tithika
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Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग गुरु 18 मई 1905

महाराष्ट्र, भारत

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय MMT में

1970 से पहले के समय UTC+5:21:10 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।

चतुर्दशी

शुक्ल पक्ष · 06:17 तक

फिर पूर्णिमा · 02:57 शुक्र तक

यहाँ कोई दिन पूर्णिमा नहीं कारण जानें

त्योहार

बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा गुरु 18 मई को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। गुरु 18 मई क्यों?

बुद्ध पूर्णिमा: Pāthardi में हर तारीख़

व्रत

पूर्णिमा

पूर्णिमा गुरु 18 मई को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। गुरु 18 मई क्यों?

पूर्णिमा: Pāthardi में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

04:17 05:44 18:48अगला सूर्योदय 05:44 शुक्र

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 05:44–07:22शुभयमगण्ड में
  • 07:22–09:00रोगअशुभ
  • 09:00–10:38उद्वेगअशुभ
  • 10:38–12:16चरसामान्य
  • 12:16–13:54लाभशुभ
  • 13:54–15:32अमृतराहु काल में
  • 15:32–17:10कालअशुभ
  • 17:10–18:48शुभ

रात का चौघड़िया

  • 18:48–20:10अमृतशुभ
  • 20:10–21:32चरसामान्य
  • 21:32–22:54रोगअशुभ
  • 22:54–00:16 शुक्रकालअशुभ
  • 00:16–01:38 शुक्रलाभशुभ
  • 01:38–03:00 शुक्रउद्वेगअशुभ
  • 03:00–04:22 शुक्रशुभ
  • 04:22–05:44 शुक्रअमृतशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, गुरु 18 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:17–05:00, शुभ
  • शुभ, 05:44–07:22
  • रोग, अशुभ, 07:22–09:00
  • उद्वेग, अशुभ, 09:00–10:38
  • चर, सामान्य, 10:38–12:16
  • लाभ, शुभ, 12:16–13:54
  • अमृत, शुभ, 13:54–15:32
  • काल, अशुभ, 15:32–17:10
  • शुभ, 17:10–18:48
  • अमृत, शुभ, 18:48–20:10
  • चर, सामान्य, 20:10–21:32
  • रोग, अशुभ, 21:32–22:54
  • काल, अशुभ, 22:54–00:16 शुक्र
  • लाभ, शुभ, 00:16–01:38 शुक्र
  • उद्वेग, अशुभ, 01:38–03:00 शुक्र
  • शुभ, 03:00–04:22 शुक्र
  • अमृत, शुभ, 04:22–05:44 शुक्र
  • यमगण्ड, 05:44–07:22, अशुभ
  • गुलिक काल, 09:00–10:38, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 10:06–10:58, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 11:50–12:42, शुभ
  • राहु काल, 13:54–15:32, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 15:19–16:11, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:16–05:00 शुक्र

हर मान कैसे निकलता है

Pāthardi में बुद्ध पूर्णिमा गुरु 18 मई को क्यों है?

बुद्ध पूर्णिमा गुरु 18 मई को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।

चतुर्दशी पूर्णिमा 06:17 04:00 05:00 07:00 गुरु 18 मई स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:44
चतुर्दशी पूर्णिमा 06:17 04:00 05:00 07:00 गुरु 18 मई स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:44
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्योदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

बुद्ध पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 18 मई को 06:17 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और शुक्र 19 मई को 02:57 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 18 मई। बुद्ध पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।

बुद्ध पूर्णिमा: Pāthardi में हर तारीख़

Pāthardi में पूर्णिमा गुरु 18 मई को क्यों है?

पूर्णिमा गुरु 18 मई को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।

चतुर्दशी पूर्णिमा 06:17 04:00 05:00 07:00 गुरु 18 मई स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:44
चतुर्दशी पूर्णिमा 06:17 04:00 05:00 07:00 गुरु 18 मई स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:44
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्योदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 18 मई को 06:17 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और शुक्र 19 मई को 02:57 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 18 मई। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।

पूर्णिमा: Pāthardi में हर तारीख़

गुरु 18 मई को कौन सी तिथि है? शुक्ल चतुर्दशी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 167.7° आगे था: शुक्ल चतुर्दशी।

सूर्य अमावस्या 0° 167.7° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण चतुर्दशी 156°–168° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 167.7° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण चतुर्दशी 156°–168° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 156°–168° चौदहवीं है, शुक्ल चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:44। त्रयोदशी उससे पहले 09:43 बुध पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 06:17 को समाप्त होगी, जब बढ़त 168° होगी। बढ़त 4 मई की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।

पूर्णिमा क्षय क्यों है?

पूर्णिमा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन पूर्णिमा नहीं होता।

चतुर्दशी पूर्णिमा पूर्णिमा प्रतिपदा गुरु 18 मई सुबह शुक्र 19 मई सुबह Pāthardi IST 06:17 02:57 05:44 चतुर्दशी 05:44 प्रतिपदा पूर्णिमा इस सूर्योदय के बाद शुरू और इससे पहले समाप्त
चतुर्दशी पूर्णिमा पूर्णिमा प्रतिपदा गुरु 18 मई सुबह शुक्र 19 मई सुबह Pāthardi IST 06:17 02:57 05:44 चतुर्दशी 05:44 प्रतिपदा पूर्णिमा इस सूर्योदय के बाद शुरू और इससे पहले समाप्त
समय नीचे की ओर · धारीदार रेखा: तिथि बदली

दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। पूर्णिमा 06:17 को शुरू हुई और 02:57 शुक्र को समाप्त, 05:44 और 05:44 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को चतुर्दशी है और शुक्रवार को प्रतिपदा: पूर्णिमा यहाँ क्षय तिथि है।

गुरु 18 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:17–05:00

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:17–05:00।

सूर्यास्त 18:48 बुध सूर्योदय 05:44 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 17 मई का दिन 14 1
सूर्यास्त 18:48 बुध सूर्योदय 05:44 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 17 मई का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · बुधवार का दिन धुँधला

बुध 17 मई की रात सूर्यास्त 18:48 बुध से सूर्योदय 05:44 तक थी, 10 घं 56 मि। इसे 43 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

गुरु 18 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:50–12:42

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:50–12:42।

गुरु 18 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 10:06–10:58

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:06–10:58 और 15:19–16:11।

गुरु 18 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 15:19–16:11

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:06–10:58 और 15:19–16:11।

सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 12 1
सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 6, 12

यहाँ दिन, 05:44 से 18:48, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 52 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:06–10:58 और 15:19–16:11।

गुरु 18 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

05:44–07:22 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।

सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 05:44 से 18:48, 1 घं 38 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 18:48 से 05:44 शुक्र, 1 घं 22 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

गुरु 18 मई को राहुकाल कब है? 13:54–15:32

राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:54–15:32।

गुरु 18 मई को यमगंड कब है? 05:44–07:22

यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:44–07:22।

गुरु 18 मई को गुलिक काल कब है? 09:00–10:38

गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:00–10:38।

सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 1, गुलिक काल 3

यहाँ दिन 05:44 से 18:48 तक है, 13 घं 4 मि। इसे 1 घं 38 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

गुरु 18 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:44

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:44, सूर्यास्त 18:48, 13 घं 4 मि का दिन।

गुरु 18 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:48

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:44, सूर्यास्त 18:48, 13 घं 4 मि का दिन।

सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 18:21
सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 18:21
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 4 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 56 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 4 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 56 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

गुरु 18 मई को कौन सा नक्षत्र है? विशाखा

सूर्योदय पर चंद्रमा 201.5° पर था: विशाखा, पद 1।

चंद्रमा सूर्य 0° विशाखा चंद्रमा 201.5° अगला: अनुराधा पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° विशाखा चंद्रमा 201.5° अगला: अनुराधा पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। विशाखा 200°00′–213°20′ तक है; चंद्रमा 200° पर उसके पद 1 में आया। वह 00:44 शुक्र को निकलेगा, अनुराधा में।

गुरु 18 मई को कौन सा योग है? वरीयान्

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 235.4° थे: वरीयान्।

सूर्य 33.9° + चंद्रमा 201.5° = 235.4° वरीयान् 226°40′–240°00′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 33.9° + चंद्रमा 201.5° = 235.4° वरीयान् 226°40′–240°00′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 33.9° + 201.5° = 235.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 226°40′–240°00′ अठारहवाँ है, वरीयान्। यह 12:41 को समाप्त होता है, फिर परिघ।

गुरु 18 मई को कौन सा करण है? वणिज

सूर्योदय पर बढ़त 167.7° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, वणिज।

सूर्य अमावस्या 0° 167.7° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण चतुर्दशी 156°–168° वणिज 162°–168° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 167.7° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण चतुर्दशी 156°–168° वणिज 162°–168° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 20:00 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 162° हुई; वणिज 06:17 तक है।

गुरु 18 मई को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार

यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:44, पर शुरू हुआ: गुरुवार।

गुरुवार सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
गुरुवार सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:44 से 05:44 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।

गुरु 18 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख

यह मास 4 मई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।

मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 14 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 3 जून, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।

गुरु 18 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख का है।

अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त वैशाख कृष्ण शुक्ल गुरु 18 मई पूर्णिमा 19 अप्रैल अमावस्या 4 मई पूर्णिमा 19 मई अमावस्या 3 जून
अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त वैशाख कृष्ण शुक्ल गुरु 18 मई पूर्णिमा 19 अप्रैल अमावस्या 4 मई पूर्णिमा 19 मई अमावस्या 3 जून
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 4 मई की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख है।

गुरु 18 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 1962 · शक 1827

विक्रम संवत 1962 5 अप्रैल 1905 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 5 अप्रैल 1905 04:44 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 18 मई सूर्य 33.9° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 5 अप्रैल 1905 04:44 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 18 मई सूर्य 33.9° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 5 अप्रैल 1905, 04:44 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 41.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1962 गिनता है; शक संवत 1827।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

गुरु 18 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:21

चंद्रमा यहाँ 18:21 पर उदय होता है।

सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 18:21
सूर्योदय 05:44 सूर्यास्त 18:48 सूर्योदय 05:44 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 18:21
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

चंद्रमा 18:21 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।

चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।