Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग रवि 13 सितंबर 2099
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
व्रत
मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि रवि 13 सितंबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं। रवि 13 सितंबर क्यों?
मासिक शिवरात्रि: Pāthardi में हर तारीख़13 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 13 सितंबर
- 04:42–05:29ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:16 से
- 09:20–10:52लाभ चौघड़िया
- 10:52–12:25अमृत चौघड़िया
- 12:00–12:25अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:57–15:29शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:33 के बाद
- 18:33–20:01शुभ चौघड़िया
- 20:01–21:29अमृत चौघड़िया
-
22:38–00:04 सोमअमृत कालमघा में
- 01:52–03:20 सोमलाभ चौघड़िया
- 04:48–06:16 सोमशुभ चौघड़िया
- 04:42–05:29 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:16–07:48उद्वेगअशुभ
- 07:48–09:20चरसामान्य
- 09:20–10:52लाभशुभ
- 10:52–12:25अमृतशुभ
- 12:25–13:57कालअशुभ
- 13:57–15:29शुभ
- 15:29–17:01रोगअशुभ
- 17:01–18:33उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:33–20:01शुभ
- 20:01–21:29अमृतशुभ
- 21:29–22:57चरसामान्य
- 22:57–00:25 सोमरोगअशुभ
- 00:25–01:52 सोमकालअशुभ
- 01:52–03:20 सोमलाभशुभ
- 03:20–04:48 सोमउद्वेगअशुभ
- 04:48–06:16 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 13 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:42–05:29, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:16–07:48
- चर, सामान्य, 07:48–09:20
- लाभ, शुभ, 09:20–10:52
- अमृत, शुभ, 10:52–12:25
- काल, अशुभ, 12:25–13:57
- शुभ, 13:57–15:29
- रोग, अशुभ, 15:29–17:01
- उद्वेग, अशुभ, 17:01–18:33
- शुभ, 18:33–20:01
- अमृत, शुभ, 20:01–21:29
- चर, सामान्य, 21:29–22:57
- रोग, अशुभ, 22:57–00:25 सोम
- काल, अशुभ, 00:25–01:52 सोम
- लाभ, शुभ, 01:52–03:20 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:20–04:48 सोम
- शुभ, 04:48–06:16 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 12:00–12:49, शुभ
- यमगण्ड, 12:25–13:57, अशुभ
- गुलिक काल, 15:29–17:01, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:55–17:44, अशुभ
- राहु काल, 17:01–18:33, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:42–05:29 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में मासिक शिवरात्रि रवि 13 सितंबर को क्यों है?
मासिक शिवरात्रि रवि 13 सितंबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं।
शिव पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। चतुर्दशी रवि 13 सितंबर को 05:33 से सोम 14 सितंबर को 02:04 तक है, इसलिए केवल रविवार की रात का निशीथ काल (00:01 सोम–00:48 सोम) उसके भीतर है। मासिक शिवरात्रि का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; निशीथ काल Tithika की परिपाटी है।
रवि 13 सितंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 336.4° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:16। त्रयोदशी उससे पहले 05:33 पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 02:04 सोम को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 30 अगस्त की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
रवि 13 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:42–05:29
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:42–05:29।
शनि 12 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:34 शनि से सूर्योदय 06:16 तक थी, 11 घं 42 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 13 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:00–12:49
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:00–12:49।
रवि 13 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 16:55–17:44
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 16:55–17:44।
यहाँ दिन, 06:16 से 18:33, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 16:55–17:44।
रवि 13 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:16–07:48 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:16 से 18:33, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:33 से 06:16 सोम, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 13 सितंबर को राहुकाल कब है? 17:01–18:33
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:01–18:33।
रवि 13 सितंबर को यमगंड कब है? 12:25–13:57
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:25–13:57।
रवि 13 सितंबर को गुलिक काल कब है? 15:29–17:01
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:29–17:01।
यहाँ दिन 06:16 से 18:33 तक है, 12 घं 17 मि। इसे 1 घं 32 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 13 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:16
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:16, सूर्यास्त 18:33, 12 घं 17 मि का दिन।
रवि 13 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:33
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:16, सूर्यास्त 18:33, 12 घं 17 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 17 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 43 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 17 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 43 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 13 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? मघा
सूर्योदय पर चंद्रमा 121.8° पर था: मघा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मघा 120°00′–133°20′ तक है; चंद्रमा 120° पर उसके पद 1 में आया। वह 00:47 सोम को निकलेगा, पूर्वाफाल्गुनी में।
रवि 13 सितंबर को कौन सा योग है? सिद्ध
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 267.1° थे: सिद्ध।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 145.3° + 121.8° = 267.1°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 266°40′–280°00′ इक्कीसवाँ है, सिद्ध। यह 01:38 सोम को समाप्त होता है, फिर साध्य।
रवि 13 सितंबर को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 336.4° थी: चतुर्दशी का पहला आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 15:51 तक है, जब बढ़त 342° होगी; शकुनि 02:04 सोम तक।
रवि 13 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:16, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:16 से 06:16 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 13 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? श्रावण
यह मास 16 अगस्त की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कर्क में था: श्रावण।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कर्क से श्रावण। सूर्य 18 अगस्त को, मास के भीतर, सिंह में जाता है। अगली अमावस्या, 14 सितंबर, उसे सिंह में पाती है और भाद्रपद शुरू करती है।
रवि 13 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? भाद्रपद
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष भाद्रपद का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 सितंबर की अमावस्या, सूर्य सिंह में, भाद्रपद शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ भाद्रपद है, और अमान्त गणना में श्रावण।
रवि 13 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2156 · शक 2021
विक्रम संवत 2156 22 मार्च 2099 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 22 मार्च 2099, 04:18 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 168.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2156 गिनता है; शक संवत 2021।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 13 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:39 सोम
चंद्रमा यहाँ 05:39 सोम पर उदय होता है।
रवि 13 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:41
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:41 पर अस्त हुआ; वह फिर 05:39 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:41 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 05:39 सोम पर उदय होगा।