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साटली, अज़रबैजान का पंचांग शुक्र 3 अप्रैल 2026

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में

प्रतिपदा

कृष्ण पक्ष · 07:12 तक

फिर द्वितीया · 08:39 शनि तक

प्रतिपदा यहाँ दो सूर्योदयों तक है कारण जानें

सूर्योदय और सूर्यास्त

04:57 06:27 19:12अगला सूर्योदय 06:26 शनि

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 06:27–08:03चरसामान्य
  • 08:03–09:38लाभगुलिक काल में
  • 09:38–11:14अमृतशुभ
  • 11:14–12:50कालअशुभ
  • 12:50–14:25शुभ
  • 14:25–16:01रोगअशुभ
  • 16:01–17:36उद्वेगअशुभ
  • 17:36–19:12चरसामान्य

रात का चौघड़िया

  • 19:12–20:36रोगअशुभ
  • 20:36–22:00कालअशुभ
  • 22:00–23:25लाभशुभ
  • 23:25–00:49 शनिउद्वेगअशुभ
  • 00:49–02:13 शनिशुभ
  • 02:13–03:37 शनिअमृतशुभ
  • 03:37–05:01 शनिचरसामान्य
  • 05:01–06:26 शनिरोगअशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, शुक्र 3 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:57–05:42, शुभ
  • चर, सामान्य, 06:27–08:03
  • लाभ, शुभ, 08:03–09:38
  • अमृत, शुभ, 09:38–11:14
  • काल, अशुभ, 11:14–12:50
  • शुभ, 12:50–14:25
  • रोग, अशुभ, 14:25–16:01
  • उद्वेग, अशुभ, 16:01–17:36
  • चर, सामान्य, 17:36–19:12
  • रोग, अशुभ, 19:12–20:36
  • काल, अशुभ, 20:36–22:00
  • लाभ, शुभ, 22:00–23:25
  • उद्वेग, अशुभ, 23:25–00:49 शनि
  • शुभ, 00:49–02:13 शनि
  • अमृत, शुभ, 02:13–03:37 शनि
  • चर, सामान्य, 03:37–05:01 शनि
  • रोग, अशुभ, 05:01–06:26 शनि
  • गुलिक काल, 08:03–09:38, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 09:00–09:51, अशुभ
  • राहु काल, 11:14–12:50, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:24–13:15, शुभ
  • दुर्मुहूर्त, 13:15–14:06, अशुभ
  • यमगण्ड, 16:01–17:36, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:56–05:41 शनि

हर मान कैसे निकलता है

शुक्र 3 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण प्रतिपदा

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 191.6° आगे था: कृष्ण प्रतिपदा।

सूर्य अमावस्या 0° 191.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल प्रतिपदा 180°–192° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 191.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल प्रतिपदा 180°–192° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 180°–192° सोलहवीं है, कृष्ण प्रतिपदा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:27। पूर्णिमा उससे पहले 06:11 गुरु पर समाप्त हुई। प्रतिपदा 07:12 को समाप्त होगी, जब बढ़त 192° होगी। बढ़त 2 अप्रैल की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

प्रतिपदा दो सूर्योदयों पर क्यों है?

प्रतिपदा यहाँ गुरु 2 और शुक्र 3 अप्रैल दोनों के सूर्योदय पर है।

पूर्णिमा प्रतिपदा प्रतिपदा द्वितीया गुरु 2 अप्रैल सुबह शुक्र 3 अप्रैल सुबह साटली UTC+4 06:11 07:12 06:29 प्रतिपदा 06:27 प्रतिपदा प्रतिपदा इस सूर्योदय पर है और इस पर भी
पूर्णिमा प्रतिपदा प्रतिपदा द्वितीया गुरु 2 अप्रैल सुबह शुक्र 3 अप्रैल सुबह साटली UTC+4 06:11 07:12 06:29 प्रतिपदा 06:27 प्रतिपदा प्रतिपदा इस सूर्योदय पर है और इस पर भी
समय नीचे की ओर · धारीदार रेखा: तिथि बदली

दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 06:11 गुरु को, सूर्योदय 06:29 गुरु से पहले, शुरू हुई और 07:12 को, अगले सूर्योदय 06:27 के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन प्रतिपदा है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।

शुक्र 3 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:57–05:42

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:57–05:42।

सूर्यास्त 19:11 गुरु सूर्योदय 06:27 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं गुरु 2 अप्रैल का दिन 14 1
सूर्यास्त 19:11 गुरु सूर्योदय 06:27 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं गुरु 2 अप्रैल का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · गुरुवार का दिन धुँधला

गुरु 2 अप्रैल की रात सूर्यास्त 19:11 गुरु से सूर्योदय 06:27 तक थी, 11 घं 16 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

शुक्र 3 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:24–13:15

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:24–13:15।

शुक्र 3 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 09:00–09:51

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:00–09:51 और 13:15–14:06।

शुक्र 3 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 13:15–14:06

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:00–09:51 और 13:15–14:06।

सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं 8 4 9 1
सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं 8 4 9 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 4, 9

यहाँ दिन, 06:27 से 19:12, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 09:00–09:51 और 13:15–14:06।

शुक्र 3 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

06:27–08:03 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।

सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं चर
सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं चर
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 06:27 से 19:12, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 19:12 से 06:26 शनि, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

शुक्र 3 अप्रैल को राहुकाल कब है? 11:14–12:50

राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:14–12:50।

शुक्र 3 अप्रैल को यमगंड कब है? 16:01–17:36

यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:01–17:36।

शुक्र 3 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 08:03–09:38

गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:03–09:38।

सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: गुलिक काल 2, यमगण्ड 7

यहाँ दिन 06:27 से 19:12 तक है, 12 घं 45 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

शुक्र 3 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:27

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:27, सूर्यास्त 19:12, 12 घं 45 मि का दिन।

शुक्र 3 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:12

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:27, सूर्यास्त 19:12, 12 घं 45 मि का दिन।

सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 06:42 चंद्रोदय 20:49
सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 06:42 चंद्रोदय 20:49
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

शुक्र 3 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा

सूर्योदय पर चंद्रमा 180.8° पर था: चित्रा, पद 3।

चंद्रमा सूर्य 0° चित्रा चंद्रमा 180.8° अगला: स्वाती पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° चित्रा चंद्रमा 180.8° अगला: स्वाती पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 180° पर उसके पद 3 में आया। वह 17:55 को निकलेगा, स्वाती में।

शुक्र 3 अप्रैल को कौन सा योग है? व्याघात

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 529.9° थे, एक चक्कर और 169.9°: व्याघात।

सूर्य 349.1° + चंद्रमा 180.8° = 529.9° एक चक्कर + 169.9° व्याघात 160°00′–173°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 349.1° + चंद्रमा 180.8° = 529.9° एक चक्कर + 169.9° व्याघात 160°00′–173°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 349.1° + 180.8° = 529.9°, एक पूरा चक्कर और 169.9°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 160°00′–173°20′ तेरहवाँ है, व्याघात। यह 12:38 को समाप्त होता है, फिर हर्षण।

शुक्र 3 अप्रैल को कौन सा करण है? कौलव

सूर्योदय पर बढ़त 191.6° थी: प्रतिपदा का दूसरा आधा, कौलव।

सूर्य अमावस्या 0° 191.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल प्रतिपदा 180°–192° कौलव 186°–192° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 191.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल प्रतिपदा 180°–192° कौलव 186°–192° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए प्रतिपदा का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 18:39 गुरु पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 186° हुई; कौलव 07:12 तक है।

शुक्र 3 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार

यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:27, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।

शुक्रवार सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शनि अब भी शुक्रवार
शुक्रवार सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शनि अब भी शुक्रवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:27 से 06:26 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।

शुक्र 3 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र

यह मास 19 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।

मेष 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी
मेष 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 14 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 17 अप्रैल, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।

शुक्र 3 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष वैशाख का है।

अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त चैत्र कृष्ण शुक्ल शुक्र 3 अप्रैल अमावस्या 19 मार्च पूर्णिमा 2 अप्रैल अमावस्या 17 अप्रैल पूर्णिमा 1 मई
अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त चैत्र कृष्ण शुक्ल शुक्र 3 अप्रैल अमावस्या 19 मार्च पूर्णिमा 2 अप्रैल अमावस्या 17 अप्रैल पूर्णिमा 1 मई
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ वैशाख है, और अमान्त गणना में चैत्र।

शुक्र 3 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948

विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026 05:23 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शुक्र 3 अप्रैल सूर्य 349.1° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026 05:23 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शुक्र 3 अप्रैल सूर्य 349.1° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 05:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 14.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

शुक्र 3 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 20:49

चंद्रमा यहाँ 20:49 पर उदय होता है।

शुक्र 3 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 06:42

सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 06:42 चंद्रोदय 20:49
सूर्योदय 06:27 सूर्यास्त 19:12 सूर्योदय 06:26 शनि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 06:42 चंद्रोदय 20:49
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 06:42 पर अस्त हुआ; वह फिर 20:49 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 06:42 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 20:49 पर उदय होगा।