Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग मंगल 10 अप्रैल 1945
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+6:30 में
1970 से पहले के समय UTC+6:30 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत मंगल 10 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। मंगल 10 अप्रैल क्यों?
प्रदोष व्रत: Pāthardi में हर तारीख़व्रत
मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि मंगल 10 अप्रैल को है: चतुर्दशी किसी भी रात निशीथ काल को नहीं छूती, और पहला दिन लिया जाता है। मंगल 10 अप्रैल क्यों?
मासिक शिवरात्रि: Pāthardi में हर तारीख़व्रत का पारण
परमा एकादशी
10 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, मंगल 10 अप्रैल
- 05:44–06:30ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:16 से
- 11:57–13:30लाभ चौघड़िया
- 13:05–13:30अभिजीत मुहूर्तगुलिक काल छोड़कर
- 13:30–15:04अमृत चौघड़ियागुलिक काल में
- 16:38–18:11शुभ चौघड़ियाराहु काल में
-
19:21–20:46अमृत कालपूर्व भाद्रपद में
- सूर्यास्त 19:45 के बाद
- 21:11–22:37लाभ चौघड़िया
- 00:04–00:21 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 01:07–01:30 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 01:30–02:56 बुधअमृत चौघड़िया
- 05:43–06:29 बुधअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:16–08:49रोगअशुभ
- 08:49–10:23उद्वेगअशुभ
- 10:23–11:57चरसामान्य
- 11:57–13:30लाभशुभ
- 13:30–15:04अमृतगुलिक काल में
- 15:04–16:38कालअशुभ
- 16:38–18:11शुभराहु काल में
- 18:11–19:45रोगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:45–21:11कालअशुभ
- 21:11–22:37लाभशुभ
- 22:37–00:04 बुधउद्वेगअशुभ
- 00:04–01:30 बुधशुभ
- 01:30–02:56 बुधअमृतशुभ
- 02:56–04:22 बुधचरसामान्य
- 04:22–05:49 बुधरोगअशुभ
- 05:49–07:15 बुधकालअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, मंगल 10 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 05:44–06:30, शुभ
- रोग, अशुभ, 07:16–08:49
- उद्वेग, अशुभ, 08:49–10:23
- चर, सामान्य, 10:23–11:57
- लाभ, शुभ, 11:57–13:30
- अमृत, शुभ, 13:30–15:04
- काल, अशुभ, 15:04–16:38
- शुभ, 16:38–18:11
- रोग, अशुभ, 18:11–19:45
- काल, अशुभ, 19:45–21:11
- लाभ, शुभ, 21:11–22:37
- उद्वेग, अशुभ, 22:37–00:04 बुध
- शुभ, 00:04–01:30 बुध
- अमृत, शुभ, 01:30–02:56 बुध
- चर, सामान्य, 02:56–04:22 बुध
- रोग, अशुभ, 04:22–05:49 बुध
- काल, अशुभ, 05:49–07:15 बुध
- दुर्मुहूर्त, 09:46–10:36, अशुभ
- यमगण्ड, 10:23–11:57, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 13:05–13:55, शुभ
- गुलिक काल, 13:30–15:04, अशुभ
- राहु काल, 16:38–18:11, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 00:21–01:07 बुध, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:43–06:29 बुध
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में प्रदोष व्रत मंगल 10 अप्रैल को क्यों है?
प्रदोष व्रत मंगल 10 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी मंगल 10 अप्रैल को 06:10 से बुध 11 अप्रैल को 02:43 तक है, इसलिए केवल मंगलवार का प्रदोष काल (19:45–22:03) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
Pāthardi में मासिक शिवरात्रि मंगल 10 अप्रैल को क्यों है?
मासिक शिवरात्रि मंगल 10 अप्रैल को है: चतुर्दशी किसी भी रात निशीथ काल को नहीं छूती, और पहला दिन लिया जाता है।
शिव पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। चतुर्दशी बुध 11 अप्रैल को 02:43 से बुध 11 अप्रैल को 22:55 तक है, दोनों रात के निशीथ काल के बीच, किसी को नहीं छूती। तब निर्णयसिंधु पहला दिन लेता है: मंगल 10 अप्रैल। मासिक शिवरात्रि का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; निशीथ काल Tithika की परिपाटी है।
मंगल 10 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण त्रयोदशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 324.6° आगे था: कृष्ण त्रयोदशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 324°–336° अट्ठाईसवीं है, कृष्ण त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:16। द्वादशी उससे पहले 06:10 पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 02:43 बुध को समाप्त होगी, जब बढ़त 336° होगी। बढ़त 29 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
मंगल 10 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:44–06:30
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:44–06:30।
सोम 9 अप्रैल की रात सूर्यास्त 19:45 सोम से सूर्योदय 07:16 तक थी, 11 घं 31 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
मंगल 10 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:05–13:55
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:05–13:55।
मंगल 10 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 09:46–10:36
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:46–10:36, और रात के 15 में से सातवाँ, 00:21 बुध–01:07 बुध।
मंगल 10 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 00:21–01:07 बुध
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:46–10:36, और रात के 15 में से सातवाँ, 00:21 बुध–01:07 बुध।
यहाँ दिन, 07:16 से 19:45, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 09:46–10:36 और 00:21 बुध–01:07 बुध।
मंगल 10 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:16–08:49 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:16 से 19:45, 1 घं 33 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:45 से 07:15 बुध, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
मंगल 10 अप्रैल को राहुकाल कब है? 16:38–18:11
राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:38–18:11।
मंगल 10 अप्रैल को यमगंड कब है? 10:23–11:57
यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:23–11:57।
मंगल 10 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 13:30–15:04
गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:30–15:04।
यहाँ दिन 07:16 से 19:45 तक है, 12 घं 29 मि। इसे 1 घं 33 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगल 10 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 07:16
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:16, सूर्यास्त 19:45, 12 घं 29 मि का दिन।
मंगल 10 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:45
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:16, सूर्यास्त 19:45, 12 घं 29 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 29 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 30 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 29 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 30 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
मंगल 10 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? पूर्व भाद्रपद
सूर्योदय पर चंद्रमा 321.3° पर था: पूर्व भाद्रपद, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्व भाद्रपद 320°00′–333°20′ तक है; चंद्रमा 320° पर उसके पद 1 में आया। वह 02:27 बुध को निकलेगा, उत्तर भाद्रपद में।
मंगल 10 अप्रैल को कौन सा योग है? शुक्ल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 678° थे, एक चक्कर और 318°: शुक्ल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 356.7° + 321.3° = 678°, एक पूरा चक्कर और 318°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 306°40′–320°00′ चौबीसवाँ है, शुक्ल। यह 10:14 को समाप्त होता है, फिर ब्रह्म।
मंगल 10 अप्रैल को कौन सा करण है? गर
सूर्योदय पर बढ़त 324.6° थी: त्रयोदशी का पहला आधा, गर।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 16:30 तक है, जब बढ़त 330° होगी; वणिज 02:43 बुध तक।
मंगल 10 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार
यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 07:16, पर शुरू हुआ: मंगलवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:16 से 07:15 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।
मंगल 10 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र (अधिक)
14 मार्च और 12 अप्रैल की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक चैत्र।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 14 मार्च 10:20 बुध से 12 अप्रैल 18:59 गुरु तक सूर्य मीन में रहा; मेष में वह अमावस्या के बाद 13 अप्रैल 15:59 शुक्र को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक चैत्र है, जो चैत्र से पहले आता है।
मंगल 10 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 12 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र (अधिक) है, और अमान्त गणना में चैत्र (अधिक)।
मंगल 10 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2002 · शक 1867
विक्रम संवत 2002 14 मार्च 1945 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 14 मार्च 1945, 10:20 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 26.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2002 गिनता है; शक संवत 1867।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
मंगल 10 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:25 बुध
चंद्रमा यहाँ 06:25 बुध पर उदय होता है।
मंगल 10 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:37
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:37 पर अस्त हुआ; वह फिर 06:25 बुध पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:37 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 06:25 बुध पर उदय होगा।