39 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 246° हुई; वणिज 15:27 तक है।
शनि 31 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 07:13, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:13 से 07:15 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 10 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 9 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
शनि 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 9 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
शनि 31 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 05:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 219.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 31 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 22:26
चंद्रमा यहाँ 22:26 पर उदय होता है।
शनि 31 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 13:02
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 13:02 पर अस्त हुआ; वह फिर 22:26 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 13:02 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 22:26 पर उदय होगा।