Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग गुरु 5 सितंबर 1901
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय MMT में
1970 से पहले के समय UTC+5:21:10 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
त्योहार
जन्माष्टमी
जन्माष्टमी गुरु 5 सितंबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में अष्टमी है, और किसी रात नहीं। गुरु 5 सितंबर क्यों?
जन्माष्टमी: Pāthardi में हर तारीख़5 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 5 सितंबर
- 04:33–05:19ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:05 से
- 06:05–07:39शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:54–12:43अभिजीत मुहूर्त
- 12:19–13:52लाभ चौघड़िया
- 13:52–15:25अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:59–18:32शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:32 के बाद
- 18:32–19:59अमृत चौघड़िया
-
21:53–23:24अमृत कालरोहिणी में
- 00:19–01:45 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:12–04:39 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:39–06:05 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:33–05:19 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:05–07:39शुभयमगण्ड में
- 07:39–09:12रोगअशुभ
- 09:12–10:45उद्वेगअशुभ
- 10:45–12:19चरसामान्य
- 12:19–13:52लाभशुभ
- 13:52–15:25अमृतराहु काल में
- 15:25–16:59कालअशुभ
- 16:59–18:32शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:32–19:59अमृतशुभ
- 19:59–21:25चरसामान्य
- 21:25–22:52रोगअशुभ
- 22:52–00:19 शुक्रकालअशुभ
- 00:19–01:45 शुक्रलाभशुभ
- 01:45–03:12 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:12–04:39 शुक्रशुभ
- 04:39–06:05 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 5 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:33–05:19, शुभ
- शुभ, 06:05–07:39
- रोग, अशुभ, 07:39–09:12
- उद्वेग, अशुभ, 09:12–10:45
- चर, सामान्य, 10:45–12:19
- लाभ, शुभ, 12:19–13:52
- अमृत, शुभ, 13:52–15:25
- काल, अशुभ, 15:25–16:59
- शुभ, 16:59–18:32
- अमृत, शुभ, 18:32–19:59
- चर, सामान्य, 19:59–21:25
- रोग, अशुभ, 21:25–22:52
- काल, अशुभ, 22:52–00:19 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:19–01:45 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:45–03:12 शुक्र
- शुभ, 03:12–04:39 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:39–06:05 शुक्र
- यमगण्ड, 06:05–07:39, अशुभ
- गुलिक काल, 09:12–10:45, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:14–11:04, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:54–12:43, शुभ
- राहु काल, 13:52–15:25, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:13–16:03, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:33–05:19 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में जन्माष्टमी गुरु 5 सितंबर को क्यों है?
जन्माष्टमी गुरु 5 सितंबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में अष्टमी है, और किसी रात नहीं।
कृष्ण जन्म निशीथ काल में मनाया जाता है, आधी रात का मुहूर्त। अष्टमी गुरु 5 सितंबर को 07:46 से शुक्र 6 सितंबर को 05:54 तक है, इसलिए केवल गुरुवार की रात का निशीथ काल (23:56–00:42 शुक्र) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।
गुरु 5 सितंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण सप्तमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 263.1° आगे था: कृष्ण सप्तमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 252°–264° बाईसवीं है, कृष्ण सप्तमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:05। षष्ठी उससे पहले 09:56 बुध पर समाप्त हुई। सप्तमी 07:46 को समाप्त होगी, जब बढ़त 264° होगी। बढ़त 30 अगस्त की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
अष्टमी क्षय क्यों है?
अष्टमी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन अष्टमी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। अष्टमी 07:46 को शुरू हुई और 05:54 शुक्र को समाप्त, 06:05 और 06:05 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को सप्तमी है और शुक्रवार को नवमी: अष्टमी यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 5 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:33–05:19
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:33–05:19।
बुध 4 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:33 बुध से सूर्योदय 06:05 तक थी, 11 घं 32 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 5 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:54–12:43
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:54–12:43।
गुरु 5 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:14–11:04
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:14–11:04 और 15:13–16:03।
गुरु 5 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:13–16:03
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:14–11:04 और 15:13–16:03।
यहाँ दिन, 06:05 से 18:32, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:14–11:04 और 15:13–16:03।
गुरु 5 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:05–07:39 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:05 से 18:32, 1 घं 33 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:32 से 06:05 शुक्र, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 5 सितंबर को राहुकाल कब है? 13:52–15:25
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:52–15:25।
गुरु 5 सितंबर को यमगंड कब है? 06:05–07:39
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:05–07:39।
गुरु 5 सितंबर को गुलिक काल कब है? 09:12–10:45
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:12–10:45।
यहाँ दिन 06:05 से 18:32 तक है, 12 घं 27 मि। इसे 1 घं 33 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 5 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:05
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:05, सूर्यास्त 18:32, 12 घं 27 मि का दिन।
गुरु 5 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:32
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:05, सूर्यास्त 18:32, 12 घं 27 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 27 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 33 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 27 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 33 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 5 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? रोहिणी
सूर्योदय पर चंद्रमा 42.3° पर था: रोहिणी, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। रोहिणी 40°00′–53°20′ तक है; चंद्रमा 40° पर उसके पद 1 में आया। वह 00:55 शुक्र को निकलेगा, मृगशिरा में।
गुरु 5 सितंबर को कौन सा योग है? हर्षण
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 181.6° थे: हर्षण।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 139.3° + 42.3° = 181.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 173°20′–186°40′ चौदहवाँ है, हर्षण। यह 14:11 को समाप्त होता है, फिर वज्र।
गुरु 5 सितंबर को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 263.1° थी: सप्तमी का दूसरा आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए सप्तमी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 20:49 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 258° हुई; बव 07:46 तक है।
गुरु 5 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:05, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:05 से 06:05 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 5 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? श्रावण
यह मास 14 अगस्त की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कर्क में था: श्रावण।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कर्क से श्रावण। सूर्य 16 अगस्त को, मास के भीतर, सिंह में जाता है। अगली अमावस्या, 13 सितंबर, उसे सिंह में पाती है और भाद्रपद शुरू करती है।
गुरु 5 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? भाद्रपद
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष भाद्रपद का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 13 सितंबर की अमावस्या, सूर्य सिंह में, भाद्रपद शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ भाद्रपद है, और अमान्त गणना में श्रावण।
गुरु 5 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 1958 · शक 1823
विक्रम संवत 1958 20 मार्च 1901 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 20 मार्च 1901, 18:14 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 162.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1958 गिनता है; शक संवत 1823।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 5 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 23:51
चंद्रमा यहाँ 23:51 पर उदय होता है।
गुरु 5 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 12:22
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 12:22 पर अस्त हुआ; वह फिर 23:51 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 12:22 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 23:51 पर उदय होगा।