साटली, अज़रबैजान का पंचांग बुध 1 अप्रैल 2026
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
त्योहार
हनुमान जयंती
हनुमान जयंती बुध 1 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। बुध 1 अप्रैल क्यों?
हनुमान जयंती: साटली में हर तारीख़व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा बुध 1 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। बुध 1 अप्रैल क्यों?
पूर्णिमा: साटली में हर तारीख़1 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, बुध 1 अप्रैल
- 05:00–05:45ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:30 से
- 06:30–08:05लाभ चौघड़िया
-
07:18–08:05अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · उत्तराफाल्गुनी में
- 08:05–09:40अमृत चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:15–12:50शुभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 17:35–19:10लाभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 19:10 के बाद
- 20:35–22:00शुभ चौघड़िया
- 22:00–23:24अमृत चौघड़िया
- 03:39–05:04 गुरुलाभ चौघड़िया
- 04:58–05:44 गुरुअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:30–08:05लाभशुभ
- 08:05–09:40अमृतयमगण्ड में
- 09:40–11:15कालअशुभ
- 11:15–12:50शुभगुलिक काल में
- 12:50–14:25रोगअशुभ
- 14:25–16:00उद्वेगअशुभ
- 16:00–17:35चरसामान्य
- 17:35–19:10लाभशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:10–20:35उद्वेगअशुभ
- 20:35–22:00शुभ
- 22:00–23:24अमृतशुभ
- 23:24–00:49 गुरुचरसामान्य
- 00:49–02:14 गुरुरोगअशुभ
- 02:14–03:39 गुरुकालअशुभ
- 03:39–05:04 गुरुलाभशुभ
- 05:04–06:29 गुरुउद्वेगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, बुध 1 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 05:00–05:45, शुभ
- लाभ, शुभ, 06:30–08:05
- अमृत, शुभ, 08:05–09:40
- काल, अशुभ, 09:40–11:15
- शुभ, 11:15–12:50
- रोग, अशुभ, 12:50–14:25
- उद्वेग, अशुभ, 14:25–16:00
- चर, सामान्य, 16:00–17:35
- लाभ, शुभ, 17:35–19:10
- उद्वेग, अशुभ, 19:10–20:35
- शुभ, 20:35–22:00
- अमृत, शुभ, 22:00–23:24
- चर, सामान्य, 23:24–00:49 गुरु
- रोग, अशुभ, 00:49–02:14 गुरु
- काल, अशुभ, 02:14–03:39 गुरु
- लाभ, शुभ, 03:39–05:04 गुरु
- उद्वेग, अशुभ, 05:04–06:29 गुरु
- यमगण्ड, 08:05–09:40, अशुभ
- गुलिक काल, 11:15–12:50, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:25–13:15, अशुभ
- राहु काल, 12:50–14:25, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:58–05:44 गुरु
हर मान कैसे निकलता है
साटली में हनुमान जयंती बुध 1 अप्रैल को क्यों है?
हनुमान जयंती बुध 1 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
हनुमान जयंती सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा बुध 1 अप्रैल को 05:36 से गुरु 2 अप्रैल को 06:11 तक है, इसलिए वह केवल बुध 1 अप्रैल के सूर्योदय (06:30) पर है। हनुमान जयंती का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
साटली में पूर्णिमा बुध 1 अप्रैल को क्यों है?
पूर्णिमा बुध 1 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा बुध 1 अप्रैल को 05:36 से गुरु 2 अप्रैल को 06:11 तक है, इसलिए वह केवल बुध 1 अप्रैल के सूर्योदय (06:30) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
बुध 1 अप्रैल को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 168.4° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:30। चतुर्दशी उससे पहले 05:36 पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 06:11 गुरु को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 19 मार्च की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
नई दिल्ली में चतुर्दशी क्यों है?
नई दिल्ली में चतुर्दशी है, साटली में पूर्णिमा।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:11, चतुर्दशी की समाप्ति 07:06 से पहले हुआ: यह दिन चतुर्दशी है।
साटली · UTC+4
यहाँ सूर्योदय, 06:30, चतुर्दशी की समाप्ति 05:36 के बाद हुआ: यह दिन पूर्णिमा है।
बुध 1 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:00–05:45
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:00–05:45।
मंगल 31 मार्च की रात सूर्यास्त 19:09 मंगल से सूर्योदय 06:30 तक थी, 11 घं 21 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
बुध 1 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 12:25–13:15
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है: 12:25–13:15।
यहाँ दिन, 06:30 से 19:10, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। बुधवार को दुर्मुहूर्त आठवाँ है, 12:25–13:15: वह आठवाँ, बीच वाला, मुहूर्त लेता है, इसलिए बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता।
बुध 1 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:30–08:05 लाभ है, जिसके स्वामी बुध हैं, बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:30 से 19:10, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:10 से 06:29 गुरु, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
बुध 1 अप्रैल को राहुकाल कब है? 12:50–14:25
राहु काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:50–14:25।
बुध 1 अप्रैल को यमगंड कब है? 08:05–09:40
यमगण्ड बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:05–09:40।
बुध 1 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 11:15–12:50
गुलिक काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:15–12:50।
यहाँ दिन 06:30 से 19:10 तक है, 12 घं 40 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: बुधवार को राहु काल पाँचवाँ भाग है, यमगण्ड दूसरा और गुलिक काल चौथा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
बुध 1 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:30
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:30, सूर्यास्त 19:10, 12 घं 40 मि का दिन।
बुध 1 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:30, सूर्यास्त 19:10, 12 घं 40 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 19 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 19 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
बुध 1 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 155.6° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 153°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 14:47 को निकलेगा, हस्त में।
बुध 1 अप्रैल को कौन सा योग है? वृद्धि
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 502.8° थे, एक चक्कर और 142.8°: वृद्धि।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 347.2° + 155.6° = 502.8°, एक पूरा चक्कर और 142.8°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 133°20′–146°40′ ग्यारहवाँ है, वृद्धि। यह 13:20 को समाप्त होता है, फिर ध्रुव।
बुध 1 अप्रैल को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 168.4° थी: पूर्णिमा का पहला आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 17:51 तक है, जब बढ़त 174° होगी; बव 06:11 गुरु तक।
बुध 1 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? बुधवार
यह दिन बुधवार को सूर्योदय, 06:30, पर शुरू हुआ: बुधवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:30 से 06:29 गुरु तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी बुधवार के हैं।
बुध 1 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र
यह मास 19 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 14 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 17 अप्रैल, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।
बुध 1 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 19 मार्च की अमावस्या ने, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में चैत्र है।
बुध 1 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 05:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 13° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
बुध 1 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:42
चंद्रमा यहाँ 18:42 पर उदय होता है।
बुध 1 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 06:19 गुरु
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 18:42 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 06:19 गुरु पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 18:42 पर उदय हुआ; वह फिर 06:19 गुरु पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।