Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग मंगल 1 अक्टूबर 2058
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
1 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, मंगल 1 अक्टूबर
- 04:43–05:31ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:19 से
- 10:49–12:18लाभ चौघड़िया
- 11:54–12:18अभिजीत मुहूर्तगुलिक काल छोड़कर
- 12:18–13:48अमृत चौघड़ियागुलिक काल में
- 15:18–16:47शुभ चौघड़ियाराहु काल में
- सूर्यास्त 18:17 के बाद
- 19:47–21:18लाभ चौघड़िया
- 22:48–23:06शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 23:54–00:18 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:18–01:49 बुधअमृत चौघड़िया
- 04:43–05:31 बुधअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:19–07:49रोगअशुभ
- 07:49–09:19उद्वेगअशुभ
- 09:19–10:49चरसामान्य
- 10:49–12:18लाभशुभ
- 12:18–13:48अमृतगुलिक काल में
- 13:48–15:18कालअशुभ
- 15:18–16:47शुभराहु काल में
- 16:47–18:17रोगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:17–19:47कालअशुभ
- 19:47–21:18लाभशुभ
- 21:18–22:48उद्वेगअशुभ
- 22:48–00:18 बुधशुभ
- 00:18–01:49 बुधअमृतशुभ
- 01:49–03:19 बुधचरसामान्य
- 03:19–04:49 बुधरोगअशुभ
- 04:49–06:20 बुधकालअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, मंगल 1 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:43–05:31, शुभ
- रोग, अशुभ, 06:19–07:49
- उद्वेग, अशुभ, 07:49–09:19
- चर, सामान्य, 09:19–10:49
- लाभ, शुभ, 10:49–12:18
- अमृत, शुभ, 12:18–13:48
- काल, अशुभ, 13:48–15:18
- शुभ, 15:18–16:47
- रोग, अशुभ, 16:47–18:17
- काल, अशुभ, 18:17–19:47
- लाभ, शुभ, 19:47–21:18
- उद्वेग, अशुभ, 21:18–22:48
- शुभ, 22:48–00:18 बुध
- अमृत, शुभ, 00:18–01:49 बुध
- चर, सामान्य, 01:49–03:19 बुध
- रोग, अशुभ, 03:19–04:49 बुध
- काल, अशुभ, 04:49–06:20 बुध
- दुर्मुहूर्त, 08:43–09:31, अशुभ
- यमगण्ड, 09:19–10:49, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:54–12:42, शुभ
- गुलिक काल, 12:18–13:48, अशुभ
- राहु काल, 15:18–16:47, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 23:06–23:54, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:43–05:31 बुध
हर मान कैसे निकलता है
मंगल 1 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 165.9° आगे था: शुक्ल चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 156°–168° चौदहवीं है, शुक्ल चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:19। त्रयोदशी उससे पहले 13:06 सोम पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 09:59 को समाप्त होगी, जब बढ़त 168° होगी। बढ़त 18 सितंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
मंगल 1 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:43–05:31
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:43–05:31।
सोम 30 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:18 सोम से सूर्योदय 06:19 तक थी, 12 घं 1 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
मंगल 1 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:54–12:42
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:54–12:42।
मंगल 1 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:43–09:31
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 08:43–09:31, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:06–23:54।
मंगल 1 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 23:06–23:54
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 08:43–09:31, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:06–23:54।
यहाँ दिन, 06:19 से 18:17, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 08:43–09:31 और 23:06–23:54।
मंगल 1 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:19–07:49 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:19 से 18:17, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:17 से 06:20 बुध, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
मंगल 1 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 15:18–16:47
राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:18–16:47।
मंगल 1 अक्टूबर को यमगंड कब है? 09:19–10:49
यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:19–10:49।
मंगल 1 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 12:18–13:48
गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:18–13:48।
यहाँ दिन 06:19 से 18:17 तक है, 11 घं 58 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगल 1 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:19
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:19, सूर्यास्त 18:17, 11 घं 58 मि का दिन।
मंगल 1 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:17
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:19, सूर्यास्त 18:17, 11 घं 58 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 58 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 3 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 58 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 3 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
मंगल 1 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पूर्व भाद्रपद
सूर्योदय पर चंद्रमा 329.3° पर था: पूर्व भाद्रपद, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्व भाद्रपद 320°00′–333°20′ तक है; चंद्रमा 326°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 12:50 को निकलेगा, उत्तर भाद्रपद में।
मंगल 1 अक्टूबर को कौन सा योग है? गण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 492.7° थे, एक चक्कर और 132.7°: गण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 163.4° + 329.3° = 492.7°, एक पूरा चक्कर और 132.7°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 120°00′–133°20′ दसवाँ है, गण्ड। यह 07:09 को समाप्त होता है, फिर वृद्धि।
मंगल 1 अक्टूबर को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 165.9° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 23:31 सोम पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 162° हुई; वणिज 09:59 तक है।
मंगल 1 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार
यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 06:19, पर शुरू हुआ: मंगलवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:19 से 06:20 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।
मंगल 1 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन (अधिक)
18 सितंबर और 17 अक्टूबर की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक आश्विन।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 18 सितंबर 03:48 बुध से 17 अक्टूबर 18:35 गुरु तक सूर्य कन्या में रहा; तुला में वह अमावस्या के बाद 18 अक्टूबर 00:48 शुक्र को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक आश्विन है, जो आश्विन से पहले आता है।
मंगल 1 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष आश्विन (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 18 सितंबर की अमावस्या ने, सूर्य कन्या में, आश्विन (अधिक) शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में आश्विन (अधिक) है।
मंगल 1 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2115 · शक 1980
विक्रम संवत 2115 24 मार्च 2058 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 2058, 15:20 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 184.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2115 गिनता है; शक संवत 1980।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
मंगल 1 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:05
चंद्रमा यहाँ 18:05 पर उदय होता है।
चंद्रमा 18:05 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।