साटली, अज़रबैजान का पंचांग शनि 6 अप्रैल 2024
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत शनि 6 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शनि 6 अप्रैल क्यों?
प्रदोष व्रत: साटली में हर तारीख़व्रत का पारण
पापमोचनी एकादशी
6 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 6 अप्रैल
- 04:53–05:37ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:22 से
- 08:05–09:35शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
08:05–09:07अमृत कालगुलिक काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · शतभिषा में
- 12:23–13:14अभिजीत मुहूर्त
- 14:25–16:02लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 16:02–17:39अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 19:15 के बाद
- 19:15–20:38लाभ चौघड़िया
- 22:02–23:25शुभ चौघड़िया
- 23:25–00:48 रविअमृत चौघड़िया
-
04:22–05:47 रविअमृत कालपूर्व भाद्रपद में
- 04:57–06:20 रविलाभ चौघड़िया
- 04:51–05:36 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:22–07:58कालअशुभ
- 07:58–09:35शुभ
- 09:35–11:12रोगअशुभ
- 11:12–12:49उद्वेगअशुभ
- 12:49–14:25चरसामान्य
- 14:25–16:02लाभयमगण्ड में
- 16:02–17:39अमृतशुभ
- 17:39–19:15कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:15–20:38लाभशुभ
- 20:38–22:02उद्वेगअशुभ
- 22:02–23:25शुभ
- 23:25–00:48 रविअमृतशुभ
- 00:48–02:11 रविचरसामान्य
- 02:11–03:34 रविरोगअशुभ
- 03:34–04:57 रविकालअशुभ
- 04:57–06:20 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 6 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:53–05:37, शुभ
- काल, अशुभ, 06:22–07:58
- शुभ, 07:58–09:35
- रोग, अशुभ, 09:35–11:12
- उद्वेग, अशुभ, 11:12–12:49
- चर, सामान्य, 12:49–14:25
- लाभ, शुभ, 14:25–16:02
- अमृत, शुभ, 16:02–17:39
- काल, अशुभ, 17:39–19:15
- लाभ, शुभ, 19:15–20:38
- उद्वेग, अशुभ, 20:38–22:02
- शुभ, 22:02–23:25
- अमृत, शुभ, 23:25–00:48 रवि
- चर, सामान्य, 00:48–02:11 रवि
- रोग, अशुभ, 02:11–03:34 रवि
- काल, अशुभ, 03:34–04:57 रवि
- लाभ, शुभ, 04:57–06:20 रवि
- गुलिक काल, 06:22–07:58, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:22–07:13, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:13–08:05, अशुभ
- राहु काल, 09:35–11:12, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:23–13:14, शुभ
- यमगण्ड, 14:25–16:02, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:51–05:36 रवि
हर मान कैसे निकलता है
साटली में प्रदोष व्रत शनि 6 अप्रैल को क्यों है?
प्रदोष व्रत शनि 6 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 6 अप्रैल को 08:49 से रवि 7 अप्रैल को 05:24 तक है, इसलिए केवल शनिवार का प्रदोष काल (19:15–21:28) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
शनि 6 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 322.6° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:22। एकादशी उससे पहले 11:59 शुक्र पर समाप्त हुई। द्वादशी 08:49 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 25 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
त्रयोदशी क्षय क्यों है?
त्रयोदशी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन त्रयोदशी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। त्रयोदशी 08:49 को शुरू हुई और 05:24 रवि को समाप्त, 06:22 और 06:20 रवि के सूर्योदयों के बीच। शनिवार को द्वादशी है और रविवार को चतुर्दशी: त्रयोदशी यहाँ क्षय तिथि है।
शनि 6 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:53–05:37
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:53–05:37।
शुक्र 5 अप्रैल की रात सूर्यास्त 19:14 शुक्र से सूर्योदय 06:22 तक थी, 11 घं 8 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 6 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:23–13:14
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:23–13:14।
शनि 6 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 06:22–07:13
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:22–07:13 और 07:13–08:05।
शनि 6 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 07:13–08:05
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:22–07:13 और 07:13–08:05।
यहाँ दिन, 06:22 से 19:15, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:22–07:13 और 07:13–08:05।
शनि 6 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:22–07:58 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:22 से 19:15, 1 घं 36 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:15 से 06:20 रवि, 1 घं 23 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 6 अप्रैल को राहुकाल कब है? 09:35–11:12
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:35–11:12।
शनि 6 अप्रैल को यमगंड कब है? 14:25–16:02
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:25–16:02।
शनि 6 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 06:22–07:58
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:22–07:58।
यहाँ दिन 06:22 से 19:15 तक है, 12 घं 53 मि। इसे 1 घं 36 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 6 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:22
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:22, सूर्यास्त 19:15, 12 घं 53 मि का दिन।
शनि 6 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:15
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:22, सूर्यास्त 19:15, 12 घं 53 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 5 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 5 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 6 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? शतभिषा
सूर्योदय पर चंद्रमा 315.2° पर था: शतभिषा, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। शतभिषा 306°40′–320°00′ तक है; चंद्रमा 313°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 14:09 को निकलेगा, पूर्व भाद्रपद में।
शनि 6 अप्रैल को कौन सा योग है? शुक्ल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 667.8° थे, एक चक्कर और 307.8°: शुक्ल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 352.6° + 315.2° = 667.8°, एक पूरा चक्कर और 307.8°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 306°40′–320°00′ चौबीसवाँ है, शुक्ल। यह 00:49 रवि को समाप्त होता है, फिर ब्रह्म।
शनि 6 अप्रैल को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 322.6° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 22:26 शुक्र पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 08:49 तक है।
शनि 6 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:22, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:22 से 06:20 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 6 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 10 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 8 अप्रैल, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
शनि 6 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 8 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र है, और अमान्त गणना में फाल्गुन।
शनि 6 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2080 · शक 1945
विक्रम संवत 2080 21 मार्च 2023 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 21 मार्च 2023, 21:23 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 376° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2080 गिनता है; शक संवत 1945।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 6 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:38 रवि
चंद्रमा यहाँ 05:38 रवि पर उदय होता है।
शनि 6 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 16:28
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:28 पर अस्त हुआ; वह फिर 05:38 रवि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:28 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 05:38 रवि पर उदय होगा।