Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग गुरु 24 अक्टूबर 2030
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
त्योहार
धनतेरस
धनतेरस गुरु 24 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। गुरु 24 अक्टूबर क्यों?
धनतेरस: Pāthardi में हर तारीख़व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत गुरु 24 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। गुरु 24 अक्टूबर क्यों?
प्रदोष व्रत: Pāthardi में हर तारीख़व्रत का पारण
रमा एकादशी
24 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 24 अक्टूबर
- 04:46–05:36ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:26 से
- 06:26–07:53शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:50–12:36अभिजीत मुहूर्त
- 12:13–13:40लाभ चौघड़िया
- 13:40–15:06अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:33–18:00शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:00 के बाद
- 18:00–19:33अमृत चौघड़िया
-
18:32–20:04अमृत कालउत्तराफाल्गुनी में
- 00:13–01:46 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:20–04:53 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:53–06:26 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:47–05:36 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:26–07:53शुभयमगण्ड में
- 07:53–09:19रोगअशुभ
- 09:19–10:46उद्वेगअशुभ
- 10:46–12:13चरसामान्य
- 12:13–13:40लाभशुभ
- 13:40–15:06अमृतराहु काल में
- 15:06–16:33कालअशुभ
- 16:33–18:00शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:00–19:33अमृतशुभ
- 19:33–21:06चरसामान्य
- 21:06–22:40रोगअशुभ
- 22:40–00:13 शुक्रकालअशुभ
- 00:13–01:46 शुक्रलाभशुभ
- 01:46–03:20 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:20–04:53 शुक्रशुभ
- 04:53–06:26 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 24 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:46–05:36, शुभ
- शुभ, 06:26–07:53
- रोग, अशुभ, 07:53–09:19
- उद्वेग, अशुभ, 09:19–10:46
- चर, सामान्य, 10:46–12:13
- लाभ, शुभ, 12:13–13:40
- अमृत, शुभ, 13:40–15:06
- काल, अशुभ, 15:06–16:33
- शुभ, 16:33–18:00
- अमृत, शुभ, 18:00–19:33
- चर, सामान्य, 19:33–21:06
- रोग, अशुभ, 21:06–22:40
- काल, अशुभ, 22:40–00:13 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:13–01:46 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:46–03:20 शुक्र
- शुभ, 03:20–04:53 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:53–06:26 शुक्र
- यमगण्ड, 06:26–07:53, अशुभ
- गुलिक काल, 09:19–10:46, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:17–11:03, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:50–12:36, शुभ
- राहु काल, 13:40–15:06, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:55–15:41, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:47–05:36 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में धनतेरस गुरु 24 अक्टूबर को क्यों है?
धनतेरस गुरु 24 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी गुरु 24 अक्टूबर को 09:06 से शुक्र 25 अक्टूबर को 07:10 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (18:00–20:29) उसके भीतर है। धनतेरस का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
धनतेरस पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 18:00–20:29। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 19:17 से 20:29 तक उदित रहता है।
Pāthardi में प्रदोष व्रत गुरु 24 अक्टूबर को क्यों है?
प्रदोष व्रत गुरु 24 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी गुरु 24 अक्टूबर को 09:06 से शुक्र 25 अक्टूबर को 07:10 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (18:00–20:29) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
गुरु 24 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 322.6° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:26। एकादशी उससे पहले 10:20 बुध पर समाप्त हुई। द्वादशी 09:06 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 11 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 24 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:46–05:36
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:46–05:36।
बुध 23 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:00 बुध से सूर्योदय 06:26 तक थी, 12 घं 26 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 24 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:50–12:36
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:50–12:36।
गुरु 24 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:17–11:03
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:17–11:03 और 14:55–15:41।
गुरु 24 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:55–15:41
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:17–11:03 और 14:55–15:41।
यहाँ दिन, 06:26 से 18:00, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 46 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:17–11:03 और 14:55–15:41।
गुरु 24 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:26–07:53 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:26 से 18:00, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:00 से 06:26 शुक्र, 1 घं 33 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 24 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 13:40–15:06
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:40–15:06।
गुरु 24 अक्टूबर को यमगंड कब है? 06:26–07:53
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:26–07:53।
गुरु 24 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 09:19–10:46
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:19–10:46।
यहाँ दिन 06:26 से 18:00 तक है, 11 घं 34 मि। इसे 1 घं 26 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 24 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:26
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:26, सूर्यास्त 18:00, 11 घं 34 मि का दिन।
गुरु 24 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:00
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:26, सूर्यास्त 18:00, 11 घं 34 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 34 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 26 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 34 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 26 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 24 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 148.9° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 146°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 01:25 शुक्र को निकलेगा, हस्त में।
गुरु 24 अक्टूबर को कौन सा योग है? इन्द्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 335.3° थे: इन्द्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 186.4° + 148.9° = 335.3°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 333°20′–346°40′ छब्बीसवाँ है, इन्द्र। यह 00:38 शुक्र को समाप्त होता है, फिर वैधृति।
गुरु 24 अक्टूबर को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 322.6° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 21:48 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 09:06 तक है।
गुरु 24 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:26, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:26 से 06:26 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 24 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 27 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 27 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
गुरु 24 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 27 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
गुरु 24 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 3 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2030, 03:32 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 197.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 24 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:41 शुक्र
चंद्रमा यहाँ 04:41 शुक्र पर उदय होता है।
गुरु 24 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 15:59
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:59 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:41 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:59 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:41 शुक्र पर उदय होगा।