साटली, अज़रबैजान का पंचांग गुरु 1 जनवरी 2026
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत गुरु 1 जनवरी को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। गुरु 1 जनवरी क्यों?
प्रदोष व्रत: साटली में हर तारीख़1 जनवरी का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 1 जनवरी
- 06:11–07:09ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 08:07 से
- 08:07–09:18शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:31–13:08अभिजीत मुहूर्त
- 12:49–14:00लाभ चौघड़िया
- 14:00–15:10अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:21–17:31शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:31 के बाद
- 17:31–19:21अमृत चौघड़िया
-
18:28–19:53अमृत कालरोहिणी में
- 00:50–02:39 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 04:29–06:18 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 06:18–08:08 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 06:11–07:09 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 08:07–09:18शुभयमगण्ड में
- 09:18–10:28रोगअशुभ
- 10:28–11:39उद्वेगअशुभ
- 11:39–12:49चरसामान्य
- 12:49–14:00लाभशुभ
- 14:00–15:10अमृतराहु काल में
- 15:10–16:21कालअशुभ
- 16:21–17:31शुभ
रात का चौघड़िया
- 17:31–19:21अमृतशुभ
- 19:21–21:11चरसामान्य
- 21:11–23:00रोगअशुभ
- 23:00–00:50 शुक्रकालअशुभ
- 00:50–02:39 शुक्रलाभशुभ
- 02:39–04:29 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 04:29–06:18 शुक्रशुभ
- 06:18–08:08 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 1 जनवरी: ब्रह्म मुहूर्त, 06:11–07:09, शुभ
- शुभ, 08:07–09:18
- रोग, अशुभ, 09:18–10:28
- उद्वेग, अशुभ, 10:28–11:39
- चर, सामान्य, 11:39–12:49
- लाभ, शुभ, 12:49–14:00
- अमृत, शुभ, 14:00–15:10
- काल, अशुभ, 15:10–16:21
- शुभ, 16:21–17:31
- अमृत, शुभ, 17:31–19:21
- चर, सामान्य, 19:21–21:11
- रोग, अशुभ, 21:11–23:00
- काल, अशुभ, 23:00–00:50 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:50–02:39 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:39–04:29 शुक्र
- शुभ, 04:29–06:18 शुक्र
- अमृत, शुभ, 06:18–08:08 शुक्र
- यमगण्ड, 08:07–09:18, अशुभ
- गुलिक काल, 10:28–11:39, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 11:15–11:53, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:31–13:08, शुभ
- राहु काल, 14:00–15:10, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:01–15:39, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 06:11–07:09 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
साटली में प्रदोष व्रत गुरु 1 जनवरी को क्यों है?
प्रदोष व्रत गुरु 1 जनवरी को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी गुरु 1 जनवरी को 00:18 से गुरु 1 जनवरी को 20:52 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (17:31–20:27) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
गुरु 1 जनवरी को कौन सी तिथि है? शुक्ल त्रयोदशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 148.6° आगे था: शुक्ल त्रयोदशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 144°–156° तेरहवीं है, शुक्ल त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 08:07। द्वादशी उससे पहले 00:18 पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 20:52 को समाप्त होगी, जब बढ़त 156° होगी। बढ़त 20 दिसंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
गुरु 1 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 06:11–07:09
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 06:11–07:09।
बुध 31 दिसंबर की रात सूर्यास्त 17:31 बुध से सूर्योदय 08:07 तक थी, 14 घं 36 मि। इसे 58 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 1 जनवरी को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:31–13:08
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:31–13:08।
गुरु 1 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 11:15–11:53
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 11:15–11:53 और 15:01–15:39।
गुरु 1 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 15:01–15:39
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 11:15–11:53 और 15:01–15:39।
यहाँ दिन, 08:07 से 17:31, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 37 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 11:15–11:53 और 15:01–15:39।
गुरु 1 जनवरी का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
08:07–09:18 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 08:07 से 17:31, 1 घं 10 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:31 से 08:08 शुक्र, 1 घं 49 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 1 जनवरी को राहुकाल कब है? 14:00–15:10
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:00–15:10।
गुरु 1 जनवरी को यमगंड कब है? 08:07–09:18
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 08:07–09:18।
गुरु 1 जनवरी को गुलिक काल कब है? 10:28–11:39
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:28–11:39।
यहाँ दिन 08:07 से 17:31 तक है, 9 घं 24 मि। इसे 1 घं 10 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 1 जनवरी को सूर्योदय कितने बजे है? 08:07
यहाँ दिन: सूर्योदय 08:07, सूर्यास्त 17:31, 9 घं 24 मि का दिन।
गुरु 1 जनवरी को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:31
यहाँ दिन: सूर्योदय 08:07, सूर्यास्त 17:31, 9 घं 24 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 24 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 37 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 24 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 37 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 1 जनवरी को कौन सा नक्षत्र है? रोहिणी
सूर्योदय पर चंद्रमा 45.1° पर था: रोहिणी, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। रोहिणी 40°00′–53°20′ तक है; चंद्रमा 43°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 21:18 को निकलेगा, मृगशिरा में।
गुरु 1 जनवरी को कौन सा योग है? शुभ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 301.6° थे: शुभ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 256.5° + 45.1° = 301.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 293°20′–306°40′ तेईसवाँ है, शुभ। यह 15:42 को समाप्त होता है, फिर शुक्ल।
गुरु 1 जनवरी को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 148.6° थी: त्रयोदशी का पहला आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 10:36 तक है, जब बढ़त 150° होगी; तैतिल 20:52 तक।
गुरु 1 जनवरी को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 08:07, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 08:07 से 08:08 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 1 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? पौष
यह मास 20 दिसंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य धनु में था: पौष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: धनु से पौष। सूर्य 14 जनवरी को, मास के भीतर, मकर में जाता है। अगली अमावस्या, 18 जनवरी, उसे मकर में पाती है और माघ शुरू करती है।
गुरु 1 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? पौष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष पौष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 20 दिसंबर की अमावस्या ने, सूर्य धनु में, पौष शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में पौष है।
गुरु 1 जनवरी को कौन सा संवत है? विक्रम 2082 · शक 1947
विक्रम संवत 2082 29 मार्च 2025 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 29 मार्च 2025, 14:57 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 271.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2082 गिनता है; शक संवत 1947।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 1 जनवरी को चंद्रोदय कितने बजे है? 15:06
चंद्रमा यहाँ 15:06 पर उदय होता है।
गुरु 1 जनवरी को चंद्रास्त कितने बजे है? 07:16 शुक्र
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:06 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 07:16 शुक्र पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:06 पर उदय हुआ; वह फिर 07:16 शुक्र पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।