Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग मंगल 3 अप्रैल 2029
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
3 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, मंगल 3 अप्रैल
- 04:48–05:34ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:21 से
- 10:59–12:32लाभ चौघड़िया
- 12:07–12:32अभिजीत मुहूर्तगुलिक काल छोड़कर
- 12:32–14:05अमृत चौघड़ियागुलिक काल में
- 15:38–17:10शुभ चौघड़ियाराहु काल में
- सूर्यास्त 18:43 के बाद
- 20:10–21:37लाभ चौघड़िया
- 23:05–23:22शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:08–00:32 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:32–01:59 बुधअमृत चौघड़िया
-
01:03–02:35 बुधअमृत कालज्येष्ठा में
- 04:47–05:34 बुधअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:21–07:54रोगअशुभ
- 07:54–09:27उद्वेगअशुभ
- 09:27–10:59चरसामान्य
- 10:59–12:32लाभशुभ
- 12:32–14:05अमृतगुलिक काल में
- 14:05–15:38कालअशुभ
- 15:38–17:10शुभराहु काल में
- 17:10–18:43रोगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:43–20:10कालअशुभ
- 20:10–21:37लाभशुभ
- 21:37–23:05उद्वेगअशुभ
- 23:05–00:32 बुधशुभ
- 00:32–01:59 बुधअमृतशुभ
- 01:59–03:26 बुधचरसामान्य
- 03:26–04:53 बुधरोगअशुभ
- 04:53–06:20 बुधकालअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, मंगल 3 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:48–05:34, शुभ
- रोग, अशुभ, 06:21–07:54
- उद्वेग, अशुभ, 07:54–09:27
- चर, सामान्य, 09:27–10:59
- लाभ, शुभ, 10:59–12:32
- अमृत, शुभ, 12:32–14:05
- काल, अशुभ, 14:05–15:38
- शुभ, 15:38–17:10
- रोग, अशुभ, 17:10–18:43
- काल, अशुभ, 18:43–20:10
- लाभ, शुभ, 20:10–21:37
- उद्वेग, अशुभ, 21:37–23:05
- शुभ, 23:05–00:32 बुध
- अमृत, शुभ, 00:32–01:59 बुध
- चर, सामान्य, 01:59–03:26 बुध
- रोग, अशुभ, 03:26–04:53 बुध
- काल, अशुभ, 04:53–06:20 बुध
- दुर्मुहूर्त, 08:49–09:39, अशुभ
- यमगण्ड, 09:27–10:59, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:07–12:57, शुभ
- गुलिक काल, 12:32–14:05, अशुभ
- राहु काल, 15:38–17:10, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 23:22–00:08 बुध, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:47–05:34 बुध
हर मान कैसे निकलता है
मंगल 3 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण पञ्चमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 235° आगे था: कृष्ण पञ्चमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 228°–240° बीसवीं है, कृष्ण पञ्चमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:21। चतुर्थी उससे पहले 17:49 सोम पर समाप्त हुई। पञ्चमी 15:34 को समाप्त होगी, जब बढ़त 240° होगी। बढ़त 30 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
मंगल 3 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:48–05:34
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:48–05:34।
सोम 2 अप्रैल की रात सूर्यास्त 18:43 सोम से सूर्योदय 06:21 तक थी, 11 घं 38 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
मंगल 3 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:07–12:57
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:07–12:57।
मंगल 3 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 08:49–09:39
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 08:49–09:39, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:22–00:08 बुध।
मंगल 3 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 23:22–00:08 बुध
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 08:49–09:39, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:22–00:08 बुध।
यहाँ दिन, 06:21 से 18:43, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 08:49–09:39 और 23:22–00:08 बुध।
मंगल 3 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:21–07:54 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:21 से 18:43, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:43 से 06:20 बुध, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
मंगल 3 अप्रैल को राहुकाल कब है? 15:38–17:10
राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:38–17:10।
मंगल 3 अप्रैल को यमगंड कब है? 09:27–10:59
यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:27–10:59।
मंगल 3 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 12:32–14:05
गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:32–14:05।
यहाँ दिन 06:21 से 18:43 तक है, 12 घं 22 मि। इसे 1 घं 32 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगल 3 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:21
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:21, सूर्यास्त 18:43, 12 घं 22 मि का दिन।
मंगल 3 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:43
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:21, सूर्यास्त 18:43, 12 घं 22 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 22 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 37 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 22 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 37 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
मंगल 3 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? अनुराधा
सूर्योदय पर चंद्रमा 224.2° पर था: अनुराधा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अनुराधा 213°20′–226°40′ तक है; चंद्रमा 223°20′ पर उसके पद 4 में आया। वह 10:27 को निकलेगा, ज्येष्ठा में।
मंगल 3 अप्रैल को कौन सा योग है? व्यतीपात
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 573.5° थे, एक चक्कर और 213.5°: व्यतीपात।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 349.3° + 224.2° = 573.5°, एक पूरा चक्कर और 213.5°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 213°20′–226°40′ सत्रहवाँ है, व्यतीपात। यह 03:24 बुध को समाप्त होता है, फिर वरीयान्।
मंगल 3 अप्रैल को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 235° थी: पञ्चमी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पञ्चमी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 04:36 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 234° हुई; तैतिल 15:34 तक है।
मंगल 3 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार
यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 06:21, पर शुरू हुआ: मंगलवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:21 से 06:20 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।
मंगल 3 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र (अधिक)
15 मार्च और 14 अप्रैल की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक चैत्र।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 15 मार्च 09:49 गुरु से 14 अप्रैल 03:10 शनि तक सूर्य मीन में रहा; मेष में वह अमावस्या के बाद 14 अप्रैल 03:54 शनि को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक चैत्र है, जो चैत्र से पहले आता है।
मंगल 3 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र (अधिक) है, और अमान्त गणना में चैत्र (अधिक)।
मंगल 3 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2086 · शक 1951
विक्रम संवत 2086 15 मार्च 2029 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 2029, 09:49 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 18.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2086 गिनता है; शक संवत 1951।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
मंगल 3 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 23:26
चंद्रमा यहाँ 23:26 पर उदय होता है।
मंगल 3 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 09:38
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:38 पर अस्त हुआ; वह फिर 23:26 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:38 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 23:26 पर उदय होगा।