साटली, अज़रबैजान का पंचांग रवि 23 अक्टूबर 2022
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि रवि 23 अक्टूबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं। रवि 23 अक्टूबर क्यों?
मासिक शिवरात्रि: साटली में हर तारीख़23 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 23 अक्टूबर
- 05:19–06:12ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:04 से
- 09:47–11:09लाभ चौघड़िया
- 11:09–12:30अमृत चौघड़िया
- 12:08–12:30अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:51–15:13शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:55 के बाद
- 17:55–19:34शुभ चौघड़िया
- 19:34–21:13अमृत चौघड़िया
- 02:09–03:48 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:27–07:06 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:20–06:13 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:04–08:26उद्वेगअशुभ
- 08:26–09:47चरसामान्य
- 09:47–11:09लाभशुभ
- 11:09–12:30अमृतशुभ
- 12:30–13:51कालअशुभ
- 13:51–15:13शुभ
- 15:13–16:34रोगअशुभ
- 16:34–17:55उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:55–19:34शुभ
- 19:34–21:13अमृतशुभ
- 21:13–22:52चरसामान्य
- 22:52–00:31 सोमरोगअशुभ
- 00:31–02:09 सोमकालअशुभ
- 02:09–03:48 सोमलाभशुभ
- 03:48–05:27 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:27–07:06 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 23 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:19–06:12, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 07:04–08:26
- चर, सामान्य, 08:26–09:47
- लाभ, शुभ, 09:47–11:09
- अमृत, शुभ, 11:09–12:30
- काल, अशुभ, 12:30–13:51
- शुभ, 13:51–15:13
- रोग, अशुभ, 15:13–16:34
- उद्वेग, अशुभ, 16:34–17:55
- शुभ, 17:55–19:34
- अमृत, शुभ, 19:34–21:13
- चर, सामान्य, 21:13–22:52
- रोग, अशुभ, 22:52–00:31 सोम
- काल, अशुभ, 00:31–02:09 सोम
- लाभ, शुभ, 02:09–03:48 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:48–05:27 सोम
- शुभ, 05:27–07:06 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 12:08–12:52, शुभ
- यमगण्ड, 12:30–13:51, अशुभ
- गुलिक काल, 15:13–16:34, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:29–17:12, अशुभ
- राहु काल, 16:34–17:55, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:20–06:13 सोम
हर मान कैसे निकलता है
साटली में मासिक शिवरात्रि रवि 23 अक्टूबर को क्यों है?
मासिक शिवरात्रि रवि 23 अक्टूबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं।
शिव पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। चतुर्दशी रवि 23 अक्टूबर को 16:33 से सोम 24 अक्टूबर को 15:57 तक है, इसलिए केवल रविवार की रात का निशीथ काल (00:04 सोम–00:57 सोम) उसके भीतर है। मासिक शिवरात्रि का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; निशीथ काल Tithika की परिपाटी है।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण त्रयोदशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 331.2° आगे था: कृष्ण त्रयोदशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 324°–336° अट्ठाईसवीं है, कृष्ण त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:04। द्वादशी उससे पहले 16:33 शनि पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 16:33 को समाप्त होगी, जब बढ़त 336° होगी। बढ़त 10 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
रवि 23 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:19–06:12
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:19–06:12।
शनि 22 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:57 शनि से सूर्योदय 07:04 तक थी, 13 घं 7 मि। इसे 52 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 23 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:08–12:52
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:08–12:52।
रवि 23 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 16:29–17:12
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 16:29–17:12।
यहाँ दिन, 07:04 से 17:55, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 43 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 16:29–17:12।
रवि 23 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:04–08:26 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:04 से 17:55, 1 घं 21 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:55 से 07:06 सोम, 1 घं 38 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 23 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 16:34–17:55
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 16:34–17:55।
रवि 23 अक्टूबर को यमगंड कब है? 12:30–13:51
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:30–13:51।
रवि 23 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 15:13–16:34
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:13–16:34।
यहाँ दिन 07:04 से 17:55 तक है, 10 घं 51 मि। इसे 1 घं 21 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 23 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:04
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:04, सूर्यास्त 17:55, 10 घं 51 मि का दिन।
रवि 23 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:55
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:04, सूर्यास्त 17:55, 10 घं 51 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 51 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 11 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 51 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 11 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 156.7° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 156°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 13:04 को निकलेगा, हस्त में।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा योग है? इन्द्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 342.2° थे: इन्द्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 185.5° + 156.7° = 342.2°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 333°20′–346°40′ छब्बीसवाँ है, इन्द्र। यह 14:36 को समाप्त होता है, फिर वैधृति।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 331.2° थी: त्रयोदशी का दूसरा आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 04:38 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 330° हुई; वणिज 16:33 तक है।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 07:04, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:04 से 07:06 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 26 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 25 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 25 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2079 · शक 1944
विक्रम संवत 2079 1 अप्रैल 2022 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 1 अप्रैल 2022, 10:24 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 198.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2079 गिनता है; शक संवत 1944।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 23 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:39 सोम
चंद्रमा यहाँ 05:39 सोम पर उदय होता है।
रवि 23 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:07
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:07 पर अस्त हुआ; वह फिर 05:39 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:07 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 05:39 सोम पर उदय होगा।