Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग शनि 1 अप्रैल 2056
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
1 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 1 अप्रैल
- 04:49–05:36ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:22 से
- 08:01–09:27शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:08–12:57अभिजीत मुहूर्त
- 14:05–15:38लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:38–17:10अमृत चौघड़िया
-
17:32–18:56अमृत कालचित्रा में
- सूर्यास्त 18:43 के बाद
- 18:43–20:10लाभ चौघड़िया
- 21:37–23:05शुभ चौघड़िया
- 23:05–00:32 रविअमृत चौघड़िया
- 04:54–06:21 रविलाभ चौघड़िया
- 04:48–05:35 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:22–07:55कालअशुभ
- 07:55–09:27शुभ
- 09:27–11:00रोगअशुभ
- 11:00–12:33उद्वेगअशुभ
- 12:33–14:05चरसामान्य
- 14:05–15:38लाभयमगण्ड में
- 15:38–17:10अमृतशुभ
- 17:10–18:43कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:43–20:10लाभशुभ
- 20:10–21:37उद्वेगअशुभ
- 21:37–23:05शुभ
- 23:05–00:32 रविअमृतशुभ
- 00:32–01:59 रविचरसामान्य
- 01:59–03:27 रविरोगअशुभ
- 03:27–04:54 रविकालअशुभ
- 04:54–06:21 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 1 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:49–05:36, शुभ
- काल, अशुभ, 06:22–07:55
- शुभ, 07:55–09:27
- रोग, अशुभ, 09:27–11:00
- उद्वेग, अशुभ, 11:00–12:33
- चर, सामान्य, 12:33–14:05
- लाभ, शुभ, 14:05–15:38
- अमृत, शुभ, 15:38–17:10
- काल, अशुभ, 17:10–18:43
- लाभ, शुभ, 18:43–20:10
- उद्वेग, अशुभ, 20:10–21:37
- शुभ, 21:37–23:05
- अमृत, शुभ, 23:05–00:32 रवि
- चर, सामान्य, 00:32–01:59 रवि
- रोग, अशुभ, 01:59–03:27 रवि
- काल, अशुभ, 03:27–04:54 रवि
- लाभ, शुभ, 04:54–06:21 रवि
- गुलिक काल, 06:22–07:55, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:22–07:12, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:12–08:01, अशुभ
- राहु काल, 09:27–11:00, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:08–12:57, शुभ
- यमगण्ड, 14:05–15:38, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:48–05:35 रवि
हर मान कैसे निकलता है
शनि 1 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण प्रतिपदा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 188.6° आगे था: कृष्ण प्रतिपदा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 180°–192° सोलहवीं है, कृष्ण प्रतिपदा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:22। पूर्णिमा उससे पहले 15:55 शुक्र पर समाप्त हुई। प्रतिपदा 12:04 को समाप्त होगी, जब बढ़त 192° होगी। बढ़त 31 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शनि 1 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:49–05:36
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:49–05:36।
शुक्र 31 मार्च की रात सूर्यास्त 18:43 शुक्र से सूर्योदय 06:22 तक थी, 11 घं 39 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 1 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:08–12:57
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:08–12:57।
शनि 1 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 06:22–07:12
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:22–07:12 और 07:12–08:01।
शनि 1 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 07:12–08:01
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:22–07:12 और 07:12–08:01।
यहाँ दिन, 06:22 से 18:43, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:22–07:12 और 07:12–08:01।
शनि 1 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:22–07:55 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:22 से 18:43, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:43 से 06:21 रवि, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 1 अप्रैल को राहुकाल कब है? 09:27–11:00
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:27–11:00।
शनि 1 अप्रैल को यमगंड कब है? 14:05–15:38
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:05–15:38।
शनि 1 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 06:22–07:55
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:22–07:55।
यहाँ दिन 06:22 से 18:43 तक है, 12 घं 21 मि। इसे 1 घं 32 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 1 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:22
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:22, सूर्यास्त 18:43, 12 घं 21 मि का दिन।
शनि 1 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:43
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:22, सूर्यास्त 18:43, 12 घं 21 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 21 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 38 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 21 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 38 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 1 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 176° पर था: चित्रा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 173°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 23:08 को निकलेगा, स्वाती में।
शनि 1 अप्रैल को कौन सा योग है? व्याघात
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 523.4° थे, एक चक्कर और 163.4°: व्याघात।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 347.4° + 176° = 523.4°, एक पूरा चक्कर और 163.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 160°00′–173°20′ तेरहवाँ है, व्याघात। यह 21:02 को समाप्त होता है, फिर हर्षण।
शनि 1 अप्रैल को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 188.6° थी: प्रतिपदा का दूसरा आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए प्रतिपदा का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 02:00 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 186° हुई; कौलव 12:04 तक है।
शनि 1 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:22, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:22 से 06:21 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 1 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र
यह मास 16 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 14 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 15 अप्रैल, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।
शनि 1 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष वैशाख का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 15 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ वैशाख है, और अमान्त गणना में चैत्र।
शनि 1 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2113 · शक 1978
विक्रम संवत 2113 16 मार्च 2056 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 16 मार्च 2056, 12:22 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 15.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2113 गिनता है; शक संवत 1978।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 1 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 19:52
चंद्रमा यहाँ 19:52 पर उदय होता है।
शनि 1 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 07:08
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:08 पर अस्त हुआ; वह फिर 19:52 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:08 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 19:52 पर उदय होगा।