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साटली, अज़रबैजान का पंचांग मंगल 17 मई 2011

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में

पूर्णिमा

शुक्ल पक्ष · 16:08 तक

फिर प्रतिपदा · 13:28 बुध तक

त्योहार

बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा मंगल 17 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। मंगल 17 मई क्यों?

बुद्ध पूर्णिमा: साटली में हर तारीख़

व्रत

पूर्णिमा

पूर्णिमा मंगल 17 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। मंगल 17 मई क्यों?

पूर्णिमा: साटली में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

05:13 06:30 20:55अगला सूर्योदय 06:29 बुध

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 06:30–08:18रोगअशुभ
  • 08:18–10:06उद्वेगअशुभ
  • 10:06–11:54चरसामान्य
  • 11:54–13:43लाभशुभ
  • 13:43–15:31अमृतगुलिक काल में
  • 15:31–17:19कालअशुभ
  • 17:19–19:07शुभराहु काल में
  • 19:07–20:55रोगअशुभ

रात का चौघड़िया

  • 20:55–22:07कालअशुभ
  • 22:07–23:19लाभशुभ
  • 23:19–00:30 बुधउद्वेगअशुभ
  • 00:30–01:42 बुधशुभ
  • 01:42–02:54 बुधअमृतशुभ
  • 02:54–04:05 बुधचरसामान्य
  • 04:05–05:17 बुधरोगअशुभ
  • 05:17–06:29 बुधकालअशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, मंगल 17 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 05:13–05:51, शुभ
  • रोग, अशुभ, 06:30–08:18
  • उद्वेग, अशुभ, 08:18–10:06
  • चर, सामान्य, 10:06–11:54
  • लाभ, शुभ, 11:54–13:43
  • अमृत, शुभ, 13:43–15:31
  • काल, अशुभ, 15:31–17:19
  • शुभ, 17:19–19:07
  • रोग, अशुभ, 19:07–20:55
  • काल, अशुभ, 20:55–22:07
  • लाभ, शुभ, 22:07–23:19
  • उद्वेग, अशुभ, 23:19–00:30 बुध
  • शुभ, 00:30–01:42 बुध
  • अमृत, शुभ, 01:42–02:54 बुध
  • चर, सामान्य, 02:54–04:05 बुध
  • रोग, अशुभ, 04:05–05:17 बुध
  • काल, अशुभ, 05:17–06:29 बुध
  • दुर्मुहूर्त, 09:23–10:21, अशुभ
  • यमगण्ड, 10:06–11:54, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 13:14–14:11, शुभ
  • गुलिक काल, 13:43–15:31, अशुभ
  • राहु काल, 17:19–19:07, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 00:45–01:23 बुध, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:12–05:51 बुध

हर मान कैसे निकलता है

साटली में बुद्ध पूर्णिमा मंगल 17 मई को क्यों है?

बुद्ध पूर्णिमा मंगल 17 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।

चतुर्दशी 05:00 06:00 07:00 08:00 सोम 16 मई सूर्योदय 06:31
चतुर्दशी 05:00 06:00 07:00 08:00 सोम 16 मई सूर्योदय 06:31
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्योदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

बुद्ध पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा सोम 16 मई को 19:10 से मंगल 17 मई को 16:08 तक है, इसलिए वह केवल मंगल 17 मई के सूर्योदय (06:30) पर है। बुद्ध पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।

बुद्ध पूर्णिमा: साटली में हर तारीख़

साटली में पूर्णिमा मंगल 17 मई को क्यों है?

पूर्णिमा मंगल 17 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।

चतुर्दशी 05:00 06:00 07:00 08:00 सोम 16 मई सूर्योदय 06:31
चतुर्दशी 05:00 06:00 07:00 08:00 सोम 16 मई सूर्योदय 06:31
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्योदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा सोम 16 मई को 19:10 से मंगल 17 मई को 16:08 तक है, इसलिए वह केवल मंगल 17 मई के सूर्योदय (06:30) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।

पूर्णिमा: साटली में हर तारीख़

मंगल 17 मई को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 174.5° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।

सूर्य अमावस्या 0° 174.5° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा 168°–180° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 174.5° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा 168°–180° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:30। चतुर्दशी उससे पहले 19:10 सोम पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 16:08 को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 3 मई की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।

मंगल 17 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:13–05:51

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:13–05:51।

सूर्यास्त 20:55 सोम सूर्योदय 06:30 मंगल समय, ऊँचाई नहीं सोम 16 मई का दिन 14 1
सूर्यास्त 20:55 सोम सूर्योदय 06:30 मंगल समय, ऊँचाई नहीं सोम 16 मई का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · सोमवार का दिन धुँधला

सोम 16 मई की रात सूर्यास्त 20:55 सोम से सूर्योदय 06:30 तक थी, 9 घं 35 मि। इसे 38 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

मंगल 17 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:14–14:11

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:14–14:11।

मंगल 17 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 09:23–10:21

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:23–10:21, और रात के 15 में से सातवाँ, 00:45 बुध–01:23 बुध।

मंगल 17 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 00:45–01:23 बुध

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:23–10:21, और रात के 15 में से सातवाँ, 00:45 बुध–01:23 बुध।

सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं 8 4 7 1 1
सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं 8 4 7 1 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 4, 7

यहाँ दिन, 06:30 से 20:55, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 57 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 09:23–10:21 और 00:45 बुध–01:23 बुध।

मंगल 17 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

06:30–08:18 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।

सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं रोग
सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं रोग
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 06:30 से 20:55, 1 घं 48 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 20:55 से 06:29 बुध, 1 घं 11 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

मंगल 17 मई को राहुकाल कब है? 17:19–19:07

राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 17:19–19:07।

मंगल 17 मई को यमगंड कब है? 10:06–11:54

यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:06–11:54।

मंगल 17 मई को गुलिक काल कब है? 13:43–15:31

गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:43–15:31।

सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 3, गुलिक काल 5

यहाँ दिन 06:30 से 20:55 तक है, 14 घं 25 मि। इसे 1 घं 48 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।

सूर्योदय और सूर्यास्त

मंगल 17 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 06:30

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:30, सूर्यास्त 20:55, 14 घं 25 मि का दिन।

मंगल 17 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:55

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:30, सूर्यास्त 20:55, 14 घं 25 मि का दिन।

सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 21:13
सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 21:13
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 25 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 34 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 25 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 34 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

मंगल 17 मई को कौन सा नक्षत्र है? विशाखा

सूर्योदय पर चंद्रमा 206.3° पर था: विशाखा, पद 2।

चंद्रमा सूर्य 0° विशाखा चंद्रमा 206.3° अगला: अनुराधा पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° विशाखा चंद्रमा 206.3° अगला: अनुराधा पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। विशाखा 200°00′–213°20′ तक है; चंद्रमा 203°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 18:00 को निकलेगा, अनुराधा में।

मंगल 17 मई को कौन सा योग है? वरीयान्

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 238.1° थे: वरीयान्।

सूर्य 31.8° + चंद्रमा 206.3° = 238.1° वरीयान् 226°40′–240°00′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 31.8° + चंद्रमा 206.3° = 238.1° वरीयान् 226°40′–240°00′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 31.8° + 206.3° = 238.1°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 226°40′–240°00′ अठारहवाँ है, वरीयान्। यह 09:22 को समाप्त होता है, फिर परिघ।

मंगल 17 मई को कौन सा करण है? बव

सूर्योदय पर बढ़त 174.5° थी: पूर्णिमा का दूसरा आधा, बव।

सूर्य अमावस्या 0° 174.5° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा 168°–180° बव 174°–180° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 174.5° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा 168°–180° बव 174°–180° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 05:37 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 174° हुई; बव 16:08 तक है।

मंगल 17 मई को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार

यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 06:30, पर शुरू हुआ: मंगलवार।

मंगलवार सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं 00:00 बुध अब भी मंगलवार
मंगलवार सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं 00:00 बुध अब भी मंगलवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:30 से 06:29 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।

मंगल 17 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख

यह मास 3 मई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।

मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 15 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 2 जून, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।

मंगल 17 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख का है।

अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त वैशाख कृष्ण शुक्ल मंगल 17 मई पूर्णिमा 18 अप्रैल अमावस्या 3 मई पूर्णिमा 17 मई अमावस्या 2 जून
अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त वैशाख कृष्ण शुक्ल मंगल 17 मई पूर्णिमा 18 अप्रैल अमावस्या 3 मई पूर्णिमा 17 मई अमावस्या 2 जून
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 3 मई की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख है।

मंगल 17 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2068 · शक 1933

विक्रम संवत 2068 3 अप्रैल 2011 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 3 अप्रैल 2011 19:32 · सूर्य मीन में सूर्योदय, मंगल 17 मई सूर्य 31.8° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 3 अप्रैल 2011 19:32 · सूर्य मीन में सूर्योदय, मंगल 17 मई सूर्य 31.8° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2011, 19:32 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 42.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2068 गिनता है; शक संवत 1933।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

मंगल 17 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 21:13

चंद्रमा यहाँ 21:13 पर उदय होता है।

सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 21:13
सूर्योदय 06:30 सूर्यास्त 20:55 सूर्योदय 06:29 बुध समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 21:13
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

चंद्रमा 21:13 पर, रात में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।

चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।