Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग गुरु 4 जुलाई 2030
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
4 जुलाई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 4 जुलाई
- 04:29–05:12ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:55 से
- 05:55–07:35शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:07–13:00अभिजीत मुहूर्त
- 12:33–14:13लाभ चौघड़िया
- 14:13–15:52अमृत चौघड़ियाराहु काल में
-
16:44–18:25अमृत कालअश्लेशा में
- 17:31–19:11शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 19:11 के बाद
- 19:11–20:31अमृत चौघड़िया
- 00:33–01:54 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:15–04:35 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:35–05:56 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:30–05:13 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:55–07:35शुभयमगण्ड में
- 07:35–09:14रोगअशुभ
- 09:14–10:54उद्वेगअशुभ
- 10:54–12:33चरसामान्य
- 12:33–14:13लाभशुभ
- 14:13–15:52अमृतराहु काल में
- 15:52–17:31कालअशुभ
- 17:31–19:11शुभ
रात का चौघड़िया
- 19:11–20:31अमृतशुभ
- 20:31–21:52चरसामान्य
- 21:52–23:13रोगअशुभ
- 23:13–00:33 शुक्रकालअशुभ
- 00:33–01:54 शुक्रलाभशुभ
- 01:54–03:15 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:15–04:35 शुक्रशुभ
- 04:35–05:56 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 4 जुलाई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:29–05:12, शुभ
- शुभ, 05:55–07:35
- रोग, अशुभ, 07:35–09:14
- उद्वेग, अशुभ, 09:14–10:54
- चर, सामान्य, 10:54–12:33
- लाभ, शुभ, 12:33–14:13
- अमृत, शुभ, 14:13–15:52
- काल, अशुभ, 15:52–17:31
- शुभ, 17:31–19:11
- अमृत, शुभ, 19:11–20:31
- चर, सामान्य, 20:31–21:52
- रोग, अशुभ, 21:52–23:13
- काल, अशुभ, 23:13–00:33 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:33–01:54 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:54–03:15 शुक्र
- शुभ, 03:15–04:35 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:35–05:56 शुक्र
- यमगण्ड, 05:55–07:35, अशुभ
- गुलिक काल, 09:14–10:54, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:21–11:14, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:07–13:00, शुभ
- राहु काल, 14:13–15:52, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:39–16:32, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:30–05:13 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 4 जुलाई को कौन सी तिथि है? शुक्ल तृतीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 35.5° आगे था: शुक्ल तृतीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 24°–36° तीसरी है, शुक्ल तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:55। द्वितीया उससे पहले 06:03 बुध पर समाप्त हुई। तृतीया 06:52 को समाप्त होगी, जब बढ़त 36° होगी। बढ़त 1 जुलाई की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
गुरु 4 जुलाई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:29–05:12
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:29–05:12।
बुध 3 जुलाई की रात सूर्यास्त 19:11 बुध से सूर्योदय 05:55 तक थी, 10 घं 44 मि। इसे 42 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 4 जुलाई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:07–13:00
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:07–13:00।
गुरु 4 जुलाई को दुर्मुहूर्त कब है? 10:21–11:14
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:21–11:14 और 15:39–16:32।
गुरु 4 जुलाई को दुर्मुहूर्त कब है? 15:39–16:32
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:21–11:14 और 15:39–16:32।
यहाँ दिन, 05:55 से 19:11, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 53 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:21–11:14 और 15:39–16:32।
गुरु 4 जुलाई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:55–07:35 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:55 से 19:11, 1 घं 39 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:11 से 05:56 शुक्र, 1 घं 20 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 4 जुलाई को राहुकाल कब है? 14:13–15:52
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:13–15:52।
गुरु 4 जुलाई को यमगंड कब है? 05:55–07:35
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:55–07:35।
गुरु 4 जुलाई को गुलिक काल कब है? 09:14–10:54
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:14–10:54।
यहाँ दिन 05:55 से 19:11 तक है, 13 घं 16 मि। इसे 1 घं 39 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 4 जुलाई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:55
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:55, सूर्यास्त 19:11, 13 घं 16 मि का दिन।
गुरु 4 जुलाई को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:11
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:55, सूर्यास्त 19:11, 13 घं 16 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 16 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 45 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 16 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 45 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 4 जुलाई को कौन सा नक्षत्र है? अश्लेशा
सूर्योदय पर चंद्रमा 113.4° पर था: अश्लेशा, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अश्लेशा 106°40′–120°00′ तक है; चंद्रमा 113°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 18:25 को निकलेगा, मघा में।
गुरु 4 जुलाई को कौन सा योग है? वज्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 191.2° थे: वज्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 77.8° + 113.4° = 191.2°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 186°40′–200°00′ पंद्रहवाँ है, वज्र। यह 21:21 को समाप्त होता है, फिर सिद्धि।
गुरु 4 जुलाई को कौन सा करण है? गर
सूर्योदय पर बढ़त 35.5° थी: तृतीया का दूसरा आधा, गर।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा तैतिल है और दूसरा गर। तैतिल 18:31 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 30° हुई; गर 06:52 तक है।
गुरु 4 जुलाई को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:55, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:55 से 05:56 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 4 जुलाई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आषाढ़
यह मास 1 जुलाई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मिथुन में था: आषाढ़।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मिथुन से आषाढ़। सूर्य 17 जुलाई को, मास के भीतर, कर्क में जाता है। अगली अमावस्या, 30 जुलाई, उसे कर्क में पाती है और श्रावण शुरू करती है।
गुरु 4 जुलाई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आषाढ़
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष आषाढ़ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 1 जुलाई की अमावस्या ने, सूर्य मिथुन में, आषाढ़ शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में आषाढ़ है।
गुरु 4 जुलाई को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 3 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2030, 03:32 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 88.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 4 जुलाई को चंद्रोदय कितने बजे है? 08:46
चंद्रमा यहाँ 08:46 पर उदय होता है।
गुरु 4 जुलाई को चंद्रास्त कितने बजे है? 21:35
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:46 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 21:35 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:46 पर उदय हुआ; वह फिर 21:35 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।