Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग गुरु 1 मार्च 2018
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
त्योहार
होलिका दहन
होलिका दहन गुरु 1 मार्च को है, भद्रा समाप्त होने (19:37) के बाद। गुरु 1 मार्च क्यों?
होलिका दहन: Pāthardi में हर तारीख़व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। गुरु 1 मार्च क्यों?
पूर्णिमा: Pāthardi में हर तारीख़1 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 1 मार्च
- 05:10–05:59ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:48 से
- 06:48–08:17शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:18–13:05अभिजीत मुहूर्त
- 12:41–14:09लाभ चौघड़िया
- 14:09–15:38अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 17:06–18:34शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:34 के बाद
- 18:34–20:06अमृत चौघड़िया
-
21:34–23:03अमृत कालमघा में
- 00:41–02:13 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:44–05:16 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:16–06:48 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 05:10–05:59 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:48–08:17शुभयमगण्ड में
- 08:17–09:45रोगअशुभ
- 09:45–11:13उद्वेगअशुभ
- 11:13–12:41चरसामान्य
- 12:41–14:09लाभशुभ
- 14:09–15:38अमृतराहु काल में
- 15:38–17:06कालअशुभ
- 17:06–18:34शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:34–20:06अमृतशुभ
- 20:06–21:37चरसामान्य
- 21:37–23:09रोगअशुभ
- 23:09–00:41 शुक्रकालअशुभ
- 00:41–02:13 शुक्रलाभशुभ
- 02:13–03:44 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:44–05:16 शुक्रशुभ
- 05:16–06:48 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 1 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:10–05:59, शुभ
- शुभ, 06:48–08:17
- रोग, अशुभ, 08:17–09:45
- उद्वेग, अशुभ, 09:45–11:13
- चर, सामान्य, 11:13–12:41
- लाभ, शुभ, 12:41–14:09
- अमृत, शुभ, 14:09–15:38
- काल, अशुभ, 15:38–17:06
- शुभ, 17:06–18:34
- अमृत, शुभ, 18:34–20:06
- चर, सामान्य, 20:06–21:37
- रोग, अशुभ, 21:37–23:09
- काल, अशुभ, 23:09–00:41 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:41–02:13 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:13–03:44 शुक्र
- शुभ, 03:44–05:16 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:16–06:48 शुक्र
- यमगण्ड, 06:48–08:17, अशुभ
- गुलिक काल, 09:45–11:13, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:44–11:31, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:18–13:05, शुभ
- राहु काल, 14:09–15:38, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:26–16:13, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:10–05:59 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में होलिका दहन गुरु 1 मार्च को क्यों है?
होलिका दहन गुरु 1 मार्च को है, भद्रा समाप्त होने (19:37) के बाद।
होलिका दहन प्रदोष काल में, भद्रा के बाहर, होता है: सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को 08:57 से शुक्र 2 मार्च को 06:21 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (18:34–21:01) उसके भीतर है। भद्रा 19:37 तक है, और धर्मसिंधु विधि भद्रा में नहीं करवाता: यह 19:37 से होती है।
होलिका दहन मुहूर्त: भद्रा के बाद का समय, 19:37–21:01।
Pāthardi में पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को क्यों है?
पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 1 मार्च को 08:57 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और शुक्र 2 मार्च को 06:21 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 1 मार्च। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 1 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 166.8° आगे था: शुक्ल चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 156°–168° चौदहवीं है, शुक्ल चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:48। त्रयोदशी उससे पहले 11:46 बुध पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 08:57 को समाप्त होगी, जब बढ़त 168° होगी। बढ़त 16 फ़रवरी की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
पूर्णिमा क्षय क्यों है?
पूर्णिमा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन पूर्णिमा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। पूर्णिमा 08:57 को शुरू हुई और 06:21 शुक्र को समाप्त, 06:48 और 06:48 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को चतुर्दशी है और शुक्रवार को प्रतिपदा: पूर्णिमा यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 1 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:10–05:59
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:10–05:59।
बुध 28 फ़रवरी की रात सूर्यास्त 18:34 बुध से सूर्योदय 06:48 तक थी, 12 घं 14 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 1 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:18–13:05
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:18–13:05।
गुरु 1 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 10:44–11:31
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:44–11:31 और 15:26–16:13।
गुरु 1 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 15:26–16:13
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:44–11:31 और 15:26–16:13।
यहाँ दिन, 06:48 से 18:34, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:44–11:31 और 15:26–16:13।
गुरु 1 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:48–08:17 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:48 से 18:34, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:34 से 06:48 शुक्र, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 1 मार्च को राहुकाल कब है? 14:09–15:38
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:09–15:38।
गुरु 1 मार्च को यमगंड कब है? 06:48–08:17
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:48–08:17।
गुरु 1 मार्च को गुलिक काल कब है? 09:45–11:13
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:45–11:13।
यहाँ दिन 06:48 से 18:34 तक है, 11 घं 46 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 1 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:48
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:48, सूर्यास्त 18:34, 11 घं 46 मि का दिन।
गुरु 1 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:34
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:48, सूर्यास्त 18:34, 11 घं 46 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 46 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 46 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 1 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? मघा
सूर्योदय पर चंद्रमा 123.1° पर था: मघा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मघा 120°00′–133°20′ तक है; चंद्रमा 120° पर उसके पद 1 में आया। वह 23:47 को निकलेगा, पूर्वाफाल्गुनी में।
गुरु 1 मार्च को कौन सा योग है? अतिगण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 439.4° थे, एक चक्कर और 79.4°: अतिगण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 316.3° + 123.1° = 439.4°, एक पूरा चक्कर और 79.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 66°40′–80°00′ छठा है, अतिगण्ड। यह 07:47 को समाप्त होता है, फिर सुकर्मा।
गुरु 1 मार्च को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 166.8° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 22:21 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 162° हुई; वणिज 08:57 तक है।
गुरु 1 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:48, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:48 से 06:48 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 1 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 16 फ़रवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 17 मार्च, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
गुरु 1 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 16 फ़रवरी की अमावस्या ने, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में फाल्गुन है।
गुरु 1 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2074 · शक 1939
विक्रम संवत 2074 28 मार्च 2017 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 28 मार्च 2017, 08:27 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 332.8° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2074 गिनता है; शक संवत 1939।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 1 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:02
चंद्रमा यहाँ 18:02 पर उदय होता है।
चंद्रमा 18:02 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।