Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग मंगल 17 मार्च 1908
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
1970 से पहले के समय UTC+5:30 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
शुक्ल पक्ष · 07:58 बुध तक
नई दिल्ली से अलग तिथि कारण जानें पूर्णिमा यहाँ दो सूर्योदयों तक है कारण जानेंत्योहार
होलिका दहन
होलिका दहन मंगल 17 मार्च को है, भद्रा समाप्त होने (19:17) के बाद। मंगल 17 मार्च क्यों?
होलिका दहन: Pāthardi में हर तारीख़व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा मंगल 17 मार्च को है: पूर्णिमा दो सूर्योदयों पर है, और पहला लिया जाता है। मंगल 17 मार्च क्यों?
पूर्णिमा: Pāthardi में हर तारीख़17 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, मंगल 17 मार्च
- 05:00–05:48ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:36 से
- 11:07–12:37लाभ चौघड़िया
-
11:07–11:25अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · पूर्वाफाल्गुनी में
- 12:13–12:37अभिजीत मुहूर्तगुलिक काल छोड़कर
- 12:37–14:08अमृत चौघड़ियागुलिक काल में
- 15:38–17:09शुभ चौघड़ियाराहु काल में
- सूर्यास्त 18:39 के बाद
- 20:08–21:38लाभ चौघड़िया
- 23:07–23:25शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:13–00:37 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:37–02:07 बुधअमृत चौघड़िया
- 05:00–05:47 बुधअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:36–08:06रोगअशुभ
- 08:06–09:37उद्वेगअशुभ
- 09:37–11:07चरसामान्य
- 11:07–12:37लाभशुभ
- 12:37–14:08अमृतगुलिक काल में
- 14:08–15:38कालअशुभ
- 15:38–17:09शुभराहु काल में
- 17:09–18:39रोगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:39–20:08कालअशुभ
- 20:08–21:38लाभशुभ
- 21:38–23:07उद्वेगअशुभ
- 23:07–00:37 बुधशुभ
- 00:37–02:07 बुधअमृतशुभ
- 02:07–03:36 बुधचरसामान्य
- 03:36–05:06 बुधरोगअशुभ
- 05:06–06:35 बुधकालअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, मंगल 17 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:00–05:48, शुभ
- रोग, अशुभ, 06:36–08:06
- उद्वेग, अशुभ, 08:06–09:37
- चर, सामान्य, 09:37–11:07
- लाभ, शुभ, 11:07–12:37
- अमृत, शुभ, 12:37–14:08
- काल, अशुभ, 14:08–15:38
- शुभ, 15:38–17:09
- रोग, अशुभ, 17:09–18:39
- काल, अशुभ, 18:39–20:08
- लाभ, शुभ, 20:08–21:38
- उद्वेग, अशुभ, 21:38–23:07
- शुभ, 23:07–00:37 बुध
- अमृत, शुभ, 00:37–02:07 बुध
- चर, सामान्य, 02:07–03:36 बुध
- रोग, अशुभ, 03:36–05:06 बुध
- काल, अशुभ, 05:06–06:35 बुध
- दुर्मुहूर्त, 09:01–09:49, अशुभ
- यमगण्ड, 09:37–11:07, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:13–13:02, शुभ
- गुलिक काल, 12:37–14:08, अशुभ
- राहु काल, 15:38–17:09, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 23:25–00:13 बुध, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:00–05:47 बुध
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में होलिका दहन मंगल 17 मार्च को क्यों है?
होलिका दहन मंगल 17 मार्च को है, भद्रा समाप्त होने (19:17) के बाद।
होलिका दहन प्रदोष काल में, भद्रा के बाहर, होता है: सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। पूर्णिमा मंगल 17 मार्च को 06:30 से बुध 18 मार्च को 07:58 तक है, इसलिए केवल मंगलवार का प्रदोष काल (18:39–21:02) उसके भीतर है। भद्रा 19:17 तक है, और धर्मसिंधु विधि भद्रा में नहीं करवाता: यह 19:17 से होती है।
होलिका दहन मुहूर्त: भद्रा के बाद का समय, 19:17–21:02।
Pāthardi में पूर्णिमा मंगल 17 मार्च को क्यों है?
पूर्णिमा मंगल 17 मार्च को है: पूर्णिमा दो सूर्योदयों पर है, और पहला लिया जाता है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 17 मार्च को 06:36 और बुध 18 मार्च को 06:35। दो सूर्योदयों पर हो तो निर्णयसिंधु पहला दिन लेता है: मंगल 17 मार्च। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
मंगल 17 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 168° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:36। चतुर्दशी उससे पहले 06:30 पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 07:58 बुध को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 3 मार्च की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
पूर्णिमा दो सूर्योदयों पर क्यों है?
पूर्णिमा यहाँ मंगल 17 और बुध 18 मार्च दोनों के सूर्योदय पर है।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। पूर्णिमा 06:30 को, सूर्योदय 06:36 से पहले, शुरू हुई और 07:58 बुध को, अगले सूर्योदय 06:35 बुध के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन पूर्णिमा है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।
नई दिल्ली में चतुर्दशी क्यों है?
नई दिल्ली में चतुर्दशी है, Pāthardi में पूर्णिमा।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:29, चतुर्दशी की समाप्ति 06:30 से पहले हुआ: यह दिन चतुर्दशी है।
Pāthardi · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:36, चतुर्दशी की समाप्ति 06:30 के बाद हुआ: यह दिन पूर्णिमा है।
मंगल 17 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:00–05:48
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:00–05:48।
सोम 16 मार्च की रात सूर्यास्त 18:39 सोम से सूर्योदय 06:36 तक थी, 11 घं 57 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
मंगल 17 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:13–13:02
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:13–13:02।
मंगल 17 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 09:01–09:49
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:01–09:49, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:25–00:13 बुध।
मंगल 17 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 23:25–00:13 बुध
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:01–09:49, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:25–00:13 बुध।
यहाँ दिन, 06:36 से 18:39, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 09:01–09:49 और 23:25–00:13 बुध।
मंगल 17 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:36–08:06 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:36 से 18:39, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:39 से 06:35 बुध, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
मंगल 17 मार्च को राहुकाल कब है? 15:38–17:09
राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:38–17:09।
मंगल 17 मार्च को यमगंड कब है? 09:37–11:07
यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:37–11:07।
मंगल 17 मार्च को गुलिक काल कब है? 12:37–14:08
गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:37–14:08।
यहाँ दिन 06:36 से 18:39 तक है, 12 घं 3 मि। इसे 1 घं 30 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगल 17 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:36
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:36, सूर्यास्त 18:39, 12 घं 3 मि का दिन।
मंगल 17 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:39
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:36, सूर्यास्त 18:39, 12 घं 3 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 3 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 56 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 3 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 56 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
मंगल 17 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 141.5° पर था: पूर्वाफाल्गुनी, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाफाल्गुनी 133°20′–146°40′ तक है; चंद्रमा 140° पर उसके पद 3 में आया। वह 16:40 को निकलेगा, उत्तराफाल्गुनी में।
मंगल 17 मार्च को कौन सा योग है? शूल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 475° थे, एक चक्कर और 115°: शूल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 333.5° + 141.5° = 475°, एक पूरा चक्कर और 115°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 106°40′–120°00′ नौवाँ है, शूल। यह 15:38 को समाप्त होता है, फिर गण्ड।
मंगल 17 मार्च को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 168° थी: पूर्णिमा का पहला आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 19:17 तक है, जब बढ़त 174° होगी; बव 07:58 बुध तक।
मंगल 17 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार
यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 06:36, पर शुरू हुआ: मंगलवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:36 से 06:35 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।
मंगल 17 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 3 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 13 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 1 अप्रैल, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
मंगल 17 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 3 मार्च की अमावस्या ने, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में फाल्गुन है।
मंगल 17 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 1964 · शक 1829
विक्रम संवत 1964 13 अप्रैल 1907 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 13 अप्रैल 1907, 00:35 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 334.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1964 गिनता है; शक संवत 1829।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
मंगल 17 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:09
चंद्रमा यहाँ 18:09 पर उदय होता है।
चंद्रमा 18:09 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।