साटली, अज़रबैजान का पंचांग सोम 20 अक्टूबर 2025
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
त्योहार
दीवाली · लक्ष्मी पूजा
दीवाली · लक्ष्मी पूजा सोम 20 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं। सोम 20 अक्टूबर क्यों?
दीवाली: साटली में हर तारीख़त्योहार
नरक चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी सोम 20 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं। सोम 20 अक्टूबर क्यों?
नरक चतुर्दशी: साटली में हर तारीख़20 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 20 अक्टूबर
- 05:17–06:09ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:02 से
- 07:02–08:24अमृत चौघड़िया
- 09:46–11:08शुभ चौघड़िया
- 12:30–12:52अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
-
12:30–12:52अमृत कालयमगण्ड, गुलिक काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · हस्त में
-
13:36–13:53अमृत कालयमगण्ड, गुलिक काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · हस्त में
- 15:48–16:37लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 16:37–17:59अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:59 के बाद
- 22:53–00:31 मंगललाभ चौघड़िया
- 02:09–03:47 मंगलशुभ चौघड़िया
- 03:47–05:25 मंगलअमृत चौघड़िया
- 05:18–06:10 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:02–08:24अमृतशुभ
- 08:24–09:46कालअशुभ
- 09:46–11:08शुभ
- 11:08–12:30रोगअशुभ
- 12:30–13:53उद्वेगअशुभ
- 13:53–15:15चरसामान्य
- 15:15–16:37लाभशुभ
- 16:37–17:59अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:59–19:37चरसामान्य
- 19:37–21:15रोगअशुभ
- 21:15–22:53कालअशुभ
- 22:53–00:31 मंगललाभशुभ
- 00:31–02:09 मंगलउद्वेगअशुभ
- 02:09–03:47 मंगलशुभ
- 03:47–05:25 मंगलअमृतशुभ
- 05:25–07:03 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 20 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:17–06:09, शुभ
- अमृत, शुभ, 07:02–08:24
- काल, अशुभ, 08:24–09:46
- शुभ, 09:46–11:08
- रोग, अशुभ, 11:08–12:30
- उद्वेग, अशुभ, 12:30–13:53
- चर, सामान्य, 13:53–15:15
- लाभ, शुभ, 15:15–16:37
- अमृत, शुभ, 16:37–17:59
- चर, सामान्य, 17:59–19:37
- रोग, अशुभ, 19:37–21:15
- काल, अशुभ, 21:15–22:53
- लाभ, शुभ, 22:53–00:31 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 00:31–02:09 मंगल
- शुभ, 02:09–03:47 मंगल
- अमृत, शुभ, 03:47–05:25 मंगल
- चर, सामान्य, 05:25–07:03 मंगल
- राहु काल, 08:24–09:46, अशुभ
- यमगण्ड, 11:08–12:30, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:08–12:52, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:52–13:36, अशुभ
- गुलिक काल, 13:53–15:15, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:04–15:48, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:18–06:10 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
साटली में दीवाली सोम 20 अक्टूबर को क्यों है?
दीवाली · लक्ष्मी पूजा सोम 20 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं।
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या सोम 20 अक्टूबर को 14:15 से मंगल 21 अक्टूबर को 16:25 तक है, इसलिए केवल सोमवार का प्रदोष काल (17:59–20:36) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:59–20:36। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 19:10 से 20:36 तक उदित रहता है।
साटली में नरक चतुर्दशी सोम 20 अक्टूबर को क्यों है?
नरक चतुर्दशी सोम 20 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं।
अभ्यंग स्नान अरुणोदय में होता है, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। चतुर्दशी रवि 19 अक्टूबर को 12:22 से सोम 20 अक्टूबर को 14:15 तक है, इसलिए केवल सोमवार का अरुणोदय (05:26–07:02) उसके भीतर है। नरक चतुर्दशी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अरुणोदय Tithika की परिपाटी है।
सोम 20 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 344.7° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:02। त्रयोदशी उससे पहले 12:22 रवि पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 14:15 को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 7 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
सोम 20 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:17–06:09
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:17–06:09।
रवि 19 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:01 रवि से सूर्योदय 07:02 तक थी, 13 घं 1 मि। इसे 52 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 20 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:08–12:52
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:08–12:52।
सोम 20 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 12:52–13:36
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 12:52–13:36 और 15:04–15:48।
सोम 20 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:04–15:48
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 12:52–13:36 और 15:04–15:48।
यहाँ दिन, 07:02 से 17:59, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 43 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 12:52–13:36 और 15:04–15:48।
सोम 20 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:02–08:24 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:02 से 17:59, 1 घं 22 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:59 से 07:03 मंगल, 1 घं 38 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 20 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 08:24–09:46
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:24–09:46।
सोम 20 अक्टूबर को यमगंड कब है? 11:08–12:30
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:08–12:30।
सोम 20 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 13:53–15:15
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:53–15:15।
यहाँ दिन 07:02 से 17:59 तक है, 10 घं 57 मि। इसे 1 घं 22 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 20 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:02
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:02, सूर्यास्त 17:59, 10 घं 57 मि का दिन।
सोम 20 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:59
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:02, सूर्यास्त 17:59, 10 घं 57 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 57 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 4 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 57 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 4 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 20 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 167.4° पर था: हस्त, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 166°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 18:46 को निकलेगा, चित्रा में।
सोम 20 अक्टूबर को कौन सा योग है? वैधृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 350.2° थे: वैधृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 182.8° + 167.4° = 350.2°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 346°40′–360°00′ सत्ताईसवाँ है, वैधृति। यह 01:04 मंगल को समाप्त होता है, फिर विष्कम्भ।
सोम 20 अक्टूबर को कौन सा करण है? शकुनि
सूर्योदय पर बढ़त 344.7° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, शकुनि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 01:16 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 342° हुई; शकुनि 14:15 तक है।
सोम 20 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 07:02, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:02 से 07:03 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 20 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 21 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 21 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
सोम 20 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 21 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
सोम 20 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2082 · शक 1947
विक्रम संवत 2082 29 मार्च 2025 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 29 मार्च 2025, 14:57 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 198° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2082 गिनता है; शक संवत 1947।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 20 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:51 मंगल
चंद्रमा यहाँ 06:51 मंगल पर उदय होता है।
सोम 20 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:16
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:16 पर अस्त हुआ; वह फिर 06:51 मंगल पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:16 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 06:51 मंगल पर उदय होगा।