Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग रवि 10 मार्च 1907
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
1970 से पहले के समय UTC+5:30 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
व्रत
परमा एकादशी
परमा एकादशी रवि 10 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है। रवि 10 मार्च क्यों?
परमा एकादशी: Pāthardi में हर तारीख़10 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 10 मार्च
- 05:06–05:54ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:42 से
- 09:41–11:10लाभ चौघड़िया
- 11:10–12:40अमृत चौघड़िया
- 12:16–12:40अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 14:09–15:38शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:37 के बाद
- 18:37–20:07शुभ चौघड़िया
- 20:07–21:38अमृत चौघड़िया
- 02:10–03:40 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:11–06:42 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:05–05:53 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:42–08:12उद्वेगअशुभ
- 08:12–09:41चरसामान्य
- 09:41–11:10लाभशुभ
- 11:10–12:40अमृतशुभ
- 12:40–14:09कालअशुभ
- 14:09–15:38शुभ
- 15:38–17:07रोगअशुभ
- 17:07–18:37उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:37–20:07शुभ
- 20:07–21:38अमृतशुभ
- 21:38–23:09चरसामान्य
- 23:09–00:39 सोमरोगअशुभ
- 00:39–02:10 सोमकालअशुभ
- 02:10–03:40 सोमलाभशुभ
- 03:40–05:11 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:11–06:42 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 10 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:06–05:54, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:42–08:12
- चर, सामान्य, 08:12–09:41
- लाभ, शुभ, 09:41–11:10
- अमृत, शुभ, 11:10–12:40
- काल, अशुभ, 12:40–14:09
- शुभ, 14:09–15:38
- रोग, अशुभ, 15:38–17:07
- उद्वेग, अशुभ, 17:07–18:37
- शुभ, 18:37–20:07
- अमृत, शुभ, 20:07–21:38
- चर, सामान्य, 21:38–23:09
- रोग, अशुभ, 23:09–00:39 सोम
- काल, अशुभ, 00:39–02:10 सोम
- लाभ, शुभ, 02:10–03:40 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:40–05:11 सोम
- शुभ, 05:11–06:42 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 12:16–13:03, शुभ
- यमगण्ड, 12:40–14:09, अशुभ
- गुलिक काल, 15:38–17:07, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:01–17:49, अशुभ
- राहु काल, 17:07–18:37, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:05–05:53 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में परमा एकादशी रवि 10 मार्च को क्यों है?
परमा एकादशी रवि 10 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 10 मार्च को सूर्योदय पर है, 06:42: रवि 10 मार्च। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:52 शनि पर, उससे (05:06–06:42) पहले, समाप्त हुई।
रवि 10 मार्च को कौन सी तिथि है? कृष्ण एकादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 305.4° आगे था: कृष्ण एकादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 300°–312° छब्बीसवीं है, कृष्ण एकादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:42। दशमी उससे पहले 20:52 शनि पर समाप्त हुई। एकादशी 18:43 को समाप्त होगी, जब बढ़त 312° होगी। बढ़त 28 फ़रवरी की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
रवि 10 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:06–05:54
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:06–05:54।
शनि 9 मार्च की रात सूर्यास्त 18:36 शनि से सूर्योदय 06:42 तक थी, 12 घं 6 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 10 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:16–13:03
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:16–13:03।
रवि 10 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 17:01–17:49
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 17:01–17:49।
यहाँ दिन, 06:42 से 18:37, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 17:01–17:49।
रवि 10 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:42–08:12 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:42 से 18:37, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:37 से 06:42 सोम, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 10 मार्च को राहुकाल कब है? 17:07–18:37
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:07–18:37।
रवि 10 मार्च को यमगंड कब है? 12:40–14:09
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:40–14:09।
रवि 10 मार्च को गुलिक काल कब है? 15:38–17:07
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:38–17:07।
यहाँ दिन 06:42 से 18:37 तक है, 11 घं 55 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 10 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:42
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:42, सूर्यास्त 18:37, 11 घं 55 मि का दिन।
रवि 10 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:37
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:42, सूर्यास्त 18:37, 11 घं 55 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 55 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 5 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 55 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 5 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 10 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 271.2° पर था: उत्तराषाढा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराषाढा 266°40′–280°00′ तक है; चंद्रमा 270° पर उसके पद 2 में आया। वह 21:39 को निकलेगा, श्रवण में।
रवि 10 मार्च को कौन सा योग है? वरीयान्
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 597° थे, एक चक्कर और 237°: वरीयान्।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 325.8° + 271.2° = 597°, एक पूरा चक्कर और 237°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 226°40′–240°00′ अठारहवाँ है, वरीयान्। यह 11:33 को समाप्त होता है, फिर परिघ।
रवि 10 मार्च को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 305.4° थी: एकादशी का पहला आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए एकादशी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 07:47 तक है, जब बढ़त 306° होगी; बालव 18:43 तक।
रवि 10 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:42, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:42 से 06:42 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 10 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन (अधिक)
12 फ़रवरी और 14 मार्च की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक फाल्गुन।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 12 फ़रवरी 23:12 मंगल से 14 मार्च 11:34 गुरु तक सूर्य कुंभ में रहा; मीन में वह अमावस्या के बाद 14 मार्च 12:29 गुरु को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक फाल्गुन है, जो फाल्गुन से पहले आता है।
रवि 10 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष फाल्गुन (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 मार्च की अमावस्या, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ फाल्गुन (अधिक) है, और अमान्त गणना में फाल्गुन (अधिक)।
रवि 10 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 1963 · शक 1828
विक्रम संवत 1963 25 मार्च 1906 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 25 मार्च 1906, 05:21 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 344.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1963 गिनता है; शक संवत 1828।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 10 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:23 सोम
चंद्रमा यहाँ 04:23 सोम पर उदय होता है।
रवि 10 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 14:53
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:53 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:23 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:53 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:23 सोम पर उदय होगा।