tithika
English

Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग शनि 14 अक्टूबर 1944

महाराष्ट्र, भारत

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+6:30 में

1970 से पहले के समय UTC+6:30 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।

त्योहार

धनतेरस

धनतेरस पूजा मुहूर्त
20:53⁠–⁠21:34
प्रदोष काल 19:07⁠–⁠21:34

धनतेरस शनि 14 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शनि 14 अक्टूबर क्यों?

धनतेरस: Pāthardi में हर तारीख़

व्रत

प्रदोष व्रत

प्रदोष पूजा मुहूर्त
19:07⁠–⁠21:34
प्रदोष काल 19:07⁠–⁠21:34

प्रदोष व्रत शनि 14 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शनि 14 अक्टूबर क्यों?

प्रदोष व्रत: Pāthardi में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

05:45 07:23 19:07अगला सूर्योदय 07:23 रवि

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 07:23–08:51कालअशुभ
  • 08:51–10:19शुभ
  • 10:19–11:47रोगअशुभ
  • 11:47–13:15उद्वेगअशुभ
  • 13:15–14:43चरसामान्य
  • 14:43–16:11लाभयमगण्ड में
  • 16:11–17:39अमृतशुभ
  • 17:39–19:07कालअशुभ

रात का चौघड़िया

  • 19:07–20:39लाभशुभ
  • 20:39–22:11उद्वेगअशुभ
  • 22:11–23:43शुभ
  • 23:43–01:15 रविअमृतशुभ
  • 01:15–02:47 रविचरसामान्य
  • 02:47–04:19 रविरोगअशुभ
  • 04:19–05:51 रविकालअशुभ
  • 05:51–07:23 रविलाभशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, शनि 14 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:45–06:34, शुभ
  • काल, अशुभ, 07:23–08:51
  • शुभ, 08:51–10:19
  • रोग, अशुभ, 10:19–11:47
  • उद्वेग, अशुभ, 11:47–13:15
  • चर, सामान्य, 13:15–14:43
  • लाभ, शुभ, 14:43–16:11
  • अमृत, शुभ, 16:11–17:39
  • काल, अशुभ, 17:39–19:07
  • लाभ, शुभ, 19:07–20:39
  • उद्वेग, अशुभ, 20:39–22:11
  • शुभ, 22:11–23:43
  • अमृत, शुभ, 23:43–01:15 रवि
  • चर, सामान्य, 01:15–02:47 रवि
  • रोग, अशुभ, 02:47–04:19 रवि
  • काल, अशुभ, 04:19–05:51 रवि
  • लाभ, शुभ, 05:51–07:23 रवि
  • गुलिक काल, 07:23–08:51, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 07:23–08:09, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 08:09–08:56, अशुभ
  • राहु काल, 10:19–11:47, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:51–13:38, शुभ
  • यमगण्ड, 14:43–16:11, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:45–06:34 रवि

हर मान कैसे निकलता है

Pāthardi में धनतेरस शनि 14 अक्टूबर को क्यों है?

धनतेरस शनि 14 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।

द्वादशी 18:00 19:00 20:00 21:00 22:00 23:00 शुक्र 13 अक्टूबर प्रदोष काल 19:08–21:35
द्वादशी 18:00 20:00 22:00 शुक्र 13 अक्टूबर प्रदोष काल 19:08–21:35
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 14 अक्टूबर को 04:54 से रवि 15 अक्टूबर को 07:27 तक है, इसलिए केवल शनिवार का प्रदोष काल (19:07–21:34) उसके भीतर है। धनतेरस का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।

धनतेरस पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 19:07–21:34। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 20:53 से 21:34 तक उदित रहता है।

धनतेरस: Pāthardi में हर तारीख़

Pāthardi में प्रदोष व्रत शनि 14 अक्टूबर को क्यों है?

प्रदोष व्रत शनि 14 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।

द्वादशी 18:00 19:00 20:00 21:00 22:00 23:00 शुक्र 13 अक्टूबर प्रदोष काल 19:08–21:35
द्वादशी 18:00 20:00 22:00 शुक्र 13 अक्टूबर प्रदोष काल 19:08–21:35
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 14 अक्टूबर को 04:54 से रवि 15 अक्टूबर को 07:27 तक है, इसलिए केवल शनिवार का प्रदोष काल (19:07–21:34) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।

प्रदोष व्रत: Pāthardi में हर तारीख़

शनि 14 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण त्रयोदशी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 325.1° आगे था: कृष्ण त्रयोदशी।

सूर्य अमावस्या 0° 325.1° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल त्रयोदशी 324°–336° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 325.1° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल त्रयोदशी 324°–336° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 324°–336° अट्ठाईसवीं है, कृष्ण त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:23। द्वादशी उससे पहले 04:54 पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 07:27 रवि को समाप्त होगी, जब बढ़त 336° होगी। बढ़त 2 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

त्रयोदशी दो सूर्योदयों पर क्यों है?

त्रयोदशी यहाँ शनि 14 और रवि 15 अक्टूबर दोनों के सूर्योदय पर है।

द्वादशी त्रयोदशी त्रयोदशी चतुर्दशी शनि 14 अक्टूबर सुबह रवि 15 अक्टूबर सुबह Pāthardi IST 04:54 07:27 07:23 त्रयोदशी 07:23 त्रयोदशी त्रयोदशी इस सूर्योदय पर है और इस पर भी
द्वादशी त्रयोदशी त्रयोदशी चतुर्दशी शनि 14 अक्टूबर सुबह रवि 15 अक्टूबर सुबह Pāthardi IST 04:54 07:27 07:23 त्रयोदशी 07:23 त्रयोदशी त्रयोदशी इस सूर्योदय पर है और इस पर भी
समय नीचे की ओर · धारीदार रेखा: तिथि बदली

दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। त्रयोदशी 04:54 को, सूर्योदय 07:23 से पहले, शुरू हुई और 07:27 रवि को, अगले सूर्योदय 07:23 रवि के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन त्रयोदशी है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।

शनि 14 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:45–06:34

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:45–06:34।

सूर्यास्त 19:08 शुक्र सूर्योदय 07:23 शनि समय, ऊँचाई नहीं शुक्र 13 अक्टूबर का दिन 14 1
सूर्यास्त 19:08 शुक्र सूर्योदय 07:23 शनि समय, ऊँचाई नहीं शुक्र 13 अक्टूबर का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · शुक्रवार का दिन धुँधला

शुक्र 13 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 19:08 शुक्र से सूर्योदय 07:23 तक थी, 12 घं 15 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

शनि 14 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:51–13:38

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:51–13:38।

शनि 14 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:23–08:09

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 07:23–08:09 और 08:09–08:56।

शनि 14 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:09–08:56

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 07:23–08:09 और 08:09–08:56।

सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं 8 1 2
सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं 8 1 2
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 1, 2

यहाँ दिन, 07:23 से 19:07, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 46 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 07:23–08:09 और 08:09–08:56।

शनि 14 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

07:23–08:51 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।

सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं काल
सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं काल
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 07:23 से 19:07, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 19:07 से 07:23 रवि, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

शनि 14 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 10:19–11:47

राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:19–11:47।

शनि 14 अक्टूबर को यमगंड कब है? 14:43–16:11

यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:43–16:11।

शनि 14 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 07:23–08:51

गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:23–08:51।

सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: गुलिक काल 1, यमगण्ड 6

यहाँ दिन 07:23 से 19:07 तक है, 11 घं 44 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।

सूर्योदय और सूर्यास्त

शनि 14 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:23

यहाँ दिन: सूर्योदय 07:23, सूर्यास्त 19:07, 11 घं 44 मि का दिन।

शनि 14 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:07

यहाँ दिन: सूर्योदय 07:23, सूर्यास्त 19:07, 11 घं 44 मि का दिन।

सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:40 चंद्रोदय 05:43 रवि
सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:40 चंद्रोदय 05:43 रवि
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

शनि 14 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाफाल्गुनी

सूर्योदय पर चंद्रमा 142.6° पर था: पूर्वाफाल्गुनी, पद 3।

चंद्रमा सूर्य 0° पूर्वाफाल्गुनी चंद्रमा 142.6° अगला: उत्तराफाल्गुनी पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° पूर्वाफाल्गुनी चंद्रमा 142.6° अगला: उत्तराफाल्गुनी पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाफाल्गुनी 133°20′–146°40′ तक है; चंद्रमा 140° पर उसके पद 3 में आया। वह 15:38 को निकलेगा, उत्तराफाल्गुनी में।

शनि 14 अक्टूबर को कौन सा योग है? ब्रह्म

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 320.1° थे: ब्रह्म।

सूर्य 177.5° + चंद्रमा 142.6° = 320.1° ब्रह्म 320°00′–333°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 177.5° + चंद्रमा 142.6° = 320.1° ब्रह्म 320°00′–333°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 177.5° + 142.6° = 320.1°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 320°00′–333°20′ पच्चीसवाँ है, ब्रह्म। यह 08:12 रवि को समाप्त होता है, फिर इन्द्र।

शनि 14 अक्टूबर को कौन सा करण है? गर

सूर्योदय पर बढ़त 325.1° थी: त्रयोदशी का पहला आधा, गर।

सूर्य अमावस्या 0° 325.1° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल त्रयोदशी 324°–336° गर 324°–330° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 325.1° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल त्रयोदशी 324°–336° गर 324°–330° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 18:11 तक है, जब बढ़त 330° होगी; वणिज 07:27 रवि तक।

शनि 14 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार

यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 07:23, पर शुरू हुआ: शनिवार।

शनिवार सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 रवि अब भी शनिवार
शनिवार सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 रवि अब भी शनिवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:23 से 07:23 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।

शनि 14 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन

यह मास 17 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।

1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 16 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 17 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।

शनि 14 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।

अमान्त पूर्णिमान्त कार्तिक आश्विन कृष्ण शुक्ल शनि 14 अक्टूबर अमावस्या 17 सित॰ पूर्णिमा 2 अक्टू॰ अमावस्या 17 अक्टू॰ पूर्णिमा 31 अक्टू॰
अमान्त पूर्णिमान्त कार्तिक आश्विन कृष्ण शुक्ल शनि 14 अक्टूबर अमावस्या 17 सित॰ पूर्णिमा 2 अक्टू॰ अमावस्या 17 अक्टू॰ पूर्णिमा 31 अक्टू॰
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।

शनि 14 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2001 · शक 1866

विक्रम संवत 2001 24 मार्च 1944 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 24 मार्च 1944 18:06 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शनि 14 अक्टूबर सूर्य 177.5° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 24 मार्च 1944 18:06 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शनि 14 अक्टूबर सूर्य 177.5° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 1944, 18:06 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 196.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2001 गिनता है; शक संवत 1866।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

शनि 14 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:43 रवि

चंद्रमा यहाँ 05:43 रवि पर उदय होता है।

शनि 14 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:40

सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:40 चंद्रोदय 05:43 रवि
सूर्योदय 07:23 सूर्यास्त 19:07 सूर्योदय 07:23 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:40 चंद्रोदय 05:43 रवि
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:40 पर अस्त हुआ; वह फिर 05:43 रवि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:40 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 05:43 रवि पर उदय होगा।