tithika
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Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग गुरु 4 नवंबर 2021

महाराष्ट्र, भारत

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में

अमावस्या

कृष्ण पक्ष · 02:44 शुक्र तक

फिर प्रतिपदा · 23:15 शुक्र तक

त्योहार

दीवाली · लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
18:33⁠–⁠20:25
प्रदोष काल 17:54⁠–⁠20:25

दीवाली · लक्ष्मी पूजा गुरु 4 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं। गुरु 4 नवंबर क्यों?

दीवाली: Pāthardi में हर तारीख़

त्योहार

नरक चतुर्दशी

अभ्यंग स्नान मुहूर्त
04:55⁠–⁠06:31
अरुणोदय 04:55⁠–⁠06:31

नरक चतुर्दशी गुरु 4 नवंबर को है: उस सुबह चतुर्दशी अरुणोदय को छूती है, और किसी सुबह नहीं। गुरु 4 नवंबर क्यों?

नरक चतुर्दशी: Pāthardi में हर तारीख़

व्रत

अमावस्या

अमावस्या गुरु 4 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। गुरु 4 नवंबर क्यों?

अमावस्या: Pāthardi में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

04:50 06:31 17:54अगला सूर्योदय 06:31 शुक्र

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 06:31–07:56शुभयमगण्ड में
  • 07:56–09:21रोगअशुभ
  • 09:21–10:47उद्वेगअशुभ
  • 10:47–12:12चरसामान्य
  • 12:12–13:38लाभशुभ
  • 13:38–15:03अमृतराहु काल में
  • 15:03–16:28कालअशुभ
  • 16:28–17:54शुभ

रात का चौघड़िया

  • 17:54–19:28अमृतशुभ
  • 19:28–21:03चरसामान्य
  • 21:03–22:38रोगअशुभ
  • 22:38–00:12 शुक्रकालअशुभ
  • 00:12–01:47 शुक्रलाभशुभ
  • 01:47–03:22 शुक्रउद्वेगअशुभ
  • 03:22–04:56 शुक्रशुभ
  • 04:56–06:31 शुक्रअमृतशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, गुरु 4 नवंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:50–05:40, शुभ
  • शुभ, 06:31–07:56
  • रोग, अशुभ, 07:56–09:21
  • उद्वेग, अशुभ, 09:21–10:47
  • चर, सामान्य, 10:47–12:12
  • लाभ, शुभ, 12:12–13:38
  • अमृत, शुभ, 13:38–15:03
  • काल, अशुभ, 15:03–16:28
  • शुभ, 16:28–17:54
  • अमृत, शुभ, 17:54–19:28
  • चर, सामान्य, 19:28–21:03
  • रोग, अशुभ, 21:03–22:38
  • काल, अशुभ, 22:38–00:12 शुक्र
  • लाभ, शुभ, 00:12–01:47 शुक्र
  • उद्वेग, अशुभ, 01:47–03:22 शुक्र
  • शुभ, 03:22–04:56 शुक्र
  • अमृत, शुभ, 04:56–06:31 शुक्र
  • यमगण्ड, 06:31–07:56, अशुभ
  • गुलिक काल, 09:21–10:47, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 10:18–11:04, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 11:49–12:35, शुभ
  • राहु काल, 13:38–15:03, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 14:52–15:37, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:50–05:41 शुक्र

हर मान कैसे निकलता है

Pāthardi में दीवाली गुरु 4 नवंबर को क्यों है?

दीवाली · लक्ष्मी पूजा गुरु 4 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं।

चतुर्दशी 16:00 18:00 20:00 22:00 बुध 3 नवंबर प्रदोष काल 17:54–20:25
चतुर्दशी 16:00 18:00 20:00 22:00 बुध 3 नवंबर प्रदोष काल 17:54–20:25
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या गुरु 4 नवंबर को 06:03 से शुक्र 5 नवंबर को 02:44 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (17:54–20:25) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:54–20:25। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 18:33 से 20:25 तक उदित रहता है।

दीवाली: Pāthardi में हर तारीख़

Pāthardi में नरक चतुर्दशी गुरु 4 नवंबर को क्यों है?

नरक चतुर्दशी गुरु 4 नवंबर को है: उस सुबह चतुर्दशी अरुणोदय को छूती है, और किसी सुबह नहीं।

त्रयोदशी 06:30 03:00 04:00 05:00 06:00 07:00 08:00 बुध 3 नवंबर अरुणोदय 04:54–06:30
त्रयोदशी 06:30 03:00 05:00 07:00 बुध 3 नवंबर अरुणोदय 04:54–06:30
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

अभ्यंग स्नान अरुणोदय में होता है, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। चतुर्दशी बुध 3 नवंबर को 09:02 से गुरु 4 नवंबर को 06:03 तक है, इसलिए वह केवल गुरुवार के अरुणोदय (04:55–06:31) को छूती है। नरक चतुर्दशी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अरुणोदय Tithika की परिपाटी है।

नरक चतुर्दशी: Pāthardi में हर तारीख़

Pāthardi में अमावस्या गुरु 4 नवंबर को क्यों है?

अमावस्या गुरु 4 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।

चतुर्दशी अमावस्या 06:03 05:00 07:00 08:00 गुरु 4 नवंबर स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 06:31
चतुर्दशी अमावस्या 06:03 05:00 07:00 08:00 गुरु 4 नवंबर स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 06:31
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्योदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या गुरु 4 नवंबर को 06:03 से शुक्र 5 नवंबर को 02:44 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 4 नवंबर के सूर्योदय (06:31) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।

अमावस्या: Pāthardi में हर तारीख़

गुरु 4 नवंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 348.3° आगे था: कृष्ण अमावस्या।

सूर्य अमावस्या 0° 348.3° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल अमावस्या 348°–360° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 348.3° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल अमावस्या 348°–360° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:31। चतुर्दशी उससे पहले 06:03 पर समाप्त हुई। अमावस्या 02:44 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 20 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

गुरु 4 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:50–05:40

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:50–05:40।

सूर्यास्त 17:54 बुध सूर्योदय 06:31 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 3 नवंबर का दिन 14 1
सूर्यास्त 17:54 बुध सूर्योदय 06:31 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 3 नवंबर का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · बुधवार का दिन धुँधला

बुध 3 नवंबर की रात सूर्यास्त 17:54 बुध से सूर्योदय 06:31 तक थी, 12 घं 37 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

गुरु 4 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:49–12:35

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:49–12:35।

गुरु 4 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:18–11:04

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:18–11:04 और 14:52–15:37।

गुरु 4 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:52–15:37

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:18–11:04 और 14:52–15:37।

सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 12 1
सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 6, 12

यहाँ दिन, 06:31 से 17:54, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:18–11:04 और 14:52–15:37।

गुरु 4 नवंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

06:31–07:56 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।

सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 06:31 से 17:54, 1 घं 25 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 17:54 से 06:31 शुक्र, 1 घं 34 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

गुरु 4 नवंबर को राहुकाल कब है? 13:38–15:03

राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:38–15:03।

गुरु 4 नवंबर को यमगंड कब है? 06:31–07:56

यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:31–07:56।

गुरु 4 नवंबर को गुलिक काल कब है? 09:21–10:47

गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:21–10:47।

सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 1, गुलिक काल 3

यहाँ दिन 06:31 से 17:54 तक है, 11 घं 23 मि। इसे 1 घं 25 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

गुरु 4 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:31

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:31, सूर्यास्त 17:54, 11 घं 23 मि का दिन।

गुरु 4 नवंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:54

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:31, सूर्यास्त 17:54, 11 घं 23 मि का दिन।

सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:37
सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:37
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 23 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 37 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 23 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 37 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

गुरु 4 नवंबर को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा

सूर्योदय पर चंद्रमा 185.9° पर था: चित्रा, पद 4।

चंद्रमा सूर्य 0° चित्रा चंद्रमा 185.9° अगला: स्वाती पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° चित्रा चंद्रमा 185.9° अगला: स्वाती पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 183°20′ पर उसके पद 4 में आया। वह 07:42 को निकलेगा, स्वाती में।

गुरु 4 नवंबर को कौन सा योग है? प्रीति

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 383.6° थे, एक चक्कर और 23.6°: प्रीति।

सूर्य 197.7° + चंद्रमा 185.9° = 383.6° एक चक्कर + 23.6° प्रीति 13°20′–26°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 197.7° + चंद्रमा 185.9° = 383.6° एक चक्कर + 23.6° प्रीति 13°20′–26°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 197.7° + 185.9° = 383.6°, एक पूरा चक्कर और 23.6°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 13°20′–26°40′ दूसरा है, प्रीति। यह 11:09 को समाप्त होता है, फिर आयुष्मान्।

गुरु 4 नवंबर को कौन सा करण है? चतुष्पाद

सूर्योदय पर बढ़त 348.3° थी: अमावस्या का पहला आधा, चतुष्पाद।

सूर्य अमावस्या 0° 348.3° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल अमावस्या 348°–360° चतुष्पाद 348°–354° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 348.3° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल अमावस्या 348°–360° चतुष्पाद 348°–354° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 16:26 तक है, जब बढ़त 354° होगी; नाग 02:44 शुक्र तक।

गुरु 4 नवंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार

यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:31, पर शुरू हुआ: गुरुवार।

गुरुवार सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
गुरुवार सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:31 से 06:31 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।

गुरु 4 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन

यह मास 6 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।

1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 5 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।

गुरु 4 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।

अमान्त पूर्णिमान्त कार्तिक आश्विन कृष्ण शुक्ल गुरु 4 नवंबर अमावस्या 6 अक्टू॰ पूर्णिमा 20 अक्टू॰ अमावस्या 5 नव॰ पूर्णिमा 19 नव॰
अमान्त पूर्णिमान्त कार्तिक आश्विन कृष्ण शुक्ल गुरु 4 नवंबर अमावस्या 6 अक्टू॰ पूर्णिमा 20 अक्टू॰ अमावस्या 5 नव॰ पूर्णिमा 19 नव॰
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 5 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।

गुरु 4 नवंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2078 · शक 1943

विक्रम संवत 2078 12 अप्रैल 2021 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 12 अप्रैल 2021 08:00 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 4 नवंबर सूर्य 197.7° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 12 अप्रैल 2021 08:00 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 4 नवंबर सूर्य 197.7° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 12 अप्रैल 2021, 08:00 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 199.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2078 गिनता है; शक संवत 1943।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

गुरु 4 नवंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:37

चंद्रमा यहाँ 17:37 पर अस्त होता है।

सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:37
सूर्योदय 06:31 सूर्यास्त 17:54 सूर्योदय 06:31 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:37
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।

चंद्रमा 17:37 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।