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Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग शनि 4 मई 2075

महाराष्ट्र, भारत

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में

सूर्योदय और सूर्यास्त

04:30 05:59 18:52अगला सूर्योदय 05:59 रवि

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 05:59–07:36कालअशुभ
  • 07:36–09:12शुभ
  • 09:12–10:49रोगअशुभ
  • 10:49–12:26उद्वेगअशुभ
  • 12:26–14:02चरसामान्य
  • 14:02–15:39लाभयमगण्ड में
  • 15:39–17:16अमृतशुभ
  • 17:16–18:52कालअशुभ

रात का चौघड़िया

  • 18:52–20:16लाभशुभ
  • 20:16–21:39उद्वेगअशुभ
  • 21:39–23:02शुभ
  • 23:02–00:25 रविअमृतशुभ
  • 00:25–01:49 रविचरसामान्य
  • 01:49–03:12 रविरोगअशुभ
  • 03:12–04:35 रविकालअशुभ
  • 04:35–05:59 रविलाभशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, शनि 4 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:30–05:15, शुभ
  • काल, अशुभ, 05:59–07:36
  • शुभ, 07:36–09:12
  • रोग, अशुभ, 09:12–10:49
  • उद्वेग, अशुभ, 10:49–12:26
  • चर, सामान्य, 12:26–14:02
  • लाभ, शुभ, 14:02–15:39
  • अमृत, शुभ, 15:39–17:16
  • काल, अशुभ, 17:16–18:52
  • लाभ, शुभ, 18:52–20:16
  • उद्वेग, अशुभ, 20:16–21:39
  • शुभ, 21:39–23:02
  • अमृत, शुभ, 23:02–00:25 रवि
  • चर, सामान्य, 00:25–01:49 रवि
  • रोग, अशुभ, 01:49–03:12 रवि
  • काल, अशुभ, 03:12–04:35 रवि
  • लाभ, शुभ, 04:35–05:59 रवि
  • गुलिक काल, 05:59–07:36, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 05:59–06:51, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 06:51–07:42, अशुभ
  • राहु काल, 09:12–10:49, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:00–12:51, शुभ
  • यमगण्ड, 14:02–15:39, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:30–05:14 रवि

हर मान कैसे निकलता है

शनि 4 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्थी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 224.9° आगे था: कृष्ण चतुर्थी।

सूर्य अमावस्या 0° 224.9° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्थी 216°–228° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 224.9° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्थी 216°–228° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 216°–228° उन्नीसवीं है, कृष्ण चतुर्थी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:59। तृतीया उससे पहले 14:31 शुक्र पर समाप्त हुई। चतुर्थी 11:27 को समाप्त होगी, जब बढ़त 228° होगी। बढ़त 1 मई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

शनि 4 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:30–05:15

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:30–05:15।

सूर्यास्त 18:52 शुक्र सूर्योदय 05:59 शनि समय, ऊँचाई नहीं शुक्र 3 मई का दिन 14 1
सूर्यास्त 18:52 शुक्र सूर्योदय 05:59 शनि समय, ऊँचाई नहीं शुक्र 3 मई का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · शुक्रवार का दिन धुँधला

शुक्र 3 मई की रात सूर्यास्त 18:52 शुक्र से सूर्योदय 05:59 तक थी, 11 घं 7 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

शनि 4 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:00–12:51

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:00–12:51।

शनि 4 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 05:59–06:51

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:59–06:51 और 06:51–07:42।

शनि 4 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 06:51–07:42

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:59–06:51 और 06:51–07:42।

सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं 8 1 2
सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं 8 1 2
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 1, 2

यहाँ दिन, 05:59 से 18:52, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 05:59–06:51 और 06:51–07:42।

शनि 4 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

05:59–07:36 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।

सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं काल
सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं काल
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 05:59 से 18:52, 1 घं 36 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 18:52 से 05:59 रवि, 1 घं 23 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

शनि 4 मई को राहुकाल कब है? 09:12–10:49

राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:12–10:49।

शनि 4 मई को यमगंड कब है? 14:02–15:39

यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:02–15:39।

शनि 4 मई को गुलिक काल कब है? 05:59–07:36

गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:59–07:36।

सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: गुलिक काल 1, यमगण्ड 6

यहाँ दिन 05:59 से 18:52 तक है, 12 घं 53 मि। इसे 1 घं 36 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।

सूर्योदय और सूर्यास्त

शनि 4 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:59

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:59, सूर्यास्त 18:52, 12 घं 53 मि का दिन।

शनि 4 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:52

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:59, सूर्यास्त 18:52, 12 घं 53 मि का दिन।

सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 09:09 चंद्रोदय 22:50
सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 09:09 चंद्रोदय 22:50
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

शनि 4 मई को कौन सा नक्षत्र है? मूल

सूर्योदय पर चंद्रमा 243.7° पर था: मूल, पद 2।

चंद्रमा सूर्य 0° मूल चंद्रमा 243.7° अगला: पूर्वाषाढा पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° मूल चंद्रमा 243.7° अगला: पूर्वाषाढा पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मूल 240°00′–253°20′ तक है; चंद्रमा 243°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 21:49 को निकलेगा, पूर्वाषाढा में।

शनि 4 मई को कौन सा योग है? शिव

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 262.5° थे: शिव।

सूर्य 18.8° + चंद्रमा 243.7° = 262.5° शिव 253°20′–266°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 18.8° + चंद्रमा 243.7° = 262.5° शिव 253°20′–266°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 18.8° + 243.7° = 262.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 253°20′–266°40′ बीसवाँ है, शिव। यह 12:23 को समाप्त होता है, फिर सिद्ध।

शनि 4 मई को कौन सा करण है? बालव

सूर्योदय पर बढ़त 224.9° थी: चतुर्थी का दूसरा आधा, बालव।

सूर्य अमावस्या 0° 224.9° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्थी 216°–228° बालव 222°–228° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 224.9° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्थी 216°–228° बालव 222°–228° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्थी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 00:57 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 222° हुई; बालव 11:27 तक है।

शनि 4 मई को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार

यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 05:59, पर शुरू हुआ: शनिवार।

शनिवार सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 रवि अब भी शनिवार
शनिवार सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 रवि अब भी शनिवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:59 से 05:59 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।

शनि 4 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख (अधिक)

15 अप्रैल और 15 मई की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक वैशाख।

मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ · धारीदार: अगली संक्रांति, मास के बाद

सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 15 अप्रैल 14:26 सोम से 15 मई 04:53 बुध तक सूर्य मेष में रहा; वृषभ में वह अमावस्या के बाद 15 मई 19:39 बुध को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक वैशाख है, जो वैशाख से पहले आता है।

शनि 4 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख (अधिक)

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष वैशाख (अधिक) का है।

अमान्त वैशाख (अधिक) पूर्णिमान्त वैशाख (अधिक) कृष्ण शुक्ल शनि 4 मई अमावस्या 15 अप्रैल पूर्णिमा 1 मई अमावस्या 15 मई पूर्णिमा 30 मई
अमान्त वैशाख (अधिक) पूर्णिमान्त वैशाख (अधिक) कृष्ण शुक्ल शनि 4 मई अमावस्या 15 अप्रैल पूर्णिमा 1 मई अमावस्या 15 मई पूर्णिमा 30 मई
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 15 मई की अमावस्या, सूर्य मेष में, वैशाख (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ वैशाख (अधिक) है, और अमान्त गणना में वैशाख (अधिक)।

शनि 4 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2132 · शक 1997

विक्रम संवत 2132 17 मार्च 2075 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 17 मार्च 2075 00:56 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शनि 4 मई सूर्य 18.8° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 17 मार्च 2075 00:56 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शनि 4 मई सूर्य 18.8° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 17 मार्च 2075, 00:56 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 47.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2132 गिनता है; शक संवत 1997।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

शनि 4 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 22:50

चंद्रमा यहाँ 22:50 पर उदय होता है।

शनि 4 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 09:09

सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 09:09 चंद्रोदय 22:50
सूर्योदय 05:59 सूर्यास्त 18:52 सूर्योदय 05:59 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 09:09 चंद्रोदय 22:50
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:09 पर अस्त हुआ; वह फिर 22:50 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:09 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 22:50 पर उदय होगा।