Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग शनि 14 अक्टूबर 1967
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
1970 से पहले के समय UTC+5:30 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
व्रत
पापांकुशा एकादशी
पापांकुशा एकादशी शनि 14 अक्टूबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है। शनि 14 अक्टूबर क्यों?
पापांकुशा एकादशी: Pāthardi में हर तारीख़14 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 14 अक्टूबर
- 04:44–05:33ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:22 से
- 07:56–09:19शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:51–12:38अभिजीत मुहूर्त
- 13:43–15:11लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:11–16:39अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:07 के बाद
- 18:07–19:39लाभ चौघड़िया
- 21:11–22:43शुभ चौघड़िया
-
21:33–23:17अमृत कालशतभिषा में
- 22:43–00:15 रविअमृत चौघड़िया
- 04:51–06:23 रविलाभ चौघड़िया
- 04:45–05:34 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:22–07:50कालअशुभ
- 07:50–09:19शुभ
- 09:19–10:47रोगअशुभ
- 10:47–12:15उद्वेगअशुभ
- 12:15–13:43चरसामान्य
- 13:43–15:11लाभयमगण्ड में
- 15:11–16:39अमृतशुभ
- 16:39–18:07कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:07–19:39लाभशुभ
- 19:39–21:11उद्वेगअशुभ
- 21:11–22:43शुभ
- 22:43–00:15 रविअमृतशुभ
- 00:15–01:47 रविचरसामान्य
- 01:47–03:19 रविरोगअशुभ
- 03:19–04:51 रविकालअशुभ
- 04:51–06:23 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 14 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:44–05:33, शुभ
- काल, अशुभ, 06:22–07:50
- शुभ, 07:50–09:19
- रोग, अशुभ, 09:19–10:47
- उद्वेग, अशुभ, 10:47–12:15
- चर, सामान्य, 12:15–13:43
- लाभ, शुभ, 13:43–15:11
- अमृत, शुभ, 15:11–16:39
- काल, अशुभ, 16:39–18:07
- लाभ, शुभ, 18:07–19:39
- उद्वेग, अशुभ, 19:39–21:11
- शुभ, 21:11–22:43
- अमृत, शुभ, 22:43–00:15 रवि
- चर, सामान्य, 00:15–01:47 रवि
- रोग, अशुभ, 01:47–03:19 रवि
- काल, अशुभ, 03:19–04:51 रवि
- लाभ, शुभ, 04:51–06:23 रवि
- गुलिक काल, 06:22–07:50, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:22–07:09, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:09–07:56, अशुभ
- राहु काल, 09:19–10:47, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:51–12:38, शुभ
- यमगण्ड, 13:43–15:11, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:45–05:34 रवि
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में पापांकुशा एकादशी शनि 14 अक्टूबर को क्यों है?
पापांकुशा एकादशी शनि 14 अक्टूबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 13 अक्टूबर को 06:22 और शनि 14 अक्टूबर को 06:22। एकादशी (शुक्र 13 अक्टूबर 05:54 से शनि 14 अक्टूबर 07:03 तक) और द्वादशी (शनि 14 अक्टूबर 07:03 से रवि 15 अक्टूबर 08:42 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 14 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 13 अक्टूबर को दशमी 05:54 तक है, उसके भीतर (04:46–06:22); शनि 14 अक्टूबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
शनि 14 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल एकादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 131.7° आगे था: शुक्ल एकादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 120°–132° ग्यारहवीं है, शुक्ल एकादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:22। दशमी उससे पहले 05:54 शुक्र पर समाप्त हुई। एकादशी 07:03 को समाप्त होगी, जब बढ़त 132° होगी। बढ़त 4 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
एकादशी दो सूर्योदयों पर क्यों है?
एकादशी यहाँ शुक्र 13 और शनि 14 अक्टूबर दोनों के सूर्योदय पर है।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। एकादशी 05:54 शुक्र को, सूर्योदय 06:22 शुक्र से पहले, शुरू हुई और 07:03 को, अगले सूर्योदय 06:22 के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन एकादशी है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।
शनि 14 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:44–05:33
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:44–05:33।
शुक्र 13 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:08 शुक्र से सूर्योदय 06:22 तक थी, 12 घं 14 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 14 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:51–12:38
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:51–12:38।
शनि 14 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 06:22–07:09
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:22–07:09 और 07:09–07:56।
शनि 14 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:09–07:56
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:22–07:09 और 07:09–07:56।
यहाँ दिन, 06:22 से 18:07, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:22–07:09 और 07:09–07:56।
शनि 14 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:22–07:50 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:22 से 18:07, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:07 से 06:23 रवि, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 14 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 09:19–10:47
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:19–10:47।
शनि 14 अक्टूबर को यमगंड कब है? 13:43–15:11
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:43–15:11।
शनि 14 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 06:22–07:50
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:22–07:50।
यहाँ दिन 06:22 से 18:07 तक है, 11 घं 45 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 14 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:22
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:22, सूर्यास्त 18:07, 11 घं 45 मि का दिन।
शनि 14 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:07
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:22, सूर्यास्त 18:07, 11 घं 45 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 14 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? शतभिषा
सूर्योदय पर चंद्रमा 308.3° पर था: शतभिषा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। शतभिषा 306°40′–320°00′ तक है; चंद्रमा 306°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 05:23 रवि को निकलेगा, पूर्व भाद्रपद में।
शनि 14 अक्टूबर को कौन सा योग है? गण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 484.9° थे, एक चक्कर और 124.9°: गण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 176.6° + 308.3° = 484.9°, एक पूरा चक्कर और 124.9°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 120°00′–133°20′ दसवाँ है, गण्ड। यह 21:43 को समाप्त होता है, फिर वृद्धि।
शनि 14 अक्टूबर को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 131.7° थी: एकादशी का दूसरा आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए एकादशी का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 18:24 शुक्र पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 126° हुई; विष्टि 07:03 तक है।
शनि 14 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:22, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:22 से 06:23 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 14 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 4 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 2 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
शनि 14 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 4 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में आश्विन है।
शनि 14 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2024 · शक 1889
विक्रम संवत 2024 10 अप्रैल 1967 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 10 अप्रैल 1967, 03:50 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 180.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2024 गिनता है; शक संवत 1889।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 14 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 15:58
चंद्रमा यहाँ 15:58 पर उदय होता है।
शनि 14 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 03:44 रवि
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:58 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 03:44 रवि पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:58 पर उदय हुआ; वह फिर 03:44 रवि पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।