Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग मंगल 4 अक्टूबर 2089
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
त्योहार
शारदीय नवरात्रि · घटस्थापना
शारदीय नवरात्रि · घटस्थापना मंगल 4 अक्टूबर को है: उस सुबह प्रतिपदा प्रातःकाल को छूती है, और किसी सुबह नहीं। मंगल 4 अक्टूबर क्यों?
शारदीय नवरात्रि: Pāthardi में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या मंगल 4 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। मंगल 4 अक्टूबर क्यों?
अमावस्या: Pāthardi में हर तारीख़4 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, मंगल 4 अक्टूबर
- 04:43–05:32ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:20 से
- 10:48–12:17लाभ चौघड़िया
- 11:53–12:17अभिजीत मुहूर्तगुलिक काल छोड़कर
- 12:17–13:46अमृत चौघड़ियागुलिक काल में
-
13:46–14:12अमृत कालगुलिक काल छोड़कर · हस्त में
- 15:16–16:45शुभ चौघड़ियाराहु काल में
- सूर्यास्त 18:14 के बाद
- 19:45–21:16लाभ चौघड़िया
- 22:46–23:05शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 23:53–00:17 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:17–01:48 बुधअमृत चौघड़िया
- 04:44–05:32 बुधअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:20–07:49रोगअशुभ
- 07:49–09:19उद्वेगअशुभ
- 09:19–10:48चरसामान्य
- 10:48–12:17लाभशुभ
- 12:17–13:46अमृतगुलिक काल में
- 13:46–15:16कालअशुभ
- 15:16–16:45शुभराहु काल में
- 16:45–18:14रोगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:14–19:45कालअशुभ
- 19:45–21:16लाभशुभ
- 21:16–22:46उद्वेगअशुभ
- 22:46–00:17 बुधशुभ
- 00:17–01:48 बुधअमृतशुभ
- 01:48–03:19 बुधचरसामान्य
- 03:19–04:50 बुधरोगअशुभ
- 04:50–06:20 बुधकालअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, मंगल 4 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:43–05:32, शुभ
- रोग, अशुभ, 06:20–07:49
- उद्वेग, अशुभ, 07:49–09:19
- चर, सामान्य, 09:19–10:48
- लाभ, शुभ, 10:48–12:17
- अमृत, शुभ, 12:17–13:46
- काल, अशुभ, 13:46–15:16
- शुभ, 15:16–16:45
- रोग, अशुभ, 16:45–18:14
- काल, अशुभ, 18:14–19:45
- लाभ, शुभ, 19:45–21:16
- उद्वेग, अशुभ, 21:16–22:46
- शुभ, 22:46–00:17 बुध
- अमृत, शुभ, 00:17–01:48 बुध
- चर, सामान्य, 01:48–03:19 बुध
- रोग, अशुभ, 03:19–04:50 बुध
- काल, अशुभ, 04:50–06:20 बुध
- दुर्मुहूर्त, 08:43–09:31, अशुभ
- यमगण्ड, 09:19–10:48, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:53–12:41, शुभ
- गुलिक काल, 12:17–13:46, अशुभ
- राहु काल, 15:16–16:45, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 23:05–23:53, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:44–05:32 बुध
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में शारदीय नवरात्रि मंगल 4 अक्टूबर को क्यों है?
शारदीय नवरात्रि · घटस्थापना मंगल 4 अक्टूबर को है: उस सुबह प्रतिपदा प्रातःकाल को छूती है, और किसी सुबह नहीं।
घटस्थापना प्रातःकाल में होती है, दिन का पहला पाँचवाँ भाग। प्रतिपदा मंगल 4 अक्टूबर को 06:46 से बुध 5 अक्टूबर को 04:29 तक है, इसलिए वह केवल मंगलवार के प्रातःकाल (06:20–08:43) को छूती है।
Pāthardi में अमावस्या मंगल 4 अक्टूबर को क्यों है?
अमावस्या मंगल 4 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या सोम 3 अक्टूबर को 09:25 से मंगल 4 अक्टूबर को 06:46 तक है, इसलिए वह केवल मंगल 4 अक्टूबर के सूर्योदय (06:20) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
मंगल 4 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 359.8° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:20। चतुर्दशी उससे पहले 09:25 सोम पर समाप्त हुई। अमावस्या 06:46 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 20 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
प्रतिपदा क्षय क्यों है?
प्रतिपदा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन प्रतिपदा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 06:46 को शुरू हुई और 04:29 बुध को समाप्त, 06:20 और 06:20 बुध के सूर्योदयों के बीच। मंगलवार को अमावस्या है और बुधवार को द्वितीया: प्रतिपदा यहाँ क्षय तिथि है।
मंगल 4 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:43–05:32
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:43–05:32।
सोम 3 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:15 सोम से सूर्योदय 06:20 तक थी, 12 घं 5 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
मंगल 4 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:53–12:41
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:53–12:41।
मंगल 4 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:43–09:31
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 08:43–09:31, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:05–23:53।
मंगल 4 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 23:05–23:53
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 08:43–09:31, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:05–23:53।
यहाँ दिन, 06:20 से 18:14, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 08:43–09:31 और 23:05–23:53।
मंगल 4 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:20–07:49 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:20 से 18:14, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:14 से 06:20 बुध, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
मंगल 4 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 15:16–16:45
राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:16–16:45।
मंगल 4 अक्टूबर को यमगंड कब है? 09:19–10:48
यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:19–10:48।
मंगल 4 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 12:17–13:46
गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:17–13:46।
यहाँ दिन 06:20 से 18:14 तक है, 11 घं 54 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगल 4 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:20
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:20, सूर्यास्त 18:14, 11 घं 54 मि का दिन।
मंगल 4 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:14
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:20, सूर्यास्त 18:14, 11 घं 54 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 54 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 6 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 54 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 6 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
मंगल 4 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 166.2° पर था: हस्त, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 163°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 18:17 को निकलेगा, चित्रा में।
मंगल 4 अक्टूबर को कौन सा योग है? ब्रह्म
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 332.6° थे: ब्रह्म।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 166.4° + 166.2° = 332.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 320°00′–333°20′ पच्चीसवाँ है, ब्रह्म। यह 07:24 को समाप्त होता है, फिर इन्द्र।
मंगल 4 अक्टूबर को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 359.8° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 20:03 सोम पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 06:46 तक है।
मंगल 4 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार
यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 06:20, पर शुरू हुआ: मंगलवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:20 से 06:20 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।
मंगल 4 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 4 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 17 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 4 अक्टूबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
मंगल 4 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 4 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
मंगल 4 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2146 · शक 2011
विक्रम संवत 2146 11 अप्रैल 2089 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 11 अप्रैल 2089, 04:17 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 169.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2146 गिनता है; शक संवत 2011।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
मंगल 4 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:24
चंद्रमा यहाँ 06:24 पर उदय होता है।
मंगल 4 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:33
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 06:24 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 18:33 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 06:24 पर उदय हुआ; वह फिर 18:33 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।