Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग गुरु 13 नवंबर 2087
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
व्रत
संकष्टी चतुर्थी
संकष्टी चतुर्थी गुरु 13 नवंबर को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है। गुरु 13 नवंबर क्यों?
संकष्टी चतुर्थी: Pāthardi में हर तारीख़13 नवंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 13 नवंबर
- 04:53–05:44ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:35 से
- 06:35–08:00शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
-
08:00–08:15अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · मृगशिरा में
- 11:50–12:35अभिजीत मुहूर्त
- 12:13–13:37लाभ चौघड़िया
- 13:37–15:02अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:26–17:51शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:51 के बाद
- 17:51–19:26अमृत चौघड़िया
- 00:13–01:49 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:24–05:00 शुक्रशुभ चौघड़िया
-
03:30–04:58 शुक्रअमृत कालआर्द्रा में
- 05:00–06:36 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:54–05:45 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:35–08:00शुभयमगण्ड में
- 08:00–09:24रोगअशुभ
- 09:24–10:48उद्वेगअशुभ
- 10:48–12:13चरसामान्य
- 12:13–13:37लाभशुभ
- 13:37–15:02अमृतराहु काल में
- 15:02–16:26कालअशुभ
- 16:26–17:51शुभ
रात का चौघड़िया
- 17:51–19:26अमृतशुभ
- 19:26–21:02चरसामान्य
- 21:02–22:37रोगअशुभ
- 22:37–00:13 शुक्रकालअशुभ
- 00:13–01:49 शुक्रलाभशुभ
- 01:49–03:24 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:24–05:00 शुक्रशुभ
- 05:00–06:36 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 13 नवंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:53–05:44, शुभ
- शुभ, 06:35–08:00
- रोग, अशुभ, 08:00–09:24
- उद्वेग, अशुभ, 09:24–10:48
- चर, सामान्य, 10:48–12:13
- लाभ, शुभ, 12:13–13:37
- अमृत, शुभ, 13:37–15:02
- काल, अशुभ, 15:02–16:26
- शुभ, 16:26–17:51
- अमृत, शुभ, 17:51–19:26
- चर, सामान्य, 19:26–21:02
- रोग, अशुभ, 21:02–22:37
- काल, अशुभ, 22:37–00:13 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:13–01:49 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:49–03:24 शुक्र
- शुभ, 03:24–05:00 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:00–06:36 शुक्र
- यमगण्ड, 06:35–08:00, अशुभ
- गुलिक काल, 09:24–10:48, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:20–11:05, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:50–12:35, शुभ
- राहु काल, 13:37–15:02, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:50–15:35, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:54–05:45 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में संकष्टी चतुर्थी गुरु 13 नवंबर को क्यों है?
संकष्टी चतुर्थी गुरु 13 नवंबर को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है।
संकष्टी का व्रत चंद्रोदय पर खोला जाता है। चतुर्थी गुरु 13 नवंबर को 06:47 से शुक्र 14 नवंबर को 03:49 तक है, इसलिए चंद्रोदय पर वह केवल गुरु 13 नवंबर को है, 20:53 पर। संकष्टी चतुर्थी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; चंद्रोदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 13 नवंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण तृतीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 215.9° आगे था: कृष्ण तृतीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 204°–216° अठारहवीं है, कृष्ण तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:35। द्वितीया उससे पहले 10:11 बुध पर समाप्त हुई। तृतीया 06:47 को समाप्त होगी, जब बढ़त 216° होगी। बढ़त 10 नवंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
चतुर्थी क्षय क्यों है?
चतुर्थी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन चतुर्थी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। चतुर्थी 06:47 को शुरू हुई और 03:49 शुक्र को समाप्त, 06:35 और 06:36 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को तृतीया है और शुक्रवार को पञ्चमी: चतुर्थी यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 13 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:53–05:44
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:53–05:44।
बुध 12 नवंबर की रात सूर्यास्त 17:51 बुध से सूर्योदय 06:35 तक थी, 12 घं 44 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 13 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:50–12:35
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:50–12:35।
गुरु 13 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:20–11:05
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:20–11:05 और 14:50–15:35।
गुरु 13 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:50–15:35
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:20–11:05 और 14:50–15:35।
यहाँ दिन, 06:35 से 17:51, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:20–11:05 और 14:50–15:35।
गुरु 13 नवंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:35–08:00 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:35 से 17:51, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:51 से 06:36 शुक्र, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 13 नवंबर को राहुकाल कब है? 13:37–15:02
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:37–15:02।
गुरु 13 नवंबर को यमगंड कब है? 06:35–08:00
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:35–08:00।
गुरु 13 नवंबर को गुलिक काल कब है? 09:24–10:48
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:24–10:48।
यहाँ दिन 06:35 से 17:51 तक है, 11 घं 16 मि। इसे 1 घं 24 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 13 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:35
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:35, सूर्यास्त 17:51, 11 घं 16 मि का दिन।
गुरु 13 नवंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:51
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:35, सूर्यास्त 17:51, 11 घं 16 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 16 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 45 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 16 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 45 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 13 नवंबर को कौन सा नक्षत्र है? मृगशिरा
सूर्योदय पर चंद्रमा 61.7° पर था: मृगशिरा, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मृगशिरा 53°20′–66°40′ तक है; चंद्रमा 60° पर उसके पद 3 में आया। वह 14:42 को निकलेगा, आर्द्रा में।
गुरु 13 नवंबर को कौन सा योग है? सिद्ध
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 267.5° थे: सिद्ध।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 205.8° + 61.7° = 267.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 266°40′–280°00′ इक्कीसवाँ है, सिद्ध। यह 01:44 शुक्र को समाप्त होता है, फिर साध्य।
गुरु 13 नवंबर को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 215.9° थी: तृतीया का दूसरा आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 20:27 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 210° हुई; विष्टि 06:47 तक है।
गुरु 13 नवंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:35, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:35 से 06:36 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 13 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक
यह मास 26 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य तुला में था: कार्तिक।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: तुला से कार्तिक। सूर्य 17 नवंबर को, मास के भीतर, वृश्चिक में जाता है। अगली अमावस्या, 25 नवंबर, उसे वृश्चिक में पाती है और मार्गशीर्ष शुरू करती है।
गुरु 13 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? मार्गशीर्ष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष मार्गशीर्ष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 25 नवंबर की अमावस्या, सूर्य वृश्चिक में, मार्गशीर्ष शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ मार्गशीर्ष है, और अमान्त गणना में कार्तिक।
गुरु 13 नवंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2144 · शक 2009
विक्रम संवत 2144 3 अप्रैल 2087 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2087, 14:57 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 217° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2144 गिनता है; शक संवत 2009।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 13 नवंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 20:53
चंद्रमा यहाँ 20:53 पर उदय होता है।
गुरु 13 नवंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 09:20
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:20 पर अस्त हुआ; वह फिर 20:53 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:20 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 20:53 पर उदय होगा।